नन्हें परिंदे की छोटी सी उम्र में ऊंची उड़ान ~संभव डपकरा

मध्य प्रदेश के मन्दसौर जिले के सुवासरा क्षेत्र का रहने वाला संभव की उड़ान एक नन्हे से परिंदे जैसी है ममता की गोद से जन्मे संभव का 3 साल की उम्र से ही भगवान के प्रति लगाव सा रहा है घर मे गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की स्थापना की जाती थी तो संभव जब विसर्जन का समय आता था तो वो गणेश जी का पानी मे विसर्जन नही करने देता था घर के भगवान के मंदिर में रखे शंख से भी संभव का लगाव से रहता था।

वो शंख ओर गणेश जी मूर्ति दोनों के साथ खेलता था एक दिन संभव ने दादा रामनिवास जी से पूछा कि ये शंख कैसे बजता है दादा जी ने संभव को शंख बजाने की कला सिखाई फिर क्या था संभव दिन भर शंख को लेकर बैठा रहता और उसे बजाने का प्रयास करता कभी सीढ़ियों पर तो कभी घर की छत पर शंख बजाने का प्रयास करता रहा लेकिन उसके इस लगाव से घर वाले हमेशा चिढ़ते रहते थे क्यो की दिन भर शंख की ध्वनि बजाया करता रहता था।

 

एक दिन संभव के पिता विवेक ने संभव के इस लगाव पर मंथन किया कि जब इसका इसमें लगाव है तो क्यो न इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयार किया जाए संभव को रोजाना शंख बजाने का प्रयास शुरू किया गया ओर उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई कि संभव कितना लंबा शंख बजा सकता है धीरे धीरे प्रयास करते गए तो संभव कभी 5 सेकंड फिर 10 सेकंड तो कभी 20 सेकंड शंख बजा लेता था लेकिन ये पर्याप्त नही था क्योंकि  वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था को 20 सेकंड से ऊपर का रिकॉर्ड चाइये था 6 महीने तक मेहनत की गई और इस प्रयास में सफलता हासिल हो गई 26 सेकंड के रिकॉर्ड के साथ संभव ने 8 साल की उम्र में ही शंख बजाने में विश्व कीर्तिमान की उपलब्धि हासिल करली वज्र वर्ल्ड रिकॉर्ड, यू .एस. ए .संस्था ने संभव को वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्रदान किया फिर क्या था संभव के नन्हे से पंखों से उड़ान शुरू कर दी।

संभव को हर कार्यक्रम में कार्यक्रम की शुरुवात में शंख बजाने के लिए आमंत्रित करने लग गए संभव को पहला मंच गणेश चतुर्थी के दिन से मिला फिर इस शुरुवात ने संभव को विभिन्न मंचो तक पहुचाया मामा मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह की विकास यात्रा का शंखनाद कर संभव ओर अधिक ऊंचे मुकाम पर पहुच गया फिर संभव को हर जगह चाहे वो अवार्ड समारोह हो कही किसी भागवत कथा की शुरुवात हो कोई स्कूल का वार्षिक उत्सव हो नासा की कार्यशाला हो कोई चैंपियन शिप प्रतियोगिता हो या सब जगह संभव को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने लग गए 8 साल की उम्र में संभव ने असंभव से कार्य को संभव कर दिखाया।

संभव को कई मंचो से सम्मान भी मिला तो दो देशों से अम्बेसेडर की उपाधि से भी नवाजा गया तो कई विदेशी संस्थाओं ओर इंस्टीट्यूट द्वारा संभव को राइजिंग स्टार कहा तो किसी ने चेंज मेकर कहा तो किसी ने यंग आइकॉन से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया संभव अभी तक कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संतो द्वारा सम्मानित हो चुका है तो कई वर्ल्ड बुक संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित हो चुका है संभव ने अपने ही रिकॉर्ड को 2 बार तोड़कर 3 मिनिट 32 सेकंड का शंख बजाने का व विश्व कीर्तिमान बना रखा है तो हाल ही में संभव ने एक ओर विश्व कीर्तिमान बनाकर कर नन्ही सी उम्र में इतिहास रच दिया संभव ने लॉक डाउन में 30 सेकंड में 33 सिक्को का टावर बनाकर नया विश्व कीर्तिमान बना दिया

संभव की माँ ममता ने जब संभव पेट मे था तब 9 महीनों तक रामायण का पाठ भी किया था ताकि जब बेटा पैदा हो तो उसमें अच्छे संस्कार आये ओर अच्छे कार्य करे संभव का जब जन्म हुआ तब जन्म और मृत्यु को मात देकर इस धरती पर आया क्यों की संभव जन्म के समय ऐसी परिस्थिति में फस गया था कि न तो ऑपरेशन करके संभव को बाहर निकाला जा सकता था संभव औजार से खींचकर बाहर निकाला गया था जिसमें उसके बचने की संभावना काफी कम थी लेकिन संभव का जन्म होना तय था इसलिए सारी मुसीबत को टाल कर ‘संभव’ ने जन्म लिया।

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x