सिद्धांत को सवाल मत करो, पद्धति को सवाल करें

 

[क्रिकेट में तीन ही स्टम्प क्यों? पूछा कभी?फिर भगवान पर सवाल क्यों करते हो?] 
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_ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना 
न्यूज ऐडीटर सच की दस्तक
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पूरी दुनिया धोखा दे सकती है पर भगवान हमेशा साथ निभाते हैं। ईश्वर ही सत्य है। ईश्वर पर अपना विश्वास मजबूत रखना क्योंकि भगवान से मजबूत और कुछ भी नहीं। सब पढ़े लिखे लोग चर्चा करते हैं कि ग्रेविटी पृथ्वी का मूल है?नहीं, यह मूल तो नहीं पर एक दिव्य रहस्यमयी शक्ति जरूर है।मूल तक पहुंचने में अभी विज्ञान को बहुत समय लगेगा। आज तक हम ब्लैक होल थ्योरी पर ही अटके हुए हैं। तो पृथ्वी का मूल बहुत बाद की चीज। हम गंगा जल में H2O ही जान सकें पर दो तत्व और हैं जिसे विज्ञान नहीं तय कर सकी। हम स्वंय को जान नहीं पाये और परमसत्ता को सवाल करते हैं। हम स्वाद को परिभाषित नहीं कर सकते तो प्रकृति को कैसे परिभाषित कर सकते हैं। कुछ चीजें महसूस होती हैं जरूरी नहीं कि हमारे सामने प्राकट्य हो। केवल महसूस। आप रात एक सूची बना लो कि ये दस काम सुबह पूरे दिन में निपटा दूंगा। कर के देखना कि वह दस कार्य में आप सिर्फ़ 4-5 ही पूर्ण कर पायेगें। पता है क्यों? क्योंकि समय पर प्राकृतिक सूचनाओं का हम पर पूरा असर होता है। समय अपने हिसाब से हम सब को नियंत्रित कर रहा है। यह अनंत गूढ़ रहस्य हैं। पृथ्वी अपनी एक तय दूरी पर अपनी अपनी धुरी के चारों ओर एक लाख किलोमीटर की रफ़्तार से घूम रही है। कल पृथ्वी की गति थोड़ी कम हो जाये, सूरज न उगे, गुरूत्वाकर्षण गड़बड़ा जाये तो?क्या विश्व के सभी वैज्ञानिक मिलकर सूरज उगा सकते हैं? प्राकृतिक आपदाएं टाल सकते हैं?भूकम्प रोक सकते हैं? कोई नहीं जानता कि यह फोर्स आती कहां से है? हम सिर्फ़ ‘ग्रेविटी’ नाम जानते हैं पर यह क्या शक्ति है इसे कोई नहीं जानता? जब मैं आपका हाथ या कान, नाक, बाल खीचूं तो आप एक खिचांव महसूस करोगे..इसमें उर्जा लग रही है ना..। आप ध्यान से देखो कि पूरी पृथ्वी पर यह खिंचाव किसी को भी क्या..कम या ज्यादा दिखाई पडता है? कितने ऐयरोप्लैन रोज उड़ते हैं और कहीं नहीं उड़ते तो क्या गुरूत्वाकर्षण कहीं कम या ज्यादा दिखाई पड़ा? इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जानता? सोचो! पृथ्वी सभी चीजों को अपने तरफ खुद से खींच रही है। क्या यहां कुछ ऊर्जा का उपयोग हो रहा है? अगर हां तो यह कैसे काम कर रहा है? आखिर! कैसे होता है?यह फोर्स किस दिशा से आता है? इसको यह सब करने में कितना समय लगता है कोई नहीं जानता। हम सिर्फ नाम जानते हैं कि यह गुरूत्वाकर्षण है बस। सोचो! दिन में हम सभी एनर्जी का प्रयोग करते हैं और रात के समय जब हम सोने जाते हैं तो क्या उस समय यह प्रभावित करता है? कोई नहीं जानता कि यह कहां से आता है और कैसे काम करता है। विज्ञान प्रकृति के सामने आज भी मौन खड़ी है और प्रतिपल खोज रही है पर प्रकृति अनंत गूढ़ रहस्यों का समूह है। हम लोग सर्वशक्तिमान पर सवाल करते हैं कि हे! भगवान तू है क्या? पर वह है यही सत्य है वही सत्य है। बस हम लोग प्रकृति के सामने झूले में पड़े बच्चे के समान है जो रो सकता है,हंस सकता है,नीचे लुढ़क सकता है पर जो दूध वह पी रहा है। वह कैसे प्रकृति में उपलब्ध है, कैसे मानव व जानवरों के अंदर बन रहा। यह जटिल प्रक्रिया वह नहीं समझ सकता क्योंकि वह शिशु है। बस हम सब इस महान विराट प्रकृति के शिशु समान है। हम सब गॉड के बारे में इतने सवाल करते हैं पर कभी किसी ने आज तक यह पूछा कि क्रिकेट में यह तीन ही स्टम्प क्यों लगाये जाते हैं? क्यों होते हैं ?किसने इसकी अथारिटी दी? किस कम्पनी ने यह सब तय किया? स्टम्प किसने कब लगाये?स्टम्प का क्या इतिहास है? 22 यार्ड की पिच का इतिहास बतायें? यह इतने बड़े ग्राऊंड की वाऊंड्री लाईन का इतिहास बतायें तब मेरे में फुल कांफीडेंस आयेगा, विश्वास जागेगा तब ही में क्रिकेट खेलूंगा। ऐसा कभी कहा? आईस क्रीम वाले से पूछते हो कि किस जानवर के दूध से इसे बनाया गया है? आपके सारे लॉजिक भगवान की इस विराट सत्ता पर ही क्यों? इसीलिए तो आप हम इंसान हैं और वह परमसत्ता भगवान हैं जो सभी को सबकुछ मुफ्त दिये जा रहे हैं और कुछ कहते भी नहीं…..! अस्पताल में आक्सीजन का रेट पता करना पड़े या किसी का दोबारा कोहनी व घुटना, आंखें, दांत, किडनी ट्रांसप्लांट हुए हों।तब पता चलता है सब कितना मंहगा है। साईंटीफिक प्रूव हुआ है कि जब हम सांसटांग प्रणाम करते हैं तो हमारी हड्डियां मजबूत रहती है… ओस्ट्योपोरोसिस बीमारी नहीं होती। गूगल पर हजारों शोध पत्र होगें वहां पढ़ लीजिए। विज्ञान अगर चाहे तो इंसान का हूबहू मुर्दा जिस्म बनाने में कुल खर्चा  थ्री ट्रिलियन डॉलर आयेग।सोचो! हमारा शरीर कितना कीमती है? क्योंकि इसमें आत्मा है, रूह है, हम जिन्दा हैं। सिर्फ़ भगवान का धन्यवाद करो। और कृपया सिद्धांत fundamental को सवाल नहीं करना। हाँ आप पद्धति को सवाल कर सकते हैं। यह श्री राधेकृष्ण। आपका दिन शुभ हो। ईश्वर पर भरोसा दृण हो। कोई हमारा आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है और अगर आप सही हैं सत्यनिष्ठ हैं तो किसी से मत डरो। सत्य स्वंय रक्षक है। हे! सर्वशक्तिमान परमात्मा सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करो और पाप का अंत करो, प्रेम का विस्तार करो। 
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