करूणा बचेगी तभी मानवता बचेगी – न्यूज एडीटर आकांक्षा सक्सेना

करूणा बचेगी तभी मानवता बचेगी
Only humanity will survive by compassion
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-ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना, न्यूज एडीटर सच की दस्तक 

 

दुनिया के रचियता ने सबसे बुद्धिमान प्राणी को रचा जिसमें प्रेम, दया,परोपकार, बुद्धि, विवेक, सोचने -समझने की शक्ति व मुस्कुरा के सभी के हृदय को जीतने की शक्ति और सहानुभूति और प्रार्थना स्वरों से किसी पीड़ित को नवजीवन देने की अपार शक्ति निहित थी जिसमें सपनों और कल्पनाओं को साकार रूप देने की अनंत ऊर्जा विद्यमान थी जोकि दुनिया के रचियता की सबसे भरोसेमन्द और प्रिय रचना थी जिसे उसने नाम दिया “इंसान”। दुनिया के रचियता को पूरा विश्वास था कि यह प्राणी हमारा सहयोगी साबित होगा। यह प्राणी हमारी प्रकृति और हमारी अनंत रचनाओं का रक्षक होगा। दुनिया के रचियता ने उसे समझाया तुम्हारा होना, तुम्हारा कर्म प्रकृति के सभी जीवों की रक्षा और मेरी सभी रचनाओं का सेवाभाव से सम्मान करते हुये जीवन पथ पर सच्चाई और ईमानदारी से अग्रसर होना है तभी तुम्हारा इंसान होना और मेरा तुम्हें रचना सफल और सार्थक होगा। मैं अपनी सृष्टि के प्रत्येक प्राणी, इंसान को एक अदभुद प्रतिभा और ऊर्जा के साथ भेजता हूँ। मैं किसी को खाली हाथ नही भेजता और नही चाहता कि मेरा इंसान मेरे पास खाली हाथ मिटा हुआ ना लौटे। उसे रक्षक बनाकर भेजा वह भक्षक बन कर न लौटे। उसे देकर भेजा वह छीन कर न लौटे। उसे गर्व से भेजा वह शर्मिंदा होकर न लौटे। वह इंसान है इंसान बन के तो लौटे। इंसान ने पूछा कि हे ! प्रभु इस दुनिया में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कीमती क्या है ? दुनिया के रचियता ने कहा,” जीवन। ” जीवन की रक्षा करना तुम्हारा प्रथम कर्म और धर्म है, इस सुकर्म को ही इंसानियत कहते हैं। ” इंसान ने पूछा यह सब भले कार्यों में मेरा सबसे बड़ा सहयोगी कौन होगा प्रभु? दुनिया के रचियता ने कहा,” इंसान |” इंसान ने कहा,” मतलब ? दुनिया के रचियता ने समझाते हुये कहा,” हाँ, इंसान ! वह सर्वगुण सम्पन्न सुन्दर सहयोगी शक्ति होगी “नारी”। इंसान, इंसान का सहयोगी हो तो वह और भी उन्नत हो सकेगा। आपसी सहयोग भी एक योग है और जहां सेवा और सहयोग होगा वहां उन्नत मानसिकता, उन्नत भविष्य और एक उन्नत युग का आरम्भ होता है और उन्नत इंसान की शक्ति की कोई सीमा नही होती। वह अनंत अच्चुयत्तम् अद्वैत को भी जान सकता है । इंसान ही एक मात्र वो अदभुद रचना है जो निस्वार्थ सेवा और प्रेम से निश्चल मुस्कॉन से अपने सुकर्मों से दुनिया के रचियता का साक्षात्कार कर सकती है पर, अगर इंसान ने इंसानियत को शर्मशार किया तो वह इसका भयंकर दण्ड़ भोगेगा क्योंकि मेरा न्याय यही है कि तुम जो दोगे वही पाओगे। इंसान यह सुनकर बहुत खुश हुआ और उसने वादा किया कि हम इंसानियत धर्म निभायेगें। दुनिया के रचियता ने प्रेम से समझाया कि वह धरती पर जाकर हर तरह की अति से बचे