सौम्या शंकर बोस की हुंकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस हो कोलकाता पोर्ट का नाम

बदल गया है कोलकाता पोर्ट का नाम जिसपर मचा घमासान –

 

कोलकाता पोर्ट का नाम नेताजी बोस पोर्ट ही होना चाहिए – श्री सौम्या शंकर बोस
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                            फाईल फोटो : श्री सौम्या शंकर बोस 
 
अगर बादलों को गुमां है बिजलियाँ गिराने का तो हमें भी जिद्द है अपना मकाँ वहीं बनाने का..। इन्हीं लाईनों को सच कर दिखाया है पश्चिम बंगाल के चर्चित, कर्मठ और जुझारू व्यक्तित्व ने। 
आइये! साथियों आज आपको रूबरू कराते हैं देश की ऐसी सामाजिक शख्सियत से जिनको ज्यादातर आंसू बखूबी पहचानते हैं और मुस्कुराहटें सलाम करतीं हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कोलकाता पश्चिम बंगाल के चर्चित युवा सामाजिक कार्यकर्ता की जिनका नाम है श्री सौम्या शंकर बोस जी ।जोकि किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, वह विश्वविख्यात प्रतिष्ठित फ्रीडम फाईटर परिवार से सम्बंध  रखते हैं। उनके ग्रेट ग्रैंड फादर श्री राजशेखर बोस जोकि  एक प्रख्यात बंगाली लेखक, केमिस्ट और लेक्सियोग्राफर थे।  वह मुख्यतः अपनी हास्य और व्यंग्यपूर्ण लघु कथाओं के लिए जाने जाते थे, और उन्हें बीसवीं शताब्दी का सबसे बड़ा बंगाली हास्य कवि माना जाता है।  उन्हें 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वह अपने छद्म नाम “परशुराम” से प्रसिद्ध थे। वह आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिये थे और  क्रांतिकारियों को गुप्तरूप से मदद भी करते थे। वे पैसा, बम और रसायन के साथ स्वतंत्रतासेनानियों  की हर सम्भव सहायता प्रदान करने में प्रमुख भूमिका में उपलब्ध रहते थे। और उनके छोटे भाई आचार्य डॉ. गिरिन्द्र शेखर बोस, लोगों के दिलों में राज करते हैं।आचार्य डॉ. गिरींद्र शेखर बोस जोकि 20 वीं सदी के दक्षिण एशियाई मनोवैज्ञानिक थे, जो इंडियन साइकोएनालिटिकल सोसायटी के पहले  फाऊंडर और प्रैसीडेंट (1922-1953) बने।  आचार्य डॉ. गिरींद्र शेखर बोस और प्रोफेसर डॉ. सिगमंड फ्रायड आपस में अच्छे दोस्त होने के बावजूद कभी एक दूसरे से मिल नहीं सके पर फोन और पत्र-व्यवहार से हुई बातचीत द्वारा दोनों ने मिलकर महान शोध भी किये। जिनकी बुक, बोस – फ्रॉयड करेसपोंडेंस विश्वविख्यात हैं। उन्हें प्रो. डॉ. फ्रायड के ओडिपल सिद्धांत की बारीकियों को विवादित करने के लिए जाना जाता है, उन्हें कुछ लोगों द्वारा पश्चिमी पद्धति के गैर-पश्चिमी प्रतियोगिताओं के शुरुआती उदाहरण के रूप में इंगित किया जा चुका है।वह ऐशिया महाद्वीप के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक  थे। वह ‘फादर ऑफ ऐशियन सायक्लॉजी’ के नाम से भी जाने जाते हैं। दोनों ही देश की महानतम शख्सियत रहे हैं। श्री सौम्या शंकर बोस जी ने बताया कि आजादी की क्रांति के समय पराधीन भारत का सबसे पहला झंडा 7 अगस्त 1906 को हमारे घर के आंगन में ही फहराया गया था जिस घर के कोने-कोने में आजादी के गीत गाये गये।