खुद को फोन मिलायें, पॉवरफुल कहलायें

 

खुद को फोन मिलायें, पावरफुल कहलायें
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[क्या कभी आपने सोचा कि आखिर! यह निगेटिविटी करती क्या है?]

__ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना, न्यूज ऐडीटर सच की दस्तक राष्ट्रीय मासिक पत्रिका वाराणसी 

खुद को फोन मिलाने का मतलब है अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज़’ सुनना। जी हाँ,,, कभी – कभी हमारे मन हमें कॉल करता है घण्टी भी बजती है कि चलो! आज समाज में दहेज़ की समस्या के लिए कुछ जबर्दस्त काम किया जाये। चलो! समाज में गाली और नशे की समस्या पर दमदार वर्क किया जाये पर हम लोग अपने बिजी सैड्यूल के चलते अपने अंतर मन की कॉल को डिस्कनेक्ट कर देते हैं और अपनी जिंदगी में इतना उलझे होने के कारण, मन में नफ़रत, ईष्या के भाव के कारण, हर काम की जल्दबाजी के कारण, सिर्फ़ और सिर्फ़ धन कमाने की होड़ के चलते हम हमेशा ही अपने मन के फोन को काटते चले जाते और इसी तरह काटते-काटते होता यह है कि हमारा मन ही बीमार होने लगता है जिसे ‘मनोरोग’ नाम दिया गया है। आप सभी जानते हैं कि तन को स्वस्थ्य रखने के लिए कई विटामिन और मिनरल्स होते हैं तो क्या मन की सेहत को भी सुधारने के लिए कोई विटामिन होते होगे? तो जवाब है, जी हाँ! मन के अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी विटामिन है – विटामिन ए – हमारा Attitude, विटामिन बी- हमारा Behaviour, विटामिन सी- communications skill, विटामिन एस. आर, यानि Self Respect पर हमें इन पर बहुत गहराई से वर्क करना होगा। हमें यही विटामिन लेने जोकि हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करेगें। क्योंकि जब हमारे कार्यों में हमारा Positive – Attitude, Behaviour, Communication, Self Respect यह विटामिन प्रचुर मात्रा में होगें तब हमारे Emotions भी Healthy होगें और जब हमारे Emotions, Healthy होगें तो हमारे Thought भी Positive ही होगें तब हम अंदर से Powerful बनेगें। पॉवरफुल बनने का मतलब यह नहीं कि हम शक्तिमान बन जायेगें। पॉवरफुल बनने का मतलब है कि हम हर उस व्यक्ति का मुस्कुराते हुए सामना कर पाएगें जो हमें कतई पसंद नहीं। जिसे देखते ही मन जलने लगता । यानि पुराने अपमान के जहरीले घूँट पीने का कम्प्लीट धैर्य हम में आ जायेगा। धैर्य सबसे बड़ी ताकत है। क्या कभी आपने सोचा आखिर! यह जलन, ईर्ष्या, ईगो यानि सारी निगेटिविटी हमारे अंदर करती क्या है? तो बता दें कि निगेटिविटी हमारे सेल्फ स्टीम को लो कर देती है यानि हमारे मन को अशांत कर देती है, मन निराशा से भर उठता है कि यह काम मुझसे नहीं होगा। हमें अपनी अंदर की पावर को लो नही होने देना हैं।पर प्रोब्लेम यह है कि हम लोग खुद पर वर्क नहीं करते। खुद की नहीं सुनते। खाना भी इतनी जल्दबाजी में खाते हैं कि टंकी भरना हो जैसे, पानी भी इस तरह गट-गट खड़े – खड़े एक श्वांस में पी जायेगें मानो घड़ा भर रहे हों। जब हम खुद को प्यार और तसल्ली से खाना और पानी नहीं पिला सकते तो फिर दुनिया से क्या उम्मीद करते हैं। तो खुद का फोन मिलायें और पूछे कि हमारा क्या हाल है? हमारे मन के स्वास्थ्य का क्या हाल है? तभी हम खुद से कनेक्ट हो सकेगें। तो खुद को फोन मिलायें और पॉवरफुल कहलायें। बिल्कुल खुद की राह पर चलकर ही हम सच्चा सुकून पा सकेगें । जैसा कि श्री मद्भागवत गीता जी में भगवान श्री कृष्ण जी ने कहा है कि हमें हमारे सारे सवालों के जवाब, अपने मन में ही मिलेगें। पूर्वजों ने भी यही समझाया और आप सब भी यही कहते हैं। मैं ‘हम हिंदुस्तानी यूएसए’ न्यूज पेपर में आपके लेख  पढ़ती रहती हूं कि आप सब बहुत अच्छी बातें लिखते हैं। आप सभी सम्मानित शुभचिंतकों का हृदय से आभार ।

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