और हर तरह के लालच से बचे। सदा मुझ पर श्रद्धा रखें और खुद पर भरोसा रखें। इंसान सदा यह याद रखे कि वह इंसान है जिसके ऊपर जीवन मूल्यों को जिंदा रखने की और प्रकृति के रक्षक होने की जिम्मेदारी है जिसे उसे ईमानदारी से इंसानियत के दायरे में रहकर निभानी है। इंसान को सदैव इस बात का स्मरण रहे कि जीवन और मृत्यु मेरे हाथ में है और उसे अंत में वापस मेरे पास ही लौटना है और जब मेरे पास ही आना है तो हे ! मेरे हृयांश तुम पापी बनकर मत लौटना कि तुम इंसान बने ही लौटना, पशु बनकर मत लौटना। मैं तो एक रचियता हूँ और मैं हमेशा इंसान रचता रहूंगा इस भरोसे से कि कोई तो इंसान, खुद को याद रखे लौट सके और इंसानियत को समेटे, इंसानियत को जिये हुये, कोई इंसान मुस्कुराते हुये मेरे पास लौटे। समय बीता समय बदला इंसान जमाने की चकाचौंध में इस कदर अंधा हुआ कि वह सबकुछ भूल गया और वह धन और रूतवे में तो बहुत ऊँचा उठा पर इंसानियत से लुढ़क कर पशुता पर जा गिरा। उसने अपनी स्वार्थपूर्ति हेतु प्रकृति को पूरी तरह रौंद डाला है। उसने जंगल काट डाले जिससे कई औषधीय पेड़ -पौधे फूल तथा जीव – जन्तुओं और पक्षियों की अनगिनित उन्नत प्रजातियां लुप्त हो गयीं। उसने निजस्वार्थ में प्रकृति का सीमा से ज्यादा दोहन किया जिससे प्रकृति में बहुत बड़ा असुंतलन हुआ और इसी असंतुलन का दुष्परिणाम कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा व भयंकर गर्मी व रूह कपांती शर्दी के रूप में सम्पूर्ण मानवजाति को भुगतना पड़ रहा है। यह इंसान के आधुनिकीकरण की अति का नतीजा है कि वह प्राकृतिक पत्तल व धातु के बर्तनों को छोड़कर वह प्लास्टिक व पशु हड्डियों से बने बर्तनों में खाना खा रहा, दूध -छांछ की जगह बियर चल रही, सोफ्टड्रिंक चल रहा, कई दिनों के सड़े मैदा के पकवान साथ में धुंआ उड़ाने में अपनी शान समझ रहा। जिसके परिणामस्वरूप वह भयंकर बीमारियों का शिकार हो रहा है। इंसान की धन की भूख इतनी बढ़ी की सामान के आयात – निर्यात के बजाय वह इंसान का ही आयात- निर्यात करने में लगा, इंसान का अंग -अंग बेच कर यह मालामाल हो रहे और सरकार और पुलिस को चुनौती दे रहे। यह भितरघाती हमारे युवाओं को प्रेमजाल में फांस कर उन्हें नशीली दवाओं का आदी बनाकर हमारे देश के भविष्य को कमजोर कर रहे। यह भितरघाती समाज और देश के गद्दारों को समाज के सामने जलील करके फांसी दे देनी चाहिये जिससे जुर्म करने वालों की जुर्म सोचने से पहले रूह कांप जाये। पापियों को जबतक भय नही होगा तब तक यह पापी इंसान सुधरने वाले नही है। इंसान के लालच ने इंसान को हैवान बना डाला। इंसान ने अपनी बर्बादी की कहानी स्वंय लिखी। उसने केवल और केवल पाना, हड़पना, छीनना ही सीखा वह ‘देना’ शब्द ही भूल गया। उसकी देने की प्रवत्ति ही खत्म हो चली है जोकि भविष्य में एक बहुत बड़ी त्रासदी को जन्म देगी और उसके परिणाम बेहद दुखदायी सिद्ध होगें। उसकी सबकुछ पाने की अंधी होड़ चालाक दौड़ ने उसने अपनी सहयोगीशक्ति नारी को भी हद के पार जाकर रूलाया। जन्म देने वाले माँ -बाप को