अब सूचना आयुक्त से प्रतिदिन ले सकेंगें RIT संबंधी पूरी जानकारी – 

अब सूचना के अधिकार से संबंधित कोई भी जानकारी राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप जी से प्रतिदिन कहीं से भी ली जा सकती है। सूचना के अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई इस पहल के तहत कोई भी नागरिक व सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी आयुक्त आत्मदीप से फोन, वाट्सएप, फेसबुक पेज व इंस्टाग्राम पर या सूचना आयोग कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सूचना के अधिकार के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते है।

इस दौरान सूचना का अधिकार अधिनियम और म.प्र. सूचना का अधिकार (फीस व अपील) नियम 2005 के प्रावधानों के बारे में आवश्यक जानकारी देने के साथ वांछित मार्गदर्शन व सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे। इसके लिए पहले हर हफ्ते के अंतिम कार्यदिवस पर अपरान्ह 4 से 5 बजे का समय नियत किया गया था जिसे बदल कर अब हर कार्यदिवस पर अपरान्ह 3 से 5 बजे कर दिया गया है। दिन और समय में यह बढ़ोतरी इसलिए की गई है क्योंकि फोन व सोशल मीडिया पर विभिन्न राज्यों के लोगों के पूछताछ व परामर्ष संबंधी संदेश बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहां इस प्रकार की निःशुल्क सहायता सुविधा शुरू की गई है। इसका लाभ फोन नंबर – 0755-2556873, वाट्सएप नंबर -94250 10099, फेसबुक पेज @aatmdeepRTI या इंस्टाग्राम के माध्यम से लिया जा सकता है। सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सबके लिए हितकारी सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन की स्थिति को बेहतर बनाना है। इसके लिए यह सुविधा शुरू करने के अलावा उनके द्वारा विभिन्न जिलों के दौरे कर गैर सरकारी संस्थाओं व संस्थानों के कार्यक्रमों में सूचना के अधिकार से संबंधित जानकारी दी जा रही है। जिलों में अपीलीय अधिकारियों, लोक सूचना अधिकारियों व अन्य संबंधित लोकसेवकों की कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं। साथ ही, भोपाल कोर्ट में और जिलों में कैंप कोर्ट लगाकर अपीलों की सुनवाई के दौरान भी सभी पक्षकारों की काउंसलिंग की जा रही है।आयुक्त ने कहा इन सब प्रयासों की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि सूचना का कानून लागू हुए 12 बरस से ज्यादा अरसा गुजर जाने के बाद भी ज्यादातर वर्गों के लोगों को इस महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। नतीजे में देश व प्रदेश की एक चौथाई आबादी भी सूचना के अधिकार का उपयोग नहीं कर रही है। इस मामले में महिला, बीपीएल व ग्रामीण वर्गोें के लोग सबसे पीछे हैं । प्रचार, प्रसार, प्रशिक्षण व जन जागरूकता में कमी के कारण ये हालात बने हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की आवष्यकता है। खासकर इसलिए क्योंकि सूचना का अधिकार जनता को और सषक्त बनाने के पुनीत ध्येय से दिया गया है।
यह एक ऐसा मौलिक अधिकार है जो सार्वजनिक व्यवस्था में शुचिता व पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लोकसेवकों में जनता के प्रति जवाबदेही को बढ़ावा देने का प्रभावी उपकरण सिध्द हो रहा है। इस ताकतवर और असरदार अधिकार का सदुपयोग कर नागरिक और लोकसेवक, भ्रष्टाचार व अनियमितताओं से मुक्त एवं जनता के प्रति उत्तरदायी सुशासन को सुनिश्चित करने और लोकतंत्र को स्वस्थ व सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान कर सकते हैं।

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