ब्रिगेड के महारैला से ममता ने मजबूत की प्रधानमंत्री पद की अघोषित दावेदारी-

कोलकाता,सच की दस्तक न्यूज़।


महानगर के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से आयोजित महारैली, जिसे लोगों की भीड़ को देखते हुआ महारैला कहा गया में किसी वक्ता ने उन्हें दीदी तो किसी ने बहन और किसी ने लौह महिला का खिताब दिया।

एक नेता ने तो साफ तौर पर कहा कि मोदी-शाह आपसे डरते हैं, इसलिए बंगाल की धरती पर पैर रखने से कतराते हैं। दूसरे ने कहा कि मां, माटी,मानुष के संषर्घ के लिए देश आपको तब से जानता है, जब आप मुख्यमंत्री नहीं थी।

अरविंद केजरीवाल से लेकर स्टालिन और अखिलेश यादव से लेकर तेजस्वी, फारुख अब्दुल्ला से लेकर शत्रुध्न सिन्हा, हार्दिक पटेल से लेकर जिग्नेश मिवाणी समेत 23 दल के कद्दावर नेताओं को एक मंच पर लाकर प्रधानमंत्री पद के लिए ममता की अघोषित दावेदारी को मजबूत कर दिया है।

सवाल है….

जहां तक ममता बनर्जी का सवाल है, रैली के सफल आयोजन के जरिए उन्होंने विपक्ष के तमाम दिग्गज नेताओं के समक्ष अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और इसके लिए सराहना भी बटोरी। तमाम राजनीतिक दलों के नेता रैली में जुटी भीड़ से हैरत में दिखे। उन्होंने इसके लिए ममता की जमकर सराहना की। इससे ममता का एक मकसद तो पूरा हो ही गई।

उन्होंने साबित कर दिया कि भीड़ जुटाने के मामले में उनका कोई सानी नहीं है। हालांकि ममता ने साफ तौर कहा कि फिलहाल मुद्दा संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मोदी सरकार को चलता करने का है क्योंकि उनकी एक्सपायरी हो चुकी है। लेकिन उनकी पार्टी के तमाम नेता-कार्यकर्ता तो अभी से उनको अगला प्रधानमंत्री मान कर चल रहे हैं।

रैली में दस भुजाओं वाली ममता के बैनर या कटआउट हों या संसद में सभी विरोधी नेताओं की तस्वीरों के उपर दीदी की तस्वीर दल की ओर से उन्हें अभी से प्रधानमंत्री मान लिया गया है।

कांग्रेस की भूमिका को लेकर शक किया जा रहा था लेकिन राहुल गांधी के ममता दी संबोधन को लेकर लिखे पत्र के बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से ममता के समर्थन में मिले पत्र के साथ साफ हो गया है कि प्रदेश कांग्रेस कुछ भी कहे आलाकमान मान रहा है कि ममता के बगैर मोदी को हटाना संभव नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि दो दर्जन राष्ट्रीय नेताओं के सामने रैली में इतनी भीड़ जुटा कर ममता ने साबित कर दिया है कि वोटरों पर उनकी जादूई पकड़ जस की तस है। अबकी यहां भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।

लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का सवाल है कि क्या अलग-अलग मानसिकता, नीतियों और महात्वाकांक्षाओं वाली क्षेत्रीय ताकतें अपने आपसी मतभेदों को भुला कर एक साथ आएंगी? शायद पूर्व प्रधानमंत्री व जनता दल (सेक्यूलर) के प्रमुख एच• डी• देवगौड़ा को भी इसका अंदाजा था इसलिए उन्होंने अपने भाषण में तमाम दलों से भाजपा को हराने के लिए आपसी मतभेद भुला कर हाथ मिलाने की अपील की।

उन्होंने भावी रणनीति तय करने के लिए एक छोटा समूह गठित करने का भी सुझाव दिया। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लायक कई नेता हैं। जनता जिसे चुनेगी वही प्रधानमंत्री बनेगा। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला का कहना था कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा यह बाद में तय कर लेंगे। पहले भाजपा को सत्ता से हटाना जरूरी है।

यशवंत सिन्हा समेत कई नेताओं ने कहा भी कि मोदी मुद्दा नहीं मुद्दों को लेकर चलें तो इस सरकार का सफाया तय है। अरविंद केजरीवाल समेत दूसरे नेताओं ने एक मंच पर इतने लोगों को एक बोली बोलने पर मजबूर करने के लिए ममता की क्षमता की दिल खोल कर प्रशंसा की।

इससे यह साफ है कि दूसरा कोई एक साथ इतने लोगों को लेकर चलने के योग्य फिलहाल नहीं दिखता, राहुल भी नहीं। इसलिए माना जा रहा है कि रैली के बहाने में ममता की प्रधाननंत्री के तौर पर दावेदारी ज्यादा मजबूत हो गई है।

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