बृद्धाआश्रम छोड़ आता। जिस गाय का दूध पीकर जिंदगी चली उसी गौ माता को काट कर खा जाता। उसने तो दैत्यों को भी बहुत पीछे छोड़ दिया जो अपनी ही दुधमुंही बच्चियों के साथ बलात्कार कर रहा। अपने कार्यक्षेत्र में गद्दारी कर रहा, अपने कार्यक्षेत्र में अपने सहकर्मियों को सता रहा उन्हें नीचा दिखाने का कोई मौका नही छोड़ रहा, अपने कार्यक्षेत्र में अपने नीचे काम करने वाले जूनियर का मनमाना आर्थिक, मानसिक, शारीरिक शोषण कर रहा। इंसान की फितरत ही चोरी और कपटीपन की धोका देने वाले बन चुकी है कि वह अनाज का व्यापार कर रहा तो उसमें मिलावट कर रहा, घी में रिफाइण्ड मिला रहा,तेल में कैमिकल मिला रहा, दूध में पानी और कैमिकल मिला रहा,दालों में कंकड, फलों और सब्जियों में इंजेक्शन लगा रहा,यहाँ पर भी नही रूकता कि ग्राहक से पैसे तो सही चीज के ले रहा पर उन्हें बातों में लगा कर तीन फल में दो फल सडे चढा रहा, जूस में रंग मिला रहा, मिठाइयों में मावा की जगह कैमिकल दे रहा, उसे नही पता कि उसका यह कपटी स्वभाव हजारों मासूम लोगों की जान ले रहा। इंसान खाने-पीने की दुकानों पर यमराज बना बैठा है। वह हर पल लोगों को काल के मुंह में धकेल रहा है। वह हर पल गलतफहमी में है कि वह सामने वाले को लूट रहा पर सच तो यह है कि वह स्वंय को स्वअस्तित्व को, अपने ईमान, अपने जमीर को, इंसान तत्व को इंसानियत को लूट रहा है। इंसान आधुनिक तो बहुत हुआ पर दिमाग से अंधविश्वास नही मिटा पाया कि धन के लालच में आज भी अपने बच्चों की परिवारीजनों की बलि चढ़ा रहा। नर और नारी दोनों ने अपनी सबकुछ पा जाने की हवस ने इंसानियत को शर्मसार कर रखा है। आज प्रकृति यह अस्तित्व हम इंसानों से बहुत गुस्से में है। अगर हम इंसानों ने अपनी आसमान चीरती महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश नहीं लगाया तो मंगल आदि ग्रहों की सूनी धरती जैसे भयंकर परिणाम हमें भुगतने होगें। जिसका नमूना कोरोनावायरस के रूप में पूरी इंसानियत के सामने है। और जिसके सामने हम इंसानों का धन व ज्ञान का अंहकार हाथ बांधे खड़ा है। हमें जागना होगा। समय आ गया है कि सम्पूर्ण विश्व की मानवजाति को अपने निजि वैचारिक मतभेदों को भुलाकर प्रेम और सद्भावना से एक मंच पर एक साथ आना होगा। इंसान की इस विभाजनकारी विध्वंशकारी मानसिकता ने समस्त जीवन मूल्यों और रिश्तों को अपने स्वार्थ और लालच व हवस की आग में भस्म कर दिया है। इस राख में अगर कुछ बचा है तो बस झूठा दिखावा, इंसान का खोखलापन और मात्र ” इंसानी चौंगा ” जोकि बिल्कुल व्यर्थ है जिसका कोई मूल्य नही है। यह है मूल्यहीन जीवन और इस मूल्यहीन जीवन का दुनिया के रचियता को कोई इंतजार नही। प्रतिपल बदलते समय के साथ बहुत कुछ बदला पर नही बदला तो दुनिया के रचियता का इरादा कि वह आज भी इंसान रच रहा है और धरती की तरफ देख रहा इस भरोसे के साथ कि मेरा भेजा गया इंसान, “इंसान” बने लौटे ना कि इंसानी चौगें पहने।
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Only humanity will survive by compassion

