बंगाल में हिंसा से डर रही है केंद्र सरकार

 

संपादक की कलम से

पश्चिम बंगाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर केंद्र सरकार  द्वारा कोई कारगर कदम नहीं उठाए जाने से जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वही पश्चिम बंगाल में काबिज तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है ।आने वाले दिनों में यदि यही स्थिति रही तो पूरे प्रदेश में खून खराबा के साथ कुछ भी नहीं रहेगा ।अब बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार ही जिम्मेदार होगी ।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने भी अपनी चुप्पी को तोड़ते हुए  भाजपा के पार्टी के मुखिया और केंद्र में गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल में  गिरती कानून व्यवस्था  के विषय में बताया था। इसके अलावा देश के प्रधानमंत्री से भी उन्होंने मुलाकात कर ताजा हालात  की जानकारी दी थी ।

उधर डॉक्टरों की हड़ताल ने यह साबित कर दिया है कि ममता बनर्जी  पर से लोगों का  विश्वास उठता जा रहा है कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है । केवल भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच अब ओछी राजनीति देखने को मिल रही है ।

निश्चित तौर पर यह शर्मनाक है की भगवान का दूसरा अवतार माने जाने वाले चिकित्सकों का भी राजनीतिकरण कर दिए जाने से आमजनों में आक्रोश है ।

वही डॉक्टर भी हड़ताल पर बैठे हैं और इसमें यदि कोई पीस रहा है तो निर्दोष जनता । बीमारी से चिकित्सा के  आभाव में आम आदमी मर  रही है इसमे किसी की पत्नी, किसी का भाई ,किसी का लड़का ,किसी का पिता , मर रहा है।यह सब हड़ताल के कारण मरते जा रहे हैं लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं। चाहे  केंद्र सरकारों हो या  प्रदेश  की ममता सरकार ।

राजनीतिक रोटियां सेकने के  कारण दोनों मजबूर हैं । इसी मजबूरी के कारण चुनाव में इन्हें  जनता सबक भी सिखा सकती है।

यदि केंद्र सरकार इस समय नहीं जागी तो निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की स्थिति और बदतर होती चली जाएगी । ममता बनर्जी जब तक विधानसभा के चुनाव नहीं हो जाते इसी प्रकार के कार्यों को संपादित करती हुई देखी जाएंगी। जनता मरे तो मरे मुझे तो पुनः काबीज होना है।

वही भाजपा की भी नीति कमोबेश वही दिखाई पड़ती है जिस प्रदेश से 18 सांसद हो ,प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो जाये तो प्रश्न उठना लाजमी है कि केंद्र सरकार अभी तक कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठाए। बहुत ऐसे अवसर हुए हैं जब 356 के तहत प्रदेश सरकार को भंग कर दिया गया था। राम मंदिर के समय हो या अन्य किसी घटना  में ।356 का प्रयोग कर  रााज्य सरकारों को भंग कर दिया गया था लेकिन मौजूदा मोदी सरकार यह करने से इसलिए डर रही है ।  उसे आने वाले दिनों में विधानसभा का चुनाव दिखाई दे रहा है यह  डर है कि विधानसभा भंग की जाए इसकी सिम्पैथी ममता बनर्जी को मिल जाएगी।

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