काशी विश्वनाथ : शिव-वंदन

शिव-वंदन
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हे सत्य सनातन
हे अनंत
हे शिव भोले
हे जगत-कंत

हे नीलकंठ
हे गंगाधर
जय शंकरशंभू
हर हर हर

हे महारूद्र
हे मृत्युञ्जय
जय शिव शंकर
ना व्यापे भय

हे शक्ति नियंता
संघारक
हे डमरू,त्रिशूल
के धारक

हे महादेव
हे शिवा पति
तव ध्यान मग्न
सब योगी-यती

ले अतुल भक्ति
विश्वास धार
मैं रहा आज
तुझको पुकार

मम् वंदन को
स्वीकार करो
इस धरती के
संताप हरो…

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सावन तेरा स्वागत…
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सावन तेरा स्वागत करते हैं सभी प्राणी
मेंढ़क टर्रा -टर्रा करते हैं, तेरी अगवानी
पीऊं पीऊं पुकारे तुमको, ये कोयल रानी
विरदावली सुनाते झींगर, टेर खूब तानी
हरी भरी सज जाती धरती, सर पानी पानी
तू भगवान किसान का तेरा नहीं कोई सानी
दीप-धूप से पूजन करते, मेघ तड़ित रानी
दिन को करदे रात तू ने जब-जब भी ठानी
अंजुरी भर भर प्यार लुटाता, तू महादानी
जो अगर रूठ जाये हमसे, याद आये नानी
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सखी री सावन आया
छत की मुंडेर चँढ़ मयूरा ऊंचे स्वर में गाया
उमड़- घुमड़ कर मेघा आये पानी बरसाया
पीव पीव पपीहरा बोले और मेंढ़क टर्राया
भर गये सूखे खेत तड़ाग का रूप बनाया
आने की कह गया कृष्ण बापस ना आया
मेघा संग देख बिजुरिया मेरा मन घबराया
पुरवा तीखे तीर चलावे सखी सावन आया
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— विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,
स.मा. (राज.)322201
ई-मेल :-
vishwambharvyagra@gmail.com

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