जिनको सुनते हुए मैं पला – बढ़ा हुआ हूँ। बता दें कि जिस जगह मेरा यह घर है वो जगह पहले पार्शी बगान स्क्वेर के नाम पर  था जोकि अब पार्शी बगान लेन के नाम से विख्यात है। ब्लॉग समाज और हम और सच की दस्तक राष्ट्रीय मासिक पत्रिका वाराणसी से हुई बातचीत इन जनप्रिय महान समाजिक कार्यकर्ता श्री सौम्या शंकर बोस जी ने कहा कि कोलकाता पोर्ट का यूंहि अचानक बिना जनभावना से अवगत हुए सीधे ही, श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी कर देना सर्वथा गलत निर्णय है। यह आजादी के महानायक नेताजी श्री सुभाष चंद्र बोस जी का घोर अपमान है जिसे बंगाल ही नहीं पूरे देश का सच्चा राष्ट्रभक्त कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता। नेताजी श्री सुभाष चंद्र बोस जी ने कहा था कि ‘हक न मिले तो छीन लो’ । अब विडम्बना देखो कि नेताजी बोस जी का ही नाम और सम्मान रूपी हक छीना जा रहा है जबकि देश को पता है कि कोलकाता पोर्ट से सिर्फ़ नेताजी बोस का गहरा सम्बन्ध रहा है श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का नहीं, कोलकाता पोर्ट से नेताजी बोस ने राष्ट्रहित में अनेकों विदेश यात्राएं की और जिसका गवाह है यह कोलकाता पोर्ट। इसी पर मचे वैचारिक विवाद पर पेश है श्री सौम्या शंकर बोस जी से बातचीत के कुछ अंश –
सवाल -सौम्य शंकर बोस जी कोलकाता पोर्ट के विषय में क्या है पूरा मामला और आपकी सरकार से क्या मांग है?
जवाब – केंद्र सरकार ने हाल ही में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम श्यामाप्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट रखने का निर्णय लिया।  उस बंदरगाह में दो गोदी का नाम पहले से ही नेताजी श्री सुभाष चंद्र बोस जी के नाम पर है क्योंकि उन्होंने भारत के बाहर अपनी राष्ट्रहितेषी विशेष यात्राओं के लिए उन गोदी का उपयोग किया था और इस प्रकार कोलकाता बंदरगाह ट्रस्ट की नेताजी के लिए एक ऐतिहासिक प्रासंगिकता है यह नेताजी की याद  संजोए एक ऐतिहासिक विरासत और धरोहर है।  सुभाष चंद्र बोस जी को जनवरी 1925 में कोलकाता बंदरगाह से मण्डलाया जेल तक ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिया गया था पर वह अंग्रेज़ों के सामने कभी नहीं झुके और वह उन्हें चकमा देकर बाहर भी निकल गये थे। पूरी दुनिया की खूफिया ऐजेंसियों ने आज तक नेताजी के बारे में कुछ पता नही कर पाया। इसलिए उनके सम्मान में यह निश्चित रूप से उचित है कि नेताजी के नाम पर कोलकाता बंदरगाह का नाम श्री श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर न रखा जाए क्योंकि इसकी कोई प्रासंगिकता ही नहीं है।हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम नेताजी के नाम पर ही रखे और अगर सरकार ने नेताजी के नाम पर नहीं रखा तो पिछला नाम जो “कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट” है, उसे ही पुनर्जीवित किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से केंद्र सरकार दोनों महान विभूतियों का अपमान कर रही है । यकीनन, श्यामाप्रसाद जी आज जीवित होते तो वे भी केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ खड़े होतेे क्योंकि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी स्वंय नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के प्रशंसक थे।
सवाल- क्या आपकी इस विषय पर श्री चंद्रा कुमार बोस जी से कोई बात हुई है अगर हां तो उनका क्या विचार है? 
जवाब- हां, मैंने इस मुद्दे के सम्बंध में श्री चंद्रा कुमार बोस जी के साथ बातचीत की है और वह हमारी मांग से पूरी तरह सहमत हैं तथा हमारे राष्ट्रहितेषी एजेंडे में हमारा समर्थन कर रहे हैं ।
सवाल- क्या कोलकाता पोर्ट विवाद पर आपने ममता बनर्जी सरकार से भी बात की है या मांग रखी है? 
