UP औरैया, इटावा, जालौन में जिले में बाढ़ का कहर जारी –

राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में हो रही बारिश से गर्मी कम हो गई है। लगातार हो रही बारिश से मौसम तो सुहाना हो गया है लेकिन इससे प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। बारिश से प्रदेश में आठ लोगों की मौत भी हो गई हैं। इस बीच योगी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है।

सभी मुख्यालयों पर चौबीस घंटे कंट्रोल रूम खोलने के साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों को युद्ध स्तर पर सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। आपदा में हताहत लोगों को 12 घंटे में मुआवजा और राहत कैंप पूरी तरह से स्वच्छ रखने का आदेश भी दिया गया है।

युमना नदी का पानी रोड पर चलने से औरैया से जालौन मार्ग बंद – 

औरैया यमुना नदी ने अपना लिया रौद्ररूप। यमुना के जलस्तर में हो रही लगातार बढोतरी। यमुना नदी खतरे के निशान से पार हालात को देखते हुए औरैया और जालौन शासन प्रशासन आया हरकत में। हाईअलर्ट किया जारी। दोनों जिलों के प्रशाशन ने सेरगढ़ यमुना पुल पर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह से किया बंद।

वहीं सरकारी स्कूल भी पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और बाढ़ पीड़ितों को शासन प्रशासन की तरफ़ से हर तरह की मदद पहुंचायी जा रही है।

-बाढ़ पर योगी सरकार ने जारी किया फरमान
– हर जिला मुख्यालय पर खोले जाएंगे 24×7 कंट्रोल रूम

इटावा में चंबल पिछले सभी रिकार्ड तोड़कर बुधवार सुबह 128.53 मीटर के स्तर पर आ गई। नदी का पानी 50 गांवों में भर गया है। हमीरपुर में यमुना व बेतवा तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं। जालौन-औरैया मार्ग बंद हो गया है। यहां बाढ़ में डूबी फसल देखकर 90 वर्षीय किसान की सदमे से मौत हो गई। बांदा में केन व यमुना का जलस्तर करीब डेढ़-डेढ़ मीटर और बढ़ गया। हालांकि खतरे के निशान से काफी नीचे है। यमुना खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। चित्रकूट में यमुना की बाढ़ में 50 गांव घिर गए हैं। कानपुर देहात में दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। औरैया के 12 गांवों में एनडीआरएफ के जवान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हैं।

युद्ध स्तर पर राहत कार्य का निर्देश

राहत आयुकत जीएस प्रियदर्शी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ की निगरानी और राहत कार्यों के लिए जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए जो 24 घंटे काम करे। बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने की कार्यवाही युद्ध स्तर पर की जाए। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ जल, दवाइयों, शौचालय आदि की समुचित व्यवस्था की जाए। आपदा से हताहत होने वाले लोगों या उनके आश्रितों को अधिकतम 12 घंटे के अंदर मुआवजे का भुगतान किया जाए। 

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