वर्ल्ड पर्यावरण दिवस : वाराणसी ट्री मेन

 

विश्व पर्यावरण दिवस पर धर्म और अध्यात्म की नगरी मैं आज एक ऐसे शख्स से मिलाएंगे जिनका कार्य थोड़ा अलग है. बनारस के सड़कों और गलियों पर लगे किनारे पीपल के छोटे पौधों को वह अपने घर लाते हैं. उस दिन सेवा करने के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर लगाते हैं.हम बात कर रहे हैं वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित हरेंद्र उपाध्याय का इतना ही नहीं उन्होंने अपने घर को तीन हिस्सों में बांट दिया और तीनों का अलग-अलग नामकरण भी किया आनंदवन,सदाबहार वन, चैत्र वन तीन हिस्सों में अलग-अलग पौधे लगाएं और इस तरह इनके घर में कुल मिलाकर लगभग 500 से ज्यादा पौधे हैं.

पिछले वर्ष वैश्विक महामारी आया तो सरकार ने लॉकडाउन किया था. इस लॉकडाउन के समय इन्होंने अपने घर में ही रहते हुए वन का निर्माण किया अब इनका दूसरा मुहिम है कि ज्यादा से ज्यादा पीपल के पौधे शहर में लगाए जाएं. ताकि हमारा भविष्य और समाज सुरक्षित रहें

वैश्विक महामारी के दौर में सबसे ज्यादा लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई जिसे लेकर इनका कहना है कि अगर हम घर में एक छोटा सा पौधा रखे हैं 50 पत्तियों वाला पीपल के साथ तुलसी और नीम का तो घर के संपूर्ण व्यक्ति को ऑक्सीजन मिलेगा और पीपल एक शुद्ध और महत्वपूर्ण वृक्ष है. नीम और तुलसी शरीर को शुद्ध और निरोग रखता है उन्हें पीपल प्राणवायु को शुद्ध रखता है.

पंडित हरेंद्र उपाध्याय ने बताया मैं जहां भी जिस तरफ जाता हूं मेरे बाइक पर खुद भी और झोला रहता है.मुझे जहां भी पीपल का पेड़ दिखता है मैं उसे घर लाता हूं और उसमें खाद पानी देकर उसे संरक्षित और बड़ा करता हूं उसके बाद उचित मंदिर और खाली स्थान पर देखकर मैं लगा देता हूं क्योंकि यदि वृक्ष है और यह सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है वैश्विक महामारी कोविड-19 में दूसरे फेस में लोगों की जान जाने की सबसे ज्यादा वजह ऑक्सीजन रहा. इसलिए मैं सभी से निवेदन करता हूं कि सब अपने घर में 50 पत्तों का पीपल का छोटा सा पौधा जरूर है. यह हमारे परिवार को ऑक्सीजन देगा. भविष्य में इस तरह की चीजें ना हो इसलिए हमें आपसे ही तैयार रहना होगा और सरकार को भी अपना कार्य करना है

पंडित हरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि जब वैश्विक महामारी शुरुआत में पिछले वर्ष तभी तो मैंने अपने घरों को तीन हिस्सों में बांट दिया एक घर को आनंदवन दूसरे कोने को सदाबहार वन और तीसरे को चैत्र वन हर 1 में अलग-अलग प्रकार के पौधे लगाए हैं कहीं पर नीम, पीपल, पाकड़,बरगद, अशोक,कनेल मिटी निम आदि, वही एक जगह केवल औषधीय पौधे लगाए हैं जैसे गिलोय, एलोवेरा,तुलसी, अश्वगंधा,सतावर, परिजाता, सर्पगंधा,आजवाइन,दालचीनी,मदार,सम्मी,काला धतूरा,आपा मार्ग आदि, वहीं बहुत से शो प्लांट और सीजनल फूल जिसमें गुलाब, गुड़हल, कामिनी,बेला, रातकिरानी, सदाबहारआदि

पंडित हरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि पीपल के वृक्ष को हमारे वेद शास्त्रों में विष्णु स्वरूप माना गया है. क्योंकि यह जीवन का पालनहार है.जिस प्रकार भगवान विष्णु संसार के सभी जीवो के जीवन का पालन करते हैं. इसी प्रकार पीपल भी ऑक्सीजन देकर सभी को जीवित रखता है. भगवान श्री कृष्ण ने कहा है वृक्षों में मैं पीपल यही वजह है कि यह हमारे सनातन धर्म में सबसे पूजनीय वृक्ष है और तमाम मंदिरों में और पवित्र स्थलों में इस वृक्ष को लगाया जाता है.

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