जवाब-आदरणीय ममता बनर्जी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट मुद्दे के बारे में निश्चित रूप से अवगत हैं लेकिन हमने अभी तक इस मामले में उनसे संपर्क नहीं किया है पर हमें विश्वास है कि वह भी नेताजी श्री सुभाष चंद्र बोस जी के समर्थन में ही होगीं।
सवाल- सौम्या जी आप आई. एच. आर. ओ. से कब से जुड़े हैं और जुडने का क्या मूल कारण रहा? 
जवाब – मुझे जनवरी 2020 से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पश्चिम बंगाल चैप्टर का महासचिव नियुक्त किया गया है। इसके लिये मैं सैय्यद एजाज अली और डॉ. नेन सिंह प्रैमी जी का आभारी हूं। मैं एक उन्नत समाज का निर्माण करना चाहता हूं। जहां हर तरफ खुशहाली हो। वह ऐसा शिक्षत संस्कारी और योग्य समाज हो जो अपने देश को फिर से सोने की चिड़िया में तब्दील कर दे।
सवाल – क्या आप आई. एच आर. ओ. के अलावा भी किसी सामाजिक संगठन से जुड़े हैं? 
जवाब- मैं पश्चिम बंगाल से ग्लोबल पीस संस्था, अफ्रीका का कन्वेनर हूं और डॉ. कलाम स्मृति इंटरनेशनल नाम के केरला का एक विशाल सामाजिक संगठन है जोकि शिक्षा और शोध के लिए काम करता है यहां भी मैं पश्चिम बंगाल से महासचिव के पद पर हूं और इसके अलावा अमादेर आरपन और कुछ लेबर वेल्फेयर ऑर्गनाइजेशन से भी जुड़ा हुआ हूं।
सवाल – सौम्या जी आपको सोसल वर्क की प्रेरणा कहां से मिली? 
जवाब-  मैं बचपन से मेरे महानतम दादाजी के काफी करीब रहा जिनका नाम था श्री डॉ. विजय केतु बोस जी जोकि उस समय के चर्चित सहृदयी मनोचिकित्सक और मनोविश्लेषक थे। जिन्होंने अपने समय में महिला सशक्तिकरण पर बहुत काम किया था। उन्हीं की प्रेरणा से आज में भी समाज को अपनी सेवाएं दे पा रहा हूं।
सवाल- सौम्या जी आप ने सोसलवर्कर बनना ही क्यों पसंद किया? कोई सरकारी नौकरी क्यों नहीं की? 
जवाब- हम सभी अपने देश की छोटी-छोटी कमियों के बारे में सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था से शिकायत करते हैं लेकिन वास्तव में कोई भी इस क्षेत्र में जाकर ईमानदारी से मेहनत करना नहीं चाहता जिसस देश बेहतर बने।  मैं उन लोगों में शामिल होना चाहता था जो शिकायत करने के बजाय परिदृश्य पर आते हैं और समस्याओं को मिटाने के लिए खुद से जूझते हुए कार्रवाई करते हैं।  अगर मैं किसी भी तरह की जनसेवा करता हूं तो मैं सरकारी नौकरी में रह कर पूरे समर्पण भाव से नहीं कर पाता। मैनें स्वंय को भारत माता के लिए समर्पित कर दिया है।
सवाल- कितना कठिन है सामाजिक कार्यकर्ता होना?
जवाब- यह बहुत मुश्किल है क्योंकि हमें अक्सर बड़े पैमाने पर यात्रा करने और दूरदराज के स्थानों पर जाने की आवश्यकता होती है जो पीने के पानी, स्वच्छता, सड़कों के साथ-साथ बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से रहित है।  इसके अलावा अक्सर जब हम किसी भी शक्तिशाली लोगों का विरोध करते हैं तो यह काफी जोखिम भरा हो जाता है।  इसके अलावा हमारे व्यक्तिगत जीवन के लिए समय निकालना लगभग असंभव है जो अक्सर तनावपूर्ण हो जाता है पर यह भी कहूंगा कि जब हौंसला चट्टान हो तो कठिन कुछ भी नहीं होता।
सवाल – आपने आजतक कितने सामाजिक कार्यों में विशेष भूमिका निभाई तथा कितने मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठायी है या जनांदोलन किया? 
