कोरोना के कहर से नही बेरोजगारी से लॉक डाउन में पलायन को मजबूर गरीब

सम्पादकीय
सच की दस्तक डेस्क
ब्रजेश कुमार

विश्व भर में कोरोना के कहर से लोग हजारो की संख्या में मर रहे है। वही चीन द्वारा उत्पन्न किये गए जैविक हथियार से माँभारती के पुत्रों को अमीर और गरीब में सरकारों द्वारा बाँट दिया गया है। जहां भारत मे covid19 कोरोना virus से भारत मे सरकारी आंकड़े के अनुसार 24 लोगो की जाने अभी तक गई है वही शुक्रवार की अर्धरात्रि तक लगभग 918 लोग positve रूप से संक्रमित हो चुके है जबकि 70 से ज्यादा इस रोग से छुटकारा भी पा चुके है।
       देश मे लॉक डाउन के चार दिन समाप्त हो गए है।केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा तमाम घोषणायें भी इन दिनों की गयी है ।इन सबके बावजूद आंकड़ो के अनुसार प्रतिदिन लगभग 100 की संख्या में लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होते जा रहे है। इन पर लगाम कब होगा ये तो भगवान ही बता सकता है क्योंकि ये रोग ला ईलाज है।
लेकिन जहां तक मैं अनुभव कर रहा हूँ कि कोरोना वायरस जो चीन का उतपन्न किया गया जैविक हथियार स्वरूप कोविड 19 कोरोना virus है ।पहले से चीन की सोच रही कि विश्व मे वो महाशक्ति के रूप में उभरे इसलिए चीन की चाहत थी कि अमरीका,सहित पूरे विश्व के विकसित राष्ट्रों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाया जाए।

इसके लिए दो वर्षों के निरंतर प्रयास के तहत कोविड 19 वायरस उसने उतपन्न किया।इसके खुलासे लेकिन अब विभिन्न स्कॉलरों द्वारा हो रहे है।यही नही बल्कि चीन ने एक गुप्त एजेंडा और रखा था कि विश्व गुरु के रूप में उभर रहे भारत को भी आर्थिक रूप से नुकसान पहुचाया जाए लेकिन शायद उसे पता नही की जब भी भारत किसी मुश्किल के दौर से गुजरा है। माँभारती का एक एक लाल एकजुट होकर देश को मुश्किलों से निकाला है।लेकिन जो दिख रहा है उससे प्रतीत होता है कि इस बार शायद हम चीन द्वारा रचे गए जाल में फसते जा रहे है। बावजूद उसके कुछ भी ही इस बार भी जीत हमारी ही होगी माँभारती के लाल है जीतेंगे ही ।
आज मै सोचने पर मजबूर हो गया हूं कि कोरोना वायरस ने क्या कर डाला हमारे देश मे । ये वायरस अपने देश को गरीबो अमीरों में बाँट दिया। मैं ऐसे ही नही कह रहा हूं बल्कि इसके पुख्ता सबूत भी देने जा रहा हूँ।
कोरोना वायरस का कहर हुआ तो हम विदेशो से ईरान से अमेरिका से,इटली ,फ्रांस,स्पेन,सिंगापुर,कनाडा,रसिया जैसे देशों से अपने लोगो को इस रोग से बचाने के लिए प्लेन से कई खेपों में ले आये।

इस कार्य के लिए मोदी सरकार की  जितनी भी तारीफ की जाए कम ही है।लेकिन ये भी सत्य है कि इन्ही के लाने में इटली के रास्ते चीनी जैविक हथियार स्वरूप वायरस अपने देश मे आया। उन्ही के द्वारा लाये गए संक्रमण से संक्रमित लोगो की संख्या से लगातार इजाफा हो रहा है।यहां कहने का तात्पर्य यह है कि विदेशों से आये लोगो ने ही देश मे इसे लाया । आज कोरोना वायरस से ज 918 से ज्यादा लोगो आज की तारीख में संक्रमित हो चुके है। 24 लोग जान भी गवां चुके है।

बढ़ते हुए प्रसार को देखते हुए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने कड़ा स्टेप लेते हुए पूरे देश मे आज से 5 दिन पहले ही पूरे देश मे लॉक डाउन कर दिया था। इसके पीछे सरकार ने क्या प्लानिंग की थी ये सरकार ही अच्छे से बता सकती है । लेकिन इस घोषणा से जाने अनजाने में सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को उठाना पर रहा है। फैक्ट्रियां बन्द होने मजदुर बेरोजगार हो गए। है।भूखे मरने को मजबूर हो गए है।इस लॉक डाउन घोषणा के बाद मकान मालिकों ने भी उनपर चाबुक चलाया जिसे किसी ने बताया किसी ने नही बताया। निश्चित तौर पर इससे गरीबो के मन मे डर व्याप्त हो गया कि अब उनका क्या होगा। बच्चे की परवरिश कैसे हो पाएगी।

