अपने गुरु रामकिशुन के पारिवारिक चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए राजनीति में आ रहे हैं ‘चेले’

कहते हैं कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता जब जिसको जहां मौका मिलता है वह अपने पूर्व राजनीतिक गुरु या किसी और राजनीतिक हस्ती को चुनौती देने के लिए मैदान में उतर जाता है। कुछ ऐसा ही जल्द चंदौली जिले में देखने को मिलने वाला है यहां समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के पारिवारिक चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए शिवपाल यादव की सेकुलर मोर्चा से मैदान में आने की तैयारी कर रहा है।
बताया जा रहा है कि जल्द ही पारसनाथ सिंह यादव और रमेश मौर्य नाम के दो राजनीतिक नेता रामकिशुन यादव और बाबू लाल यादव के पारिवारिक चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए शिवपाल यादव के सेकुलर मोर्चा से नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने जा रहे हैं ।
माना जा रहा है जल्द ही पारसनाथ यादव को जिला अध्यक्ष और रमेश मौर्या को जिले का महासचिव बनाया जा सकता है। कहा जा रहा है कि ये दोनों नेता रामकिशुन यादव के गढ़ में उन्हें तगड़ी चुनौती दे सकते हैं।
आपको बता दें कि पारसनाथ यादव राम किशुन यादव के काफी करीबी रहे और उनकी कई चुनाव में उनके लिए काफी जोशो खरोश से काम किया है तो वहीं रमेश मौर्य को बाबू लाल यादव का करीबी बताया जाता है। पिछले कई सालों से रामकिशुन यादव के संपर्क में रहने वाले पारस यादव को सपा के दम पर कई पद भी मिले हैं। वह हर आंदोलन व कार्यक्रम में रामकिशुन के आसपास देखे जा रहे थे। पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने आगे बढ़ने के लिए अब इनको उनके मुकाबले खड़ा कर दिया है।
यही नहीं समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के मंडल प्रभारी सपा के सकलडीहा विधायक प्रभुनारायण यादव के भांजे पूर्व प्रमुख पति अरविंद यादव के यहाँ जाकर चाय पीने से चर्चा हो रही है कि अरविंद यादव सेक्युलर मोर्चा के प्रदेश के पदाधिकारी बनाए जा सकते हैं।
वहीं अरविंद यादव ने बताया कि सपा छोड़ने की कोई बात नही है प्रभारी जी हमारे यहाँ आये थे तो मैने उन लोगों को चाय जरूर पिला दी थी। केवल आतिथ्य धर्म का निर्वाह किया है। इसका गलत अर्थ न निकाला जाय।
इस तरह की चर्चा पर पारसनाथ यादव का कहना है कि जितने भी समाजवादियों की उपेक्षा की जा रही थी, उनको एकठ्ठा करके समाजवादी सेक्युलर मोर्चा को संगठित किया जाएगा और मुलायम सिंह और शिवपाल यादव को मजबूत करने का काम किया जाएगा। हम सभी लोग उसी प्रयास में लगे हैं।

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