पद्म अवार्ड 2020 : पं. छन्नूलाल मिश्रा को पद्मविभूषण, डा. एनएन खन्ना व प्रो. राजेंद्र मिश्र को पद्मश्री का मान

वाराणसी –

धर्म और कला की नगरी काशी इस साल भी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों से निहाल हो गई। शनिवार शाम सूची जारी होते ही इसमें ख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र को पद्मविभूषण और सुप्रसिद्ध सर्जन प्रो. एनएन खन्ना को पद्मश्री की घोषणा के साथ संस्कारों का नगर खुशी से उछल पड़ा। खास यह कि  संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. राजेंद्र मिश्र का भी नाम पद्मश्री की सूची में है। इससे संस्कृत व संस्कृतिसेवी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैैं। तीनों विभूतियों ने इस मान को  बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ को समर्पित कर दिया।

सरकार ने इस योग्य समझा आशीर्वाद : पं. छन्नूलाल मिश्रा

बनारस संगीत की पहचान बन चुके किराना घराने के ख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र की पलकें पद्मविभूषण की घोषणा से गीली हो उठीं। सिद्धगिरीबाग की संकरी गली में छोटे से कमरे में फर्श पर लगे बिस्तर पर आसन जमाए सहज कलाकार ने इस सम्मान के लिए भारत सरकार और देशवासियों को धन्यवाद दिया। कहा सरकार ने मुझे बहुत बड़ा सम्मान दिया, कला की कद्र की, इस योग्य समझा इसके लिए आभार, आशीर्वाद। उन्होंने इसे अपने गुरु का भी सम्मान बताया जिन्होंने उन्हें संगीत सिखाया। कहा, लोग बातों-बातों में कहते थे कि भारत रत्न मिलना चाहिए मगर मेरा मानना है कि पद्मविभूषण उससे पहले की सीढ़ी है। इसके साथ गणतंत्र दिवस का मौका याद करते हुए गुनगुना पड़े-हिंद के अमर शहीदों तुमको है मेरा शत बार प्रणाम…।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस में पहले लोकसभा चुनाव में प्रस्तावक रहे पं. छन्नूलाल ने कहा पीएम जनहित में बहुत अच्छा काम कर हैैं। उन्होंने बनारस में जितना काम कर दिया, बहुत मुश्किल से होता। अपनी खूबियों के बारे में कहा कि हम शास्त्र के अनुसार गाते हैैं और शास्त्र कहता है अति सर्वत्र वज्र्यते। इस लिहाज से विलंबित ख्याल को मध्य लय कर सुनाते हैैं। सभी की आत्मा समझ कर सुर लगाते हैैं।

सच है कि पं. छन्नूलाल का नाम आते ही जुबान पर बरबस ही खेलें मसाने में होली दिगंबर… तैर जाता है। किराना घराना व बनारस गायकी के लिए ख्यात कलाकार की जड़ें आजमगढ़ के हरिहरपुर से जुड़ीं हैैं। आर्थिक तंगी भरे बचपन में पिता पं. बद्रीनाथ मिश्र ने उन्हें संगीत का ककहरा सिखाया। नौ वर्ष के हुए तो उस्ताद गनी खां साहब का सानिध्य मिला। उनसे 16 वर्ष की उम्र तक तालीम ली और कठिन साधना से लोगों के दिलों पर छा गए। उन्हें 2010 में पद्मभूषण से नवाजा गया। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता नौ रत्नों में एक पं. छन्नूलाल खयाल, भजन, ठुमरी समेत पूरब अंग गायकी में सिद्धहस्त हैैं। उन्हें यश भारती, उप्र संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, सुर संसद मुंबई का शिरोमणि अवार्ड, नौशाद अवार्ड, बिहार संगीत शिरोमणि अवार्ड भी मिल चुका है। बनारस के सांसद नरेंद्र मोदी के पहली बार पीएम बनने पर उन्होंने एहि देश में जन्म लिए हैं, जनता के सुख दैया हो रामा… गाकर बधाई दी थी। पीएम मोदी को भगवान राम का रूप बताते हुए कहा था कि उनका जन्म दुष्टों को खत्म करने के लिए हुआ है। उन्होंने कहा पीएम नरेंद्र मोदी समाज के सभी वर्गों के साथ समान भाव रखने वाले व्यक्ति हैं। इसलिए जब कोई अवसर होता है तब वे संगीत हो या खेल, विज्ञान, आर्थिक समेत तमाम क्षेत्रों के विशिष्ट लोगों को अपने विचार का हिस्सा बनाते हैं।

 

