केंद्र सरकार अश्लील सामग्री पर रोक पर इंटरनेट कंपनियों से करेगी बात

केंद्र सरकार इंटरनेट पर अश्लील बाल सामग्री, जिसमें तस्वीरें और वीडियो शामिल है, के प्रसारण को रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों और दूसरे पक्षकारों के साथ बैठक करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी।

प्रधान न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर चार हफ्ते बाद सुनवाई करने का फैसला किया। इस दौरान केंद्र सरकार इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों गूगल, माइक्रोसॉफ्ट व फेसबुक और अन्य पक्षकारों के साथ बैठकें कर इंटरनेट पर अश्लील बाल सामग्री, दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म जैसी सामग्रियों के प्रसारण को रोकने के उपाय तलाश करेगी।

अदालत 2015 में हैदराबाद स्थित एनजीओ प्रज्वला द्वारा भेजे गए पत्र में उठाए गए मामले पर सुनवाई कर रही थी। एनजीओ ने पत्र के साथ पेन ड्राइव में बच्चों के साथ दुष्कर्म के दो वीडियो भी भेजे थे। दरअसल कई जगहों पर अभी भी बच्चों के साथ दुष्कर्म आदि किया जाता है। कंपनियां इसका वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट बाजार में बेचती है। सरकार इस तरह की हर चीज को पूरी तरह से बंद करना चाहती है। यदि इंटरनेट कंपनियों का ऐसे लोगों को सपोर्ट नहीं मिलेगा तो वो ऐसी चीजों को इंटरनेट पर नहीं डाल पाएंगे। 

इस मामले में एक पक्षकार की तरफ से उपस्थित वकील अपर्णा भट ने अदालत को बताया कि सरकार तब एक पोर्टल लेकर आई थी लेकिन सितंबर के बाद से सरकार ने पक्षकारों और इंटरनेट मुहैया कराने वाली कंपनियों के साथ कोई बैठक नहीं की है। सरकार ने यह पोर्टल इंटरनेट पर अश्लील बाल सामग्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए शुरू किया था।

इस मामले में न्याय मित्र वकील एनएस नप्पिनई ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के बाद से उठाए गए कदमों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपी। शीर्ष अदालत ने अक्टूबर, 2018 में दिए अपने फैसले में इस मामले से निपटने के लिए कुछ प्रस्ताव और दिशा-निर्देश दिए थे। न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि इंटरनेट पर प्रसारित किसी अश्लील के खिलाफ शिकायत की जाती है तो वहां से वह सामग्री हटा ली जाती है लेकिन वही सामग्री दूसरी जगहों पर पड़ी रहती है। 

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