अफगानिस्तान : काबुल में गुरुद्वारे पर फिदायीन हमला, मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हुई 11

  • अफगानिस्तान सरकार ने हमले की पुष्टि की, आत्मघाती हमलावर गुरुद्वारे में मौजूद हैं
  • अल्पसंख्यकों पर आए दिन हमले, 3 साल में हजारों हिंदु और सिखों ने भारत में शरण मांगी
  • भारत ने की निंदा, कहा- महामारी के दौर में कायरतापूर्ण हमले शैतानी मानसिकता दिखाते हैं

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकियों ने बुधवार को एक गुरुद्वारे को निशाना बनाया। फिदायीनहमला सुबह 7.30 बजे हुआ, तब यहां सिख समुदाय के सैकड़ों लोग प्रार्थना के लिए जुटे थे। धमाके में 11 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इसके बाद सुरक्षाबलों ने गुरुद्वारे की घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की। 16 से ज्यादा घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। 40 से ज्यादा श्रद्धालु फंसे हैं। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।बता दें कि अफगानिस्तान में करीब 300 सिख परिवार रहतेहैं। इनकी संख्या काबुल और जलालाबाद में अधिक है। इन्हीं दो शहरों में गुरुद्वारे भी हैं।

भारत ने इस हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘कोरोनावायरसमहामारी के समय में अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थानों पर इस तरह के कायरतापूर्ण हमले, अपराधियों और उनके आकाओं की शैतानी मानसिकता दिखातेहैं।’’

कानूनविद नरिंद्र सिंह खालसा ने बताया कि उनके पास गुरुद्वारे से फोन आया था। कॉल करने वाले ने कहा कि गुरुद्वारे में 150 से ज्यादा लोग मौजूद हैं। आतंकी गुट तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट किया- इस हमले से संगठन का कोई लेनादेना नहीं है। हमने कोई हमला नहीं किया।

हमले के बाद गुरुद्वारा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।

अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक सिखों और हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर आए दिन हमले होते रहते हैं। इसके पहले 2018 में राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात करने जा रहे हिंदुओं और सिखों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था।

इसमें 19 सिख और हिंदु मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने ली थी। इन हमलों से सिख और हिंदु समुदाय डरा हुआ है। बड़ी संख्या में सिखों और हिंदुओं ने देश छोड़ने का फैसला कर लिया है। तीन सालों में काफी पीड़ितों ने भारत से शरण मांगी है।गुरुद्वारे को चारों तरफ से सुरक्षाबलों ने घेर लिया।

 

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