Mission Chandrayaan2 : चंदा मामा पास के – ESRO

भारत पहले ही प्रयास में चांद और मंगल की कक्षा में अपना यान स्थापित कर दुनिया को चौंका दिया। पूरा विश्वास है कि इस बार भी भारत चंदा मामा दूर के नहीं पास के कहने पर सफल हो नया कीर्तिमान स्थापित करेगा… 

बेंगलूरु – बालगीत है चंदा मामा दूर के… पर भारत ने चंदा मामा पास के कहने की कमर कस चुका है। 

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड पर चंद्रयान-2 के जरिए अंतरिक्ष को नापनेे को तैयार है। रविवार सुबह 6.51 बजे मिशन के प्रक्षेपण के लिए 20 घंटे की उलटी गिनती शुरू हो गई। ESRO European Space Research Organisation के अध्यक्ष के.शिवन जो साल 1982 में इसरो में आए और पीएसएलवी परियोजना पर उन्होंने काम किया। उन्होंने एंड टू ऐंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटीग्रेशन ऐंड ऐनालिसिस में काफी योगदान दिया,

 

उन्होंने कहा कि उलटी गिनती सुचारू रूप से चल रही है। सोमवार तड़के 2.51 बजे जब भारतीय आकाश में चंद्रमा अपनी पूरी चमक बिखेर रहा होगा और उसकी दुधिया किरणें भारत की धरतीमां को छू रही होंगी ठीक उसी समय बंगाल की खाड़ी में स्थित श्रीहरिकोटा से देश का मानव रहित वैज्ञानिक अध्ययन यान चन्द्रयान-2 चन्द्रमा के लिए उड़ान भरेगा।

अंतरिक्ष चीरती भारत की उड़ाने…  

भारत की यह उड़ान ऐतिहासिक होगी जो नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।  इस बार चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर उतरने की तैयारी है जहां आजतक विश्व का कोई भी यान नहीं पहुंच सका। इतना ही नहीं भारत विश्व का सिर्फ चौथा देश होगा जो चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

इससे पहले अमरीका, रूस और चीन ही चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस ऐतिहासिक मिशन के लांचिंग का गवाह बनेंगे। 

मिशन मून के प्रक्षेपण के समय वे श्रीहरिकोटा में मौजूद रहेंगे। चंद्रयान-2 मिशन चंद्रयान-1 से कई मायनों में अलग है लेकिन पहले मिशन के अध्ययनों को यह आगे बढ़ाएगा। 978 करोड रुपए वाले इस मिशन के तहत 3.8 टन वजनी चंद्रयान-2 के तीन मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर और रोवर चांद तक पहुंचेंगे। प्रक्षेपण के 16 दिन बाद यान चांद की कक्षा में स्थापित होगा और 6 सितम्बर को लैंडर (विक्रम) चांद की धरती पर उतरेगा। लैंडर के उतरने के चार घंटे बाद रोवर (प्रज्ञान) निकलेगा और चांद की धरती पर चहलकदमी करते हुएविभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा।

38 बार चंदा मामा पर हो चुकी है सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश-

अब तक 38 बार चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश हो चुकी है लेकिन सफलता दर महज 52 फीसदी है। सिर्फ तीन देश अमरीका, रूस और चीन कामयाब हुए हैं। इस बार भारत की आजमाइश है। भारत का रेकार्ड अप्रतिम है। पहले ही प्रयास में चांद और मंगल की कक्षा में अपना यान स्थापित कर दुनिया को चौंका दिया। जो कोई देश नहीं कर पाया उसे भारत ने कर दिखाया। इस बार भी भारतीय वैज्ञानिक आत्मविश्वास से भरपूर हैं और पहले ही प्रयास में चंद्रमा की सतह पर लैंडर विक्रम को उतारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हालांकि, यह मिशन बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण है और लगभग 2 महीने तक इसरो वैज्ञानिकों को कई पड़ावों से गुजरना है।

