दिग्विजय सिंह के सामने भाजपा से कौन कितना दमदार –

भोपाल से पंकज कुमार की रिपोर्ट – 

मध्यप्रदेश में भाजपा का गढ़ कही जाने वाले भोपाल सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम घोषित कर दिया है। इसी के साथ राजनीति तेज हो गई है। 1989 से लगातार भोपाल पर कब्जा जमाए बैठी भाजपा नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रहीं हैं।

आइए जानते हैं कौन-कौन है दावेदार और कौन कितना दमदार:

आलोक शर्मा महापौर-

भोपाल नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा अपने पक्ष में लॉबिंग करने में पूरी तरह से सफल हो गए थे। आरएसएस की तरफ से वीडी शर्मा का नाम सामने आने के बाद आलोक शर्मा ने लोकल प्रत्याशी के नाम पर सबको एकजुट कर लिया था।

विधायक रामेश्वर शर्मा से लेकर बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह तक आलोक शर्मा के समर्थन में थे परंतु दिग्विजय सिंह के सामने आलोक शर्मा टिक पाएंगे, इसे लेकर पार्टी के नेताओं को ही संदेह है।

विष्णुदत्त शर्मा प्रदेश महामंत्री-

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भाजपा में आए प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा का नाम आरएसएस की तरफ से चलाया गया है।

इससे पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने वीडी शर्मा को विधानसभा टिकट देने की सिफारिश की थी परंतु शिवराज सिंह ने बात नहीं मानी। अब संघ ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। प्रारंभिक राजनीति में विष्णुदत्त शर्मा की छवि एक हिंदूवादी नेता की रही है।

नरेंद्र सिंह तोमर केंद्रीय मंत्री-

नरेंद्र मोदी मंत्रीमंडल में शामिल केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद हैं परंतु वो इस बार सीट छोड़कर भागना चाहते हैं। ग्वालियर में तोमर की पराजय सुनिश्चित बताई जा रही है।

तोमर ने भाजपा की सुरक्षित सीट भोपाल से दावेदारी की थी परंतु बात नहीं बनी तो उन्होंने मुरैना सीट के लिए लॉबिंग की। अब जबकि मैदान में दिग्विजय सिंह जैसा बड़ा नाम है तो नरेंद्र सिंह तोमर की मुराद भी पूरी हो सकती है।

उमा भारती केंद्रीय मंत्री-

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पहले चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया था। फिर लोकसभा चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया और अब 2019 का लोकसभा चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया है। उनकी शपथ लगातार संशोधित हो रही है।

इधर भोपाल में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। मध्यप्रदेश में उमा भारती और दिग्विजय सिंह का मुकाबला 15 साल पहले भी हो चुका है। पार्टी उमा भारती के नाम पर विचार कर सकती है। यदि आदेश आ गया तो उमा भारती अपने संकल्प टाल भी सकतीं हैं।

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