सरकार ने पहचाना सेवा का मोल : डा. नरिंद्र नाथ खन्ना

सरकार के साथ ही लोगों ने निश्शुल्क चिकित्सीय सेवा भाव को पहचाना। यह पुरस्कार मेरी 60 साल की सेवा का प्रतिफल है। ये बातें ख्यात सर्जन व आइएमएस बीएचयू के पूर्व निदेशक डा. नरिंद्र नाथ खन्ना ने शनिवार को जागरण संवाददाता से बातचीत में कही। पद्मश्री सम्मान के लिए अपने नाम की घोषणा पर संतोष जाहिर करते हुए डा. खन्ना ने कहा कि देर से ही सही, उनके कार्यों का सम्मान किया गया। इसके लिए सरकार का मैं तहे दिल से आभारी हूं। चिकित्सक के रूप में मैंने हमेशा समाज की सेवा की है। बृज इन्क्लेव, सुंदरपुर निवासी डा. खन्ना (80 वर्ष) के पुत्र डा. राहुल खन्ना व पुत्रवधू डा. सीमा खन्ना वर्तमान में बीएचयू अस्पताल के सर्जरी विभाग में ही कार्यरत हैं। वहीं पुत्री डा. रीना अहूजा का भी जुड़ाव चिकित्सीय सेवा से है।

प्लास्टिक व कैंसर सर्जरी का श्रेय

डा. खन्ना बीएचयू अस्पताल के सर्जरी विभाग में वर्ष 1960 से 1992 तक कार्यरत रहे। इस दौरान विभागाध्यक्ष, संकाय प्रमुख सहित आइएमएस निदेशक के पद का भी दायित्व संभाला। उनके कुशल नेतृत्व में विभाग में प्लास्टिक व कैंसर सर्जरी की शुरूआत हुई थी। सेवानिवृत्ति के 25 साल बाद अब भी वे शिवाला स्थित माता आनंदमयी अस्पताल में निश्शुल्क चिकित्सीय सेवा प्रदान कर रहे हैं।

   

संस्कृत के ग्रंथों को और सरल बनाने की जरूरत : प्रो. मिश्र

पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कहा कि संस्कृत का ज्ञान जन-जन को होना चाहिए। इसके लिए संस्कृत के ग्रंथों को और सरल बनाना होगा।

 उन्होंने कहना है कि प्राचीनतम भाषा संस्कृत भले ही राष्ट्र भाषा नहीं बन सकी लेकिन इसे जन-जन तक पहुंचाना होगा। कारण ङ्क्षहदू धर्म में प्रमुख धार्मिक ग्रंथ संस्कृत में ही हैं। कहा कि संस्कृत ऐसी भाषा है जो सिर्फ शरीर से ही नहीं आत्मा के साथ भी संपर्क बनाती है। इसलिए संस्कृत को देव भाषा भी कहा जाता है।

वहीं कंप्यूटर के लिए भी संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा है। वैश्विक स्तर पर संस्कृत का मान बढ़ा है। बस, हमें वर्तमान परिपेक्ष्य में इसे सरल बनाने के साथ रोजगार से जोडऩे की जरूरत है।  जौनपुर में द्रोणीपुर गांव के मूल निवासी प्रो. मिश्र वर्ष 2002 से 2005 तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा उन्होंने गांव से ही पूरी की। वहीं उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज चले गए। अध्यापन कॅरियर की शुरूआत उन्होंने प्रयागराज से शुरू की। वर्ष 1991 में शिमला विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने। वर्तमान में शिमला में ही रह रहे हैं। प्रो. मिश्र करीब 250 से अधिक महाकाव्य, गीत, नाटक व कविताओं की रचना कर चुके हैं। उनको उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान का सर्वोच्च पुरस्कार विश्वभारती सहित एक दर्जन से अधिक पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैैं।

‘पद्मश्री’ सम्मान ने भुला दी कड़वी यादें : रमजान खान

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति को लेकर चर्चा में आए डा. फिरोज खान के पिता रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को सरकार ने पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है। उन्हें भजन गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान देने की घोषणा की गई है। डा. फिरोज ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पिता को मिले इस मान ने पिछली सारी कड़वी यादों को भुला दिया है।

अपने भजनों के माध्यम से पिता ने हमेशा समाज में समरसता की ही बात की और वही संस्कार हम चारों भाइयों को भी दिया। जयपुर के बगरू गांव के रहने वाले रमजान खान राजस्थान में भगवान श्रीकृष्ण और गाय पर भजनों की रचना करने और इनकी संगीतमय प्रस्तुति के लिए ख्यात हैं। उन्होंने संस्कृत में शास्त्री की उपाधि ली है। उनकी पुस्तक ‘श्री श्याम सुरभि वंदना’ को काफी पसंद किया गया था।

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