Chandrayaan-2 की सफल लॉंचिग भारत ने रचा इतिहास –

  • कुछ देर में होगी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, चांद के साउथ पोल पर उतरेगा भारतीय रोवर ‘प्रज्ञान’
  • इसरो चंद्रयान-2 के जरिए चांद की सतह की जानकारी एकत्र करेगा
  • मिशन मून से भारत चांद पर मौजूद बड़े ‘खजाने’ को भी कर सकता है हासिल
  • चंद्रयान-2 के चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग होते ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा

 

अंतरिक्ष की दुनिया में हिंदुस्तान ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO ने सोमवार दोपहर 2.43 मिनट पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-2 को लॉन्च किया। चांद के दक्षिणी भाग में कदम रखने वाला  विश्व का पहला पूरी तरह स्वदेशी तकनीकि से बनाया गया पहला देश बन गया है। यह चांद पर कदम रखने वाला ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मिशन है। इसमें एक हजार करोड़ का बजट लगा। 

 

salute ISRO

 

 

 Chandrayaan-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा। 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।

फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।

Chandrayaan-2 भारत के लिए दूसरा सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन है। इसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारी-भरकम रॉकेट जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (GSLV Mk-III) से लॉन्च किया जा रहा है और इसका मकसद भारत को चंद्रमा की सतह पर उतरने और उस पर चलने वाले देशों में शामिल करना है। आज से ठीक 31 साल पहले इसी तारीख को हुई लॉन्चिंग पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई थी। इसरो चीफ डॉ. के  सिवन ने कुछ महीने पहले बोला था कि अब इसरो हर साल 10 से 12 लॉन्चिंग करेगा। यानी हर महीने एक लॉन्चिंग होगी। लॉन्चिंग की सफलता और असफलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें मौसम, तकनीकी वजहें आदि शामिल हैं।

भारत ने नहीं ली किसी की मदद-

इस मिशन पर आज भले ही भारत अकेला निकला हो लेकिन कुछ वर्ष पहले इस महत्‍वाकांक्षी मिशन के लिए भारत और रूस की स्‍पेस एजेंसी ROSCOSMOS के बीच समझौता हुआ था। यह समझौता 2007 में हुआ था जिसके मुताबिक 2013 में यह मिशन भेजना था। समझौते के तहत रूस को इस मिशन के अहम हिस्‍से पेलोड लैंडर (Payload Lander) को बनाना था, जबकि भारत को इस मिशन के लिए रोवर और ओर्बिटर तैयार करना था। लेकिन, रूस की तरफ से जो लैंडर भेजा गया वह इसरो की जरूरत के मुताबिक नहीं था।

इतना ही नहीं इसके बाद भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने खुद अपने दम पर इस मिशन को पूरा करने का फैसला लिया था। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के इस महत्‍वाकांक्षी मिशन में नासा और यूरोपीयन स्‍पेस एजेंसी (Nasa and European Space Agency) भी सहयोग करने के लिए इच्‍छुक थी, लेकिन इसरो ने एकला चलो की नीति अपनाते हुए इसको अकेले ही पूरा करने की ठानी और 22 जुलाई 2019 को पूरा कर भी दिखाया।

इसरो और इस मिशन की बात करे तो आपको यहां पर ये भी बता दें कि चीन, अमेरिका और रूस ने जिस कीमत पर अपने मून मिशन को पूरा किया है उसकी तुलना में भारत ने यह बेहद कम में पूरा कर दिखाया है। इस सफलता के बाद भारत इन तीन प्रमुख देशों के उस ग्रुप से जुड़ गया है जिसने चांद (384,600 किमी या 239,000 मील) पर सफलतापूर्वक मिशन भेजा है।

पीएम मोदी ने मिशन सफल होने के लिए ISRO वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि मैंने ISRO के वैज्ञानिकों से बात करके उन्हें बधाई दी है।

लोग सोशल मीडिया पर कलाम साहब को याद कर रहे हैं। बता दें कि कलाम साहब ने ही 2009 में चंद्रयान की नींव रखी थी। उन्होंने ही ISRO के वैज्ञानिकों को  चंद्रयान -2 मिशन पर काम शुरू करने के लिए कहा था।  

वहीं,चंद्रयान- 2 के सफल प्रक्षेपण पर नितिन गडकरी ने इसरो की टीम को दी बधाई दी है।

वहीं भारत के इस मिशन को लेकर इजरायल ने भी शुभकामनाएं दी हैं। इजरायल ने ट्वीट करके कहा है कि भारत को चंद्रयान-2 मिशन के लिए बधाई। हम भी आपके पीछे – पीछे हैं।

साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बना – 

मिशन मून के तहत चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा। दरअसल, चांद को फतह कर चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है। चंद्रमा के इस भाग के बारे में अभी बहुत जानकारी भी सामने नहीं आ पाई है। भारत के चंद्रयान-1 मिशन के दौरान साउथ पोल में बर्फ के बारे में पता चला था। तभी से चांद के इस हिस्से के प्रति दुनिया के देशों की रूचि जगी है। भारत इस बार के मिशन में साउथ पोल के नजदीक ही अपना यान लैंड करेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत मिशन मून के जरिए दूसरे देशों पर बढ़त हासिल कर लेगा। कहा जा रहा है कि चंद्रयान-2 के जरिए भारत एक ऐसे अनमोल खजाने की खोज कर सकता है जिससे न केवल अगले करीब 500 साल तक इंसानी ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकती हैं बल्कि खरबों डॉलर की कमाई भी हो सकती है। चांद से मिलने वाली यह ऊर्जा न केवल सुरक्षित होगी बल्कि तेल, कोयले और परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण से मुक्त होगी।

प्रज्ञान रोवर (Pragyan rover)-

 

प्रज्ञान रोवर (Pragyan rover) भारत द्वारा विकसित किया गया एक अंतरिक्ष रोवर हैं। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन बनाया गया है। इसे चन्द्रयान 2 के साथ 22 जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया ।

 

 

चांद का साउथ पोल काफी रोचक है। चंद्रमा का साउथ पोल विशेष रूप से दिलचस्प है क्योंकि इसकी सतह का बड़ा हिस्सा नॉर्थ पोल की तुलना में अधिक छाया में रहता है। संभावना इस बात की भी जताई जाती है कि इस हिस्से में पानी भी हो सकता है। चांद के साउथ पोल में ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है। चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का उपयोग करेगा जो दो गड्ढों- मंजिनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का प्रयास करेगा।

मिशन चंद्रयान-2 में भारत के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं। भारत पहली बार चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चांद पर लैंडिंग करते ही भारत ऐसा करने वाले अमेरिका, रूस और चीन के साथ चौथा देश हो जाएगा। भारत पहले 15 जुलाई को चन्द्र यान-2 की सशक्त लॉंचिग  करने वाला था, लेकिन क्रॉयोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण इसे आज तक के लिए रोक दिया गया था। इसरो चीफ के सिवन ने भी कहा है कि लैंडिंग से 15 मिनट पहले का वक्त काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि ये 15 मिनट काफी तनावपूर्ण होंगे क्योंकि इसरो पहली बार चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

प्रक्षेपण देखने वालों में गजब की उत्सुकता और जोश हाई दिखा – 

 

वंदेमातरम् 🇮🇳

भारतमामाताकीजय🇮🇳

Great ISRO team ko सच की दस्तक टीम की तरफ़ से बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं। 

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