हैं,.. कई पड़ावों – 

सबसे पहले इसरोकी नजर चंद्रयान-2 का सफल प्रक्षेपण कर उसे पृथ्वी की 170 गुणा 40 हजार 400 किमी वाली कक्षा में स्थापित करना। सोमवार तड़के 2.51 बजे उड़ान भरने के लगभग 973 सेकेंड (16 मिनट 21 सेकेंड) बाद उसे निर्धारित कक्षा में स्थापित कर देगा। इसके बाद 16 दिनों के के दौरान 4 आर्बिट रेजिंग मैनुवर होंगे।

यानी, यान को कक्षा में उठाया जाएगा। 17 वें दिन पांचवे आर्बिट मैनुवर के साथ उसे चांद के प्रक्षेप पथ (ट्रांस लूनर आर्बिट) में स्थापित कर दिया जाएगा। चंद्रयान अपनी कक्षा में गतिमान चांद की तुलना में अधिक गति से निकलता हुआ उसे आगे से कैप्चर करेगा।

15 मिनट के बाद लैंडर चांद की धरती पर पहुंचेगा-

इसके लिए चांद की कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया 22 वें दिन पूरी होगी। इस दौरान इस मिशन के सामने कई चुनौतियां आएंगी।चांद की कक्षा में उतरने से चार दिन पहले लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसके बाद वह 100 गुणा 30 किमी वाली कक्षा में पहुंचेगा। जब चांद की धरती से लेंडर की दूरी 30 किलोमीटर है जाएगी तब लैंडर चांद की धरती पर उतरने के लिए रवाना होगा। लगभग 15 मिनट के बाद लैंडर चांद की धरती पर पहुंचेगा।

चांद पर उतरने के 4 घंटे बाद लैंडर से रोवर निकलेगा-

-100 गुणा 30 किमी वाली कक्षा में 6120 किमी प्रति घंटे की चक्कर काटात लैंडर चांद की धरती की ओर रवाना होगा

-10 मिनट 30 सेकेंड पहले जब लैंडर चांद से 7.4 किमी की ऊंचाई पर रहेगा और उसकी गति 526 किमी प्रति घंटे होगी।

-अगले 38 सेकेंड में उसकी गति घटकर 331.2 किमी प्रति घंटे हो जाएगी और चांद की धरती से ऊंचाई 5 किमी रह जाएगी

-अगले 89 सेकेंड में वह चांद से महज 400 मीटर की ऊंचाई पर रहेगा। यहां वह लगभग 12 सेकेंड तक मंडराता रहेगा और चांद की धरती से कुछ आंकड़े जुटाएगा।

-अगले 66 सेकेंड बाद लैंडर चंद्र सतह से 100 मीटर की ऊंचाई पर रहेगा और लगभग 25 सेकेंड तक मंडराता रहेगा। यहां विक्रम यह तय करेगा कि लैंड होना है या कहीं अन्यत्र जगह पर पहुंचना है।

-10 मीटर की ऊंचाई से चांद की सतह पर उतने में विक्रम 13 सेकेंड का समय लेगा। इस दौरान सभी पांच इंजन सक्रिय रहेंगे। जब लैंडर का लेग चांद की धरती पर जम जाएगा तब सेंसर के संकेत पर इंजन स्वत: बंद हो जाएंगे।
-चांद पर उतरने के 15 मिनट बाद लैंडर धरती पर पहली तस्वीर भेजेगा

-चांद पर उतरने के 4 घंटे बाद लैंडर से रोवर निकलेगा।

 