जवाब-हम वंचित बच्चों की सर्वसुलभ शिक्षा, आदिवासी लोगों का उन्नत जीवन, गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के मानवाधिकार, प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों के लिए अनेकों कैम्प लगाकर काम करते हैं जो लोग अस्पताल की भारी फीस देने में असमर्थ हैं उनके हित के लिए हम लोग जनआवाज बनकर उस फीस को कम करवाकर जरूरतमंदों को सस्ता इलाज मुहैय्या करवाने का काम करते हैं। इसके अलावा हम बच्चों और महिलाओं की तस्करी और कई अन्य मुद्दों का सामना करते हैं। अभी हाल ही मैं कोरोना महामारी तथा आम्फान तूफान के समय में हमने और हमारी टीम ने काफी जनसेवा के कार्य किए हैं। इसके उपरांत हमने हाल ही में स्विगी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जोकि अपने वर्कर के साथ अमानवीय वर्ताव कर रहा था।  वर्तमान स्कैनारियो में हम बीएसएनएल प्राधिकरण के खिलाफ लड़ रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपने अनुबंधित मजदूरों को 16 महीने के वेतन का भुगतान नहीं किया है जिस कारण अभी तक 11 पीड़ित मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं। इनकी कई गलत नीतियों का हमने पर्दाफाश कर पूर्ण मुखर विरोध किया है जोकि पूरी तरह मानवाधिकार पर चोट यानि अमानवीय हैं।जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।हम पीड़ितों के हक के लिए किसी भी हद तक जाने को कृतसंकल्पित हैं।
सवाल- सौम्या जी जीवन में आपका क्या सपना है और क्या लक्ष्य है? 
जवाब- मैं पुत्रवत् अपने राष्ट्र की ‘भारतमाता’ की पूरी मन वचन और कर्म से सेवा करना चाहता हूं ।
सवाल- अगर आप देश की राजनीति में बड़ी भूमिका में आते हैं तो देश के लिए तीन बड़े काम क्या करेगें? 
जवाब- सबसे पहले मैं बीपीएल श्रेणी के तहत बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को निःशुल्क बनाकर सर्व सुलभ शिक्षा अभियान क्रियान्वयन करूंगा जो शिक्षा रोजगारपरक होगी। दूसरा, मैं अस्पतालों और अन्य चिकित्सा केंद्रों के बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश करूंगा, खासकर गांवों में, क्योंकि हर साल उचित सुलभ उपचार की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग मर जाते हैं।तीसरा, हमारे देश को विकसित बनाने के लिए हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारे मजदूर और नौजवान, जवान और किसान खुश और विकसित हों।  मैंने समाज के इन वर्गों की बेहतरी में धन और समय का निवेश करूंगा और उनके पक्ष में नई  उन्नत नीतियों का शुभारम्भ करूंगा।मैं शिक्षा और धर्म से  राजनीति को दूर रखने के प्रयास पर काम करूंगा जिससे सर्वधर्म सम्भाव को बल मिले और व्यर्थ के विवादों से युवा अपने को घिरा महसूस न कर सके और उनकी सम्पूर्ण ऊर्जा राष्ट्रहित में लग सके जो विकास का मूलमंत्र है।
सवाल- आप खुद को एक लाईन में कैसे परिभाषित करेगें?
जवाब- मैं हर जन्म में सौम्या शंकर बोस के रूप में ‘एक सच्चा देशभक्त’ रहूं।
जयहिंद🙏🇮🇳
कवरेज :  ___ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना,
न्यूज ऐडीटर सच की दस्तक राष्ट्रीय मासिक पत्रिका वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
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