मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से किया जा रहा था खिलवाड़ हार्ट अटैक और बीपी की घटिया दवाएं बांटी गईं –

भोपाल।

मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बांटी जा रहीं हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर की 2 दवाएं घटिया निकलीं। लैब जांच में इन्हें कचरा बताया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मप्र पब्लिक हेल्थ कार्पोरेशन (एमपीपीएचएससीएल) ने दोनों दवाओं के उपयोग पर रोक लगा दी है।

साथ ही दोनों दवा निर्माता कंपनियों को संबंधित दवा की सप्लाई के लिए दो साल के लिए डीबार किया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज डीन, जिलों के सीएमएचओ और जिला अस्पताल अधीक्षकों को जांच में अमानक निकली दवा का स्टॉक कंपनी को वापस भेजने के निर्देश दिए हैं लेकिन सवाल यह है कि जो दवाएं बांट दीं गईं उससे जितने मरीजों की मौत हुई, इसका आंकड़ा कहां से जुटाया जाएगा।

अफसरों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों को हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के इलाज के लिए सिरोन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल प्राइवेट लिमिटेड ने एटेनेलॉल 50 एमजी एंड एमलोडेपिन 5 एमजी टेबलेट की सप्लाई दी थी। जिसका बैच नंबर 705369 था।

यह दवा सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी मुंबई में हुई जांच में अमानक निकली है। इस पर सिरोन ड्रग्स द्वारा सप्लाई की गई एटेनेलॉल 50 एमजी एंड एमलोडेपिन 5 एमजी टेबलेट (बैच नंबर 705369) के उपयोग पर रोक लगा दी है।

इसी तरह देहरादून की हाइडबर्ग फार्मास्यूटिकल कंपनी ने टी 7080125 बैच नंबर की क्लोपिडोग्रिल 75 एमजी एस्प्रिन 75 एमजी टेबलेट की सप्लाई भोपाल सहित पूरे प्रदेश के अस्पतालों को की थी। इस दवा का उपयोग हार्ट अटैक से पीड़ित मरीजों को खून पतला करने के लिए किया जाता है।

यह दवा भी भोपाल स्थित स्टेट ड्रग लेबोरेटरी में हुई जांच में अमानक निकली है। स्टेट ड्रग लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एमपीपीएचएससीएल ने हाइडबर्ग फार्मास्यूटिकल कंपनी को दो साल के लिए क्लोपिडोग्रिल 75 एमजी + एस्प्रिन 75 एमजी टेबलेट की सप्लाई के लिए ब्लैकलिस्ट किया है।

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