ईसा मसीह की 114 फुट ऊंची प्रतिमा के लिए धन देने को लेकर कांग्रेस नेता शिवकुमार भाजपा के निशाने पर

बेंगलुरु। कर्नाटक में अपने निर्वाचन क्षेत्र में 114 फुट ऊंची प्रतिमा के निर्माण के लिए धन देने को लेकर कांग्रेस नेता डी शिवकुमार भाजपा के निशाने पर आ गये हैं और उसने उन पर कांग्रेस आलाकमान की नजर में बने रहने के लिए ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

हरोबेले के ईसाई बहुल गांव कपालीबेट्टा में 13 फुट ऊंची पीठिका पर 101 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव है। शिवकुमार के कार्यालय ने बताया कि उन्होंने अपने फंड से कपालीबेट्टा में न्यास के लिए सरकार से 10 एकड़ जमीन ली थी।

यह न्यास ही इस प्रतिमा का निर्माण करवा रहा है।  शिवकुमार के कार्यालय का दावा है कि यह दुनिया में ईसामसीह की सबसे बड़ी एकाश्म प्रतिमा होगी। उन्होंने 25 दिसंबर को एक प्रार्थना सभा में इसकी आधारशिला रखी थी और परियोजना के लिए विलेख पत्र सौंपा था।

शिवकुमार पर करारा प्रहार करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री के एस ईश्वरप्पा ने कहा कि भारत में जन्मे भगवान राम के मंदिर के निर्माण के विरोधी कांग्रेस के नेता ईसा मसीह की प्रतिमा के निर्माण के लिए धन देने को तैयार हैं। ईश्वरप्पा ने ट्वीट किया, ‘‘ अपने नेता पर प्रभाव बनाने के लिए, कांग्रेस के नेता, जो भारत में जन्मे भगवान राम के लिए भव्य मंदिर के निर्माण के विरूद्ध हैं, अपने पैसे से ईसा मसीह की प्रतिमा बनाने जा रहे हैं, जो वैटिकन में पैदा हुए थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अब तो सिद्धरमैया भी उन्हें कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष बनने से नहीं रोक सकते।’’ दिनेश गुंडू राव के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से हट जाने के बाद शिवकुमार इस पद के लिए सबसे आगे चलने वालों में एक बताये जाते हैं। राव कर्नाटक उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद इस पद से हट गये थे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंतकुमार हेगड़े ने भी ट्वीट किया, ‘‘ यहां तिहाड़ से लौटे महान व्यक्ति हैं जो पद के लिए विशाल ईसा मसीह प्रतिमा लगाकर इतालवी महिला को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी सुशीलता दिखा रहे हैं।’’

अन्य भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने भी शिवकुमार पर निशाना साधा।  इन आलोचनाओं पर शिवकुमार ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में सैंकड़ों मंदिर बनाये गये हैं और वह कोई प्रचार पाने के लिए ऐसा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने दो साल पहले उनसे वादा किया था और कहा था कि वे सरकारी जमीन पर कुछ न करें। क्रिसमस के दिन मैंने उन्हें विलेख पत्र सौंप दिया।’’

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