जेल से छूटने के बाद अर्नब ने उद्धव ठाकरे को दी बहस की चुनौती, कहा- खेल तो अब शुरू हुआ है

न्यायिक हिरासत में एक सप्ताह जेल में गुजारने और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से जमानत मिलने के बाद फिर से न्यूज रूम पहुंचे पत्रकार रिपब्लिक टीवी (Republic TV) के एडिटर इऩ चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने ‘उन्हें गिरफ्तार करने को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बुधवार को हमला बोला. अर्नब ने कहा कि उद्धव ठाकरे, सुन लो मुझे. आप हार गए. गोस्वामी ने कहा कि खेल अब शुरू हुआ है. उन्होंने कहा कि वह हर भाषा में रिपब्लिक टीवी शुरू करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनकी उपस्थिति है.

 

अर्नब की उद्धव को बहस की चुनौती

अर्नब गोस्वामी ने अपने चीर-परिचित अंदाज में सीएम उद्धव ठाकरे को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि अगर उद्धव ठाकरे को मेरी पत्रकारिता से कोई समस्या है, तो उन्हें मुझे साक्षात्कार देना चाहिए. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वो उन मुद्दों पर बहस करें जिनसे मैं असहमत हूं.

 

मैं जेल के अंदर से भी चैनल शुरू करूंगा

गोस्वामी ने कहा कि तलोजा जेल में उनसे पुलिस तीन दौर की पूछताछ करती थी. उन्होंने कहा, ” उद्धव ठाकरे आपने मुझे एक पुराने, फर्जी मामले में गिरफ्तार किया, और मुझसे माफी तक नहीं मांगी.” पत्रकार ने कहा, ” खेल अब शुरू हुआ है.” गोस्वामी ने कहा कि वह हर भाषा में रिपब्लिक टीवी शुरू करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनकी उपस्थिति है. फिर से गिरफ्तार होने की आशंका व्यक्त करते हुए गोस्वामी ने कहा, ” मैं जेल के अंदर से भी (चैनल) शुरू करूंगा, और आप (ठाकरे) कुछ नहीं कर पाएंगे.” गोस्वामी ने अंतरिम जमानत देने के लिए शीर्ष अदालत का आभार जताया.

 

अर्नब ने लगाए भारत माता की जय के नारे

अर्नब गोस्वामी ने जेल से बाहर आने के बाद भारत माता की जय के नारे लगाए. इसके अलावा, उन्होंने भारत के लोगों की जीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट को जमानत देने के लिए आभार व्यक्त किया. अर्नब गोस्वामी जिस समय तलोजा जेल से रिहा किए गए, उस वक्त जेल के बाहर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा था. अर्नब के साथ राज्य के कई पुलिसकर्मी भी मौजूद थे.

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी को बुधवार को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि अगर व्यक्तिगत स्वतंत्रता बाधित की जाती है तो यह न्याय का मजाक होगा. शीर्ष अदालत ने विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर लोगों को निशाना बनाने के राज्य सरकारों के रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त की.

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