दक्षिणी ध्रुव है कुछ विशेष

इस अभियान के लिए चांद के दक्षिणी ध्रुव को चुनना भी सोचा-समझा फैसला है। इसरो का कहना है कि उत्तरी धु्रव के मुकाबले यह हिस्सा छाया में रहता है। यहां पर्याप्त पानी होने की उम्मीद है। इस हिस्से में हमारी सौर व्यवस्था के शुरुआत दिनों के प्रमाण मिलने का भी अनुमान है। लैंडर विक्रम यहां दो क्रेटरों (अंतरिक्षीय पिंडों के टकराने से बने विशाल गड्ढे) के बीच के ऊंचे मैदान पर उतरेगा। उतरने की सुरक्षित और सटीक जगह लैंडर पर लगे कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों के आधार पर चुनी जाएगी।

पूरा विश्व है चकित – 

चंद्रयान-2 की सफलता पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। चंद्रयान-1 ने दुनिया को बताया था कि चांद पर पानी है। अब उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए चंद्रयान-2 चांद पर पानी की मौजूदगी से जुड़े कई ठोस नतीजे देगा। यह अभियान चांद पर विभिन्न अणुओं में पानी की उपस्थिति का अध्ययन करेगा।

इससे चांद की सतह नक्शा तैयार करने में मदद मिलेगी, जो भविष्य में अन्य अभियानों के लिए सहायक होगा। चांद की मिट्टी कौन-कौन से खनिज हैं और किस मात्रा में हैं, चंद्रयान-2 इससे जुड़े कई राज खोलेगा। उम्मीद यह भी है कि चांद के जिस हिस्से की पड़ताल का जिम्मा चंद्रयान-2 को मिला है, वह हमारी सौर व्यवस्था को समझने और पृथ्वी के विकासक्रम को जानने में भी मददगार हो सकता है।

विश्व की मीडिया ने रखी अपनी राय-

– द गार्जियन ने चांद पर मानव कदम प़़डने के 50 साल बाद फिर चांद की ओर अंतरिक्ष एजेंसियों के झुकाव का विश्लेषण किया है। अभी कुछ महीने पहले ही चीन ने भी चांद पर अपना यान उतारा है।

– द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इसी विषय पर लिखा है। उसका कहना है कि भारत के लिए यह चंद्र अभियान टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उसकी प्रगति का प्रतीक है। चीन अपने अभियान से खुद को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। वहीं, अमेरिका और नासा के लिए मंगल पर जाने के रास्ते में चांद एक प़़डाव की तरह हो गया है।

– वाशिंगटन पोस्ट ने इस अभियान को अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की ब़़ढती महत्वाकांक्षा का प्रतीक बताया है। वाशिंगटन पोस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी प्रशंसा की है। इसने लिखा, ‘भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों की शुरुआत 1960 के करीब ही हो गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे नई ख्याति मिली है। मोदी ने अंतरिक्ष कार्यक्रमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के ब़़ढते कद और मजबूत रक्षा क्षमताओं से जोड़कर प्रोत्साहित किया है।’

50 साल पहले पहुंचा था मानव

उल्लेखनीय है कि ठीक 50 साल पहले 16 जुलाई, 1969 को अमेरिका ने चांद पर मानव भेजने के लिए अपना अपोलो-11 यान रवाना किया था। पांच दिन बाद यानी 21 जुलाई को अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखा था। 19 मिनट बाद उनके साथी बज एल्डि्रन ने चांद पर कदम रखा था। जिसे सोवियत संघ झुठला चुका है और उसने अमेरिका के चन्द्रयान वाली फोटो को फेक कहा है कि जब वहां पर्यावरण है नहीं तो अमेरिका का फ्लैग कैसे हिलता दिख रहा.. ऐसे कई दावे कर पूरी दुनिया के मन में संदे है कि क्या अमेरिका ने चन्द्रयान भेजा भी था या सिर्फ़ हॉलीवुड फिल्म दिखाई गयी….. रिसर्च जारी है… आज पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिक गयीं हैं…  जो हम सब भारतीयों के लिए गर्व की बात है  ।

सच की दस्तक टीम की तरफ़ से इस महान अभियान की बधाइयाँ  । 

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