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– Social Awareness Blogger
Akanksha Saxena

The Creator of the world created the most intelligent creature with love, kindness, altruism, wisdom, prudence, the power to think and the power to win the hearts of all smiles, and the immense power to renew a suffering for sympathy and prayer. There was an infinite energy to make dreams and fantasies come true, the most trusted and beloved creation of the creator of the world, which he named “human”. The creator of the world believed that this creature would prove to be our ally. This creature will be the protector of our nature and our infinite creations. The creator of the world explained to you to be yours, your karma is to protect all living beings of nature and honor all my creations with service and move on the path of life with honesty and honesty, only then your human being Becoming and my creation will be successful and meaningful for you. I send every creature, human in my creation, with a unique talent and energy. I do not send anyone empty handed and do not want my human to come back empty handed to me. He was sent as a keeper and is coming back as a glutton. He sent man proudly on earth but he returned in shame. He is a human and has returned as a soulmate. The man asked, Hey! What is the most important precious god in this world? The creator of the world said, “Life.” Protecting life is your first karma and dharma, this action is called ‘humanity’. “Man asked who would be my greatest ally in all these good works? The Creator of the world said,” Man. “Man said,” mean? The Creator of the world said, “Yes! He will be a beautiful companion, full of all the love qualities, namely,” woman “. If man is a companion of man, he will develop even more. Cooperation is also a precious There is treasure and where there will be service and cooperation there begins an advanced mindset, an advanced future and an advanced age. There is no limit to the power of an advanced human being. He can also know the infinite perfect Aditi. The only one. Man this is a creation that can interview the creator of the world with selfless service and love, with his actions, but if a human feels ashamed of humanity, he will suffer a terrible punishment because my justice is that Only get what you give to others . Man was very happy to hear this and promised that we will follow the humanistic religion. The creator of the world lovingly Convinced that he will live on earth in every way and will survive all kinds of greed. Believe in me and myself. Man should always remember that thi s is a person who has the ability to keep life values ​​alive and protect nature. Responsibility. Which he has to perform honestly. Human will always have to live in the realm of humanity. A person should always remember that life and death are in my hands and he has to return to me at the end and when you have to come to me then hey! My dear baby man, don’t come back as a sinner. You should come back as a human. Not to be returned as a predatory animal. I am a creator and I will always create a human being with the belief that someone can remember themselves and live humanity. May humanity live and someone smiles and returns to me. Time changed and man became so blind in the glare of his life that he forgot everything. He rose very high in wealth and status but fell from human to animalism. We cruel humans have completely trampled nature for our self-sufficiency. We cut down the forest causing many medicinal trees to become extinct. Which had countless advanced species of flowers, animals, birds. He exploited nature beyond the limits of selflessness. Due to which there was a huge disturbance in nature and the result of this imbalance is that the whole of mankind is suffering in the form of floods and droughts and severe heat and fatal infections. It is a result of the excess of modernization of man that he is eating in utensils made of plastic and animal bones. Except natural plates and metal utensils, beer is being made in place of milk-butter. Toxic soft drinks are running. Many people take pride in blowing smoke with rotten fine flour dishes. As a result, he suffers from serious illnesses. Man’s hunger for money increased so much that he started selling human organs and it was challenged by the government and police. These fugitives are weakening the future of our country by making our youth fall in love and making them addicted to drugs. This misguided society and the traitors of the country should be hanged and hanged in front of the society so that the sentiments of the perpetrators tremble before thinking about the crime. How will he improve until there is no fear among sinners? Man’s greed has fooled humans. Manav himself wrote the story of his ruin. He only learned to acquire, grab, snatch but he forgot the word ‘give’. His tendency to give is gone. Which will be a major tragedy in the future and its consequences will prove very painful. Blind race to get her everything, she pushed her fellow woman beyond the limits. Leaving birth mother and father in old age home is a heinous sin that he continues to commit. The cow whose milk is drunk saves life. Man is biting and eating the same cow mother. Humans have also left demons far behind as he rapes his own daughters and wives. Today’s so-called modern humans leave no opportunity to torture and embarrass their colleagues in their workplace. Economic, mental, physical abuse of juniors working under them in their workplace. Human nature has become a deception of theft and insidiousness. If he is trading grain, he is mixing, mixing chemicals in refined ghee, adding chemicals to oil, adding water and chemicals to milk, adding colored pebbles to pulses. Injecting fruits and vegetables is increasing their production in an unnatural way. The customer is not getting quality even by paying full price. By engaging customers, two rotten fruits are being weighed in three fruits. These people do not know that their insidious nature will swallow the lives of thousands of innocent people. It seems that only Yama Raj is sitting at the food shops. He is pushing people into Kaal’s mouth every moment. He is in a misunderstanding every moment that he is robbing the person in front but the truth is that he is robbing himself of his selfishness, his faith, his conscience, the human element of humanity. Humans became quite modern but they could not remove superstition from their minds. He is still doing wrong in the greed for money. Humanity has become ashamed today by the ambitions of both men and women. Today this existence of nature is very angry with us humans. If we humans do not curb our ambitions, then we have to suffer terrible consequences like the dry earth of Mars and other planets. The specimen of which is in front of the whole human in the form of coronovirus. And in front of which we stand tied to the ego of human wealth and knowledge. We should wake up The time has come for mankind from all over the world to forget their personal ideological differences and come to a stage with love and goodwill. This divisive subversive mindset of man has consumed all life values ​​and relationships in the fire of selfishness and greed and lust. If there is anything left in this ashes, it is a false pretense. The hollowness of man and the “skeletal body of man” that is completely meaningless have no value. Everyone’s life is precious, who understood this, he is the beloved of God.

And the return to the Almighty God is of great quality. Much has changed with the changing times but the intention of the creator of the world has not changed. Which is that he is still creating humans and he is looking towards the earth with the belief that my sent man returns to me as a “pure human”. Whose heart will have compassion, in his heart will be the abode of God and a sense of divinity in person. You recognize that he is a pure man. Love by God.
Because Almighty God loves holiness. Purity means purity of conduct. The sanctity of seeing one’s own truth. Because God dwells in love and love is the door to salvation, whose key is only human.

-Blogger. Amb. Dr. Akanksha Saxena
World Peace and humanity activist.
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