सहजन की सब्जी  : स्वास्थ्य के लिए वरदान 

_सच की दस्तक न्यूज नेटवर्क 
सहजन आपकी रोजमर्रा की सब्जी में भले ही जगह न बना पाये पर आपको जानकर हैरानी होगी कि सहजन यानी ड्रमस्टिक का इस्तेमाल सांबर में सबसे ज्यादा किया जाता है और सन् 2008 में इसे ‘प्लांट ऑफ दी ईयर’ भी कहा गया था। कुछ जगहों पर इसे मुगना, , सुजना या सेंजन भी कहा जाता है।
 सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना इस तरह की जा सकती है कि यह  -विटामिन सी- संतरे से सात गुना।-विटामिन ए- गाजर से चार गुना।-कैलशियम- दूध से चार गुना।-पोटेशियम- केले से तीन गुना।-प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना।
सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके अलग-अलग हिस्सों में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण हैं। इसमें 92 तरह के मल्टीविटामिन्स, 46 तरह के एंटी आक्सीडेंट गुण, 36 तरह के दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हैं।
चारे के रूप में इसकी पत्तियों के प्रयोग से पशुओं के दूध में डेढ़ गुना और वजन में एक तिहाई से अधिक की वृद्धि की रिपोर्ट है। यही नहीं इसकी पत्तियों के रस को पानी के घोल में मिलाकर फसल पर छिड़कने से उपज में सवाया से अधिक की वृद्धि होती है। इतने गुणों के नाते सहजन चमत्कार से कम नहीं है। गोरखपुर में राष्ट्रीय बागवानी शोध एवं विकास संस्थान के उपनिदेशक रजनीश मिश्र ने बताया कि करीब पांच हजार वर्ष पूर्व आयुर्वेद ने सहजन की जिन खूबियों को पहचाना था, आज के वैज्ञानिक युग में वे साबित हो चुकी हैं।
सहजन को अंग्रेजी में ड्रमस्टिक कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है। दक्षिण भारत में व्यंजनों में इसका उपयोग खूब किया जाता है।उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है। सर्दियां जाने के बाद फूलों की सब्जी बना कर खाई जाती है फिर फलियों की सब्जी बनाई जाती है। इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है।
सहजन वृक्ष किसी भी भूमि पर पनप सकता है और कम देख-रेख की मांग करता है। इसके फूल, फली और टहनियों को अनेक उपयोग में लिया जा सकता है। भोजन के रूप में अत्यंत पौष्टिक है और इसमें औषधीय गुण हैं। इसमें पानी को शुद्ध करने के गुण भी मौजूद हैं।
सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से दवाएं तैयार की जाती हैं। सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में है। सहजन में दूध की तुलना में ४ गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।

सहजन की फली सेहत का खज़ाना – 

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1-हमारे शरीर के लिए अच्छी है बल्कि इसका पेड़ पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
2-ये हमारे शरीर के पोषण की कई जरुरतों को पूरा करता है और कई बीमारियों के इलाज में भी कारगर है।
इसके एक नहीं अनेक फायदे हैं जैसे ये कैंसर, डायबिटीज, एनीमिया, गठिया, एलर्जी, अस्थमा, पेट दर्द या पेट की दूसरी परेशानियां, कब्ज, सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, पथरी, थाइरॉयड, किसी अन्य तरह का इंफेक्शन या शरीर के किसी हिस्से में आई सूजन को दूर करने में ये बहुत कारगर है।
3-इसके साथ ही अगर आप बढ़ते वजन से परेशान है, तो अपने आहार में ड्रमस्टिक्स को शामिल करें, मोटापे की परेशानी दूर होगी।
4-इसमें केले से कई गुना ज्यादा पोटेशियम, गाजर से कई गुना ज्यादा विटामिन ए, दूध से ज्यादा कैल्शियम और दही से दोगुना प्रोटीन होता है।
5-विटामिन ए, बी, सी और बी-कॉम्प्लेक्स के साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट, प्रोटीन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
6-दांतों के कीड़े, पथरी की समस्या,  ब्लड प्रेशर, मुंहासे, मोटापा आदि समस्याओं के समाधान के लिए सहजन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ।
7-सहजन के विभिन्न अंगों के रस को
मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है, शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है। 
8-सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है। सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।
9-सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं। सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है।
10- धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग राम वाण साबित हुआ है।
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