विधि विधान के अनुसार भगवान चित्रगुप्त पूजे गए

चंदौली से मनोज उपाध्याय की रिपोर्ट

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की चंदौली इकाई के तत्वाधान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास स्थित बाकले प्रमोदशाला में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा को स्थापित कर विधि विधान के अनुसार कलम दवात की पूजा की गई।

जानकारी के अनुसार भगवान चित्रगुप्त की पूजा कायस्थों द्वारा की गई ।इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया ।जिस के मुख्य अतिथि मंडल रेल प्रबंधक पंकज सक्सैना रहे। मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए श्री पंकज सक्सेना ने स्वजातीय बंधुओं को एकता का पाठ पढ़ाया और एक सूत्र में बंध कर कार्य करने को कहा। उन्होंने स्वयं इसकी बीड़ा उठाते हुए कहा कि जो स्वजाति बन्धु है उनके बच्चे यदि आगे बढ़ना चाहते है तो वे स्वयं 2 दिन देने के लिए तैयार हैं। इस अवसर पर नगर के प्रमुख चिकित्सक आर बी शरण ने भी स्वजाति बंधुओं को आगे आकर कार्य करने को कहा ।चिकित्सीय विधि के द्वारा उन्होंने  भी स्वजाति लोगों को मदद देने के लिए कहा। कार्यक्रम में शिरकत कर रहे अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त के माध्यम से हम लोग एकता के सूत्र में बंधे । निरंतर अपने साथियों के लिए कार्य करते रहें ।जब हम एक होंगे तभी हमें सभी लोग पूछेंगे। कार्यक्रम कायस्थ परिवार की होनहार बच्चों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव कायस्थ महासभा ,प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव, प्रदेश महासचिव सुनील श्रीवास्तव, प्रदेश युवा अध्यक्ष अखिलेश  श्रीवास्तव  उर्फ रिंकू उपस्थित थे ।कार्यक्रम का संयोजन जिलाअध्यक्ष डॉ आनंद श्रीवास्तव ने किया।

जानकारी हो कि भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मदेव की संतान हैं। ये ज्ञान के देवता हैं। यमलोक के राजा यमराज को कर्मों के आधार पर जीव को दंड या मुक्ति देने में कोई समस्या न हो, इसलिए चित्रगुप्त भगवान हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा लिखकर, यमदेव के कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं। चित्रगुप्तजी का जन्म ब्रह्मदेव के अंश से न होकर संपूर्ण काया से हुआ था इसलिए चित्रगुप्त जी को कायस्थ कहा गया। इसी उपनाम के आधार पर इनका गोत्र चला और समाज में कायस्थ वर्ग की भागीदारी शुरू हुई। चित्रगुप्तजी की दो पत्नियां थी। जिनमें एक ब्राह्मण थीं और दूसरी क्षत्रिय। इसी कारण कायस्थों में ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों की खूबियां पाई जाती हैं।

कायस्थ आज के दिन भगवान चित्रगुप्त के साथ ही कलम और बहीखाते की भी पूजा करते हैं। क्योंकि ये दोनों ही भगवान चित्रगुप्त को प्रिय हैं।

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