बिना ओबीसी कोटे के ही होंगे चुनाव-

बीते कुछ महीनों से महाराष्ट्र में राजनैतिक ओबीसी आरक्षण का मुद्दा सुर्खियों में चल रहा है। लगभग हर पार्टी ने ओबीसी समाज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ओबीसी आरक्षण दिए जाने की जमकर वकालत की थी। हालांकि आरक्षण के मुद्दे को महाराष्ट्र में फिलहाल हालात मराठा समाज बनाम ओबीसी समाज का बना हुआ है।

ऐसे में महाराष्ट्र पूर्ण चुनाव आयोग (SEC)ने महाविकास अघाडी सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सोमवार को 6 जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए 5 अक्टूबर को बिना ओबीसी कोटे के ही उपचुनाव घोषित कर दिए हैं।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए 27 परसेंट आरक्षण को बहाल करने में, बाधाओं को दूर करने की पूरी उम्मीदें जताई जा रही थी ।जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में खत्म कर दिया था।

इस पर चुनाव आयुक्त का कहना है कि -सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कोविड-19 मूल्यों में गिरावट के चलते हमने उपचुनाव की तारीखों को दोहराने का फैसला लिया है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में उपचुनाव नागपुर ,अकोला ,धुले, नंदूरबार, वाशिम और पालघर में ओबीसी आरक्षित सीटों के भीतर होंगे। लेकिन सीटें अब ओपन केटेगरी में रहेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में इन चुनावों को और ओबीसी कोटा को इस आधार पर रद्द कर दिया था, कि एससी और एसटी का आरक्षण 50 फ़ीसदी की सीमा से अधिक था। वहीं ओबीसी मामलों के मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कहा कि हम सभी पक्षों से विचार-विमर्श करेंगे और कोई रास्ता अवश्य निकालेंगे ।उनके द्वारा भविष्य में एक अध्यादेश पर भी विचार किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्यादातर पार्टियां ओबीसी चेहरों को खुली सीटों से मैदान में उतारेगीं। हालांकि विपक्ष ने इस संकट के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। परवीन देरकर ने कहा कि अगर ठाकरे सरकार वक्त रहते कदम उठाती और इंपिरियल डाटा को इकट्ठा किया होता तो शायद ओबीसी कोटा फिर से लागू हो गया होता।

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