उधर केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि लॉक डाउन से मजदूर घबराए नही उनके खाने की व्यवस्था हो रही है। राज्य सरकारों ने भी तमाम घोषणा की। किसी ने कहा कि 4 लाख लोगों की भोजन की व्यवस्था की गई तो किसी मुख्यमंत्री ने कहा कि रहने खाने दोनो की व्यवस्था की गई है। केन्द्र व राज्य सरकारों ने तमाम घोषणा लोग की हितों के ध्यान में रखकर किया।लेकिन किसी ने प्रधानमंत्री जी को ये नही समझाया कि इसका फायदा किसे मिलेगा।
बिहार ,यूपी, बंगाल सहित कई राज्यों से लोग दिल्ली आते है काम करने के लिए।कुछ रिक्सा चलाते कुछ मजदूरी करते है, कुछ फैक्टट्रियों  में काम करते है।इन सभी मजदूरों का कोई भी खाताबही नही होता है।मजदूरी की तो पैसा मिला है नही की तो नही मिला ।राशन कार्ड इनके नही होते है न ही श्रम मंत्रालय में इन मजदूरों के आंकड़े ही मौजूद होते है।

अब आप समझ ही सकते है कि यदि आंकड़े ही नही है तो वित्तमंत्री की घोषणा का क्या जो इन्हें मिलने वाला ही नही है।सच पुछिये तो जरूरत सरकार की घोषणा स्वरूप मदत इन्ही को थी यदि रोजगार होता तो नही होता पलायन। सब करते लॉक डाउन का पालन। इन पर रोजी छीन जाने से रोटी का संकट खड़ा हो गया। इन्हें सारे आश्वाशन कोरे कागज की तरह लगने लगे।डर हो गया कि अब क्या होगा।

अन्तः उन्होंने सोचा होगा कि कोरोना से तो बाद में मरेंगे उसके पहले अपने परिवार के साथ भूख से मर जाएंगे।ऐसे लॉक डाउन जाए जहनुम में, हम लोगो को घर चलना चाहिए और 1000 /2000 किलोमीटर दूर अपने घर की तरफ निकल पड़े।इनकी संख्या लाखो में है।अब जब वो सड़क पर हैं तब लॉक डाउन इनकी भीड़ के आगे खत्म होती दिख रही है।सोसल डिस्टेंस की थेओरी समाप्त हुई।

अब सवाल उठना लाजमी है न कि ये पूर्ण रूप से बेरोजगार है पैसे पैसे के लिए मोहताज है।सभी योजनाएं इन पर लागू नही होती है।केवल पुलिस का चाबुक और इन गरीबो की पीठ ही सही है।क्योंकि ये अत्यंत गरीब है।अब सवाल उठना ये लाजमी है की अमीरो के लिए विदेशो से लाने की व्यवस्था प्लेन से की गई।उन्हें कोई रोग न हो इसकी भी चिन्ता की गई।एयरपोर्ट पर ही थर्मल स्कैनिंग की गई।इलाज भी किया गया।इन अमीर लोगो ने ही प्लेन से रोग को इटली के रास्ते भारत लाये जबकि गरीबो को घर पहुचाने की बात समस्या के रूप में आई तो केंद्र सरकार ने राज्यों के भरोसे चिट्टी चिट्टी खेलते हुए अपने को किनारे कर लिया। फिलहाल तो ये ही दिख रहा है।वही राज्य सरकारे एक दूसरे पर इनकी जिम्मेदारी थोपते दिख रहे है।

इसमें गरीब एक तो अपनी गरीबी से तो दूसरा कोरोना से संघर्ष कर रहा है ।निश्चित तौर पर ये सवाल केंद्र सरकार पर उठ रहा है कि इसे करना ही था तो फैक्ट्री मालिकों से मकान मालिकों से ठेकेदारों से बात कर लेते। 3 महीनों के पेमंट दिलवा देते। शायद इनकी कोई प्लानिंग नही हुई भगवान भरोसे छोड़ दिया गया क्योंकि वो गरीब थे।अब यह सोच तो बनेगी न कि कोरोना ने भारत के लोगों को गरीबों और अमीरो में बाँट ही दिया है।

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