झारखंड में पीएम कुसुम योजना : सोलर पंपसेट से सिंचाई की पहल अच्छी

पीएम कुसुम योजना किसानों को सोलर पंपसेट से सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से किसानों की आय तो बढानी ही है, साथ ही उन्हें बिजली उत्पादक भी बनाने का लक्ष्य है। इस योजना की झारखंड में जमीनी स्थिति क्या है और किसान क्या कहते हैं, पढें इस पर केंद्रित यह विशेष रिपोर्ट…

रांची के नगड़ी के किसान गणेश पाहन जो योजना को लाभकारी बताते हैं, लेकिन उससे जुड़े दूसरे सवाल उठाते हैं। फोटो : सुमित कुमार।

रांची जिले के नगड़ी के महतो टोली के 23 साल के युवा किसान दीनानाथ कुमार एक प्रगतिशील किसान हैं। खेती-किसानी की गहरी जानकारी रखने वाले दीनानाथ कुमार का परिवार अपनी जमीन के साथ दूसरों की जमीन पर भी खेती करता है और यह परिवार करीब 30 एकड़ जमीन का जोतदार है। दीनानाथ के बड़े भाई 32 वर्षीय सूरजमल महतो के नाम पर उनके खेत में इसी साल बारिश के मौसम में दो हार्सपॉवर का सोलर पंपसेट लगाया गया हैै। यह सोलर पंपसेट केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना पीएम कुसुम योजना के तहत लगा है।

दीननाथ और उनके बड़े भाई सूरजमल बताते हैं कि यह योजना तो ठीक है, लेकिन दो एचपी का मोटर उतना पानी हमारे खेतों को नहीं दे पाता है, जितने की जरूरत है, हमें तो 24 घंटे पानी चाहिए। वे इलेक्ट्रिक मोटर पंपसेट और सोलर मोटर पंपसेट में कुछ अंतरों को बताते हुए कहते हैं, “हमने सोचा था कि यह दो एचपी का मोटर भी उतना ही पानी देगा जितना बिजली का मोटर देता है, लेकिन ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि इससे अधिक क्षमता का मोटर उनके लिए उपयुक्त होता”।

उनका कहना है कि इससे अधिक क्षमता का मोटर उनके लिए उपयुक्त होता”।

दीनानाथ जो योजना को लेकर लंबी चर्चा करते हुए कई अनुभवजनित सुझाव देते हैं। फोटो : राहुल सिंह।

दीनानाथ का परिवार झारखंड के उन आठ हजार लक्षित परिवारों में एक है, जिसे इस योजना का लाभ दिया गया है या फिर दिए जाने की प्रक्रिया में हैं। ये वित्तवर्ष 2019-20 के लिए स्वीकृत संख्या है, जिसका क्रियान्वयन किया जा रहा है।

हालांकि हर किसान दीनानाथ और सूरजमल की तरह सौभाग्यशाली नहीं है कि उन्हें पहली खेप में यह सुविधा मिल गयी हो। नगड़ी के ही महतो टोली के 35 वर्षीय किसान श्यामवर महतो ने कहा कि उन्होंने 5 एचपी के सोलर पंपसेट के लिए आवेदन किया है और इसके लिए 10 हजार रुपये का ड्राफ्ट भी जमा किया है, लेकिन अबतक योजना का लाभ नहीं मिला है। इस गांव के राजेश मेहता, बिहारी महतो, अयोध्या महतो जैसे किसानों की भी शिकायत है कि उन्होंने आवेदन किया है, लेकिन अबतक सोलर पंपसेट का इंतजार ही कर रहे हैं।

सूरजमल अपने सोलर पंपसेट के साथ। फोटो : राहुल सिंह।

योजना का लाभ लेने को लेकर लोगों की उत्सुकता की दो प्रमुख वजहें हैं कि एक तो किसी न किसी रूप में यह योजना उनके लिए लाभकारी है और दूसरी इसमें किसानों की लागत मात्र तीन से चार प्रतिशत आती है, इसलिए यह उनके लिए सस्ता सौदा है। हां, इसके क्रियान्व्यन पर जरूर सवाल हैं।

नगड़ी के ही 31 वर्षीय किसान गणेश पाहन कहते हैं कि पांच हजार का ड्राफ्ट जमा करने पर दो साल बाद यह सोलर पंपसेट उनके कुएं में लगाया गया है। करीब 19 एकड़ जमीन पर अनाज से लेकर सब्जी तक की खेती करने वाले गणेश पाहन कहते हैं, “इस पंपसेट से सिंचाई करने में थोड़ा समय अधिक लगता है”। गणेश पाहन कहते हैं, “हम यह समझ नहीं सके कि दो एचपी का बिजली वाला पंपसेट अधिक पानी देगा और सोलर पंपसेट कम”। गणेश एक और परेशानी साझा करते हुए कहते हैं कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी होने पर संबंधित लोगों को फोन करने पर समय पर पहल नहीं होती।

योजना के क्रियान्वयन से जुड़े लोग क्या कहते हैं?

पीएम कुसुम योजना को धरातल पर उतरने के काम से जुड़े कुलदीप मेहता इन आरोपों को खारिज करते हैं कि एक ही क्षमता के इलेक्ट्रिक व सोलर पंपसेट अलग-अलग मात्रा में सिंचाई के लिए पानी देते हैं। झारखंड रिन्युबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ज्रेडा) के साथ इस योजना के लिए काम कर रही लीड संस्था से जुड़े कुलदीप का कहना है, “जहां पानी की दिक्कत नहीं है, वहां यह पंपसेट कम पानी नहीं देता है”। योजना का लाभ विलंब से पहुंचने के सवाल पर उनका कहना है कि पूरे पंपसेट के तीन-चार कंपोनेंट होते हैं और इसका सामान सीरीज में आता है और उसके मिलान की वजह से देरी हो सकती है। उनके अनुसार, “योजना में 96 प्रतिशत तक सब्सिडी है और यह लाभकारी है”। कुलदीप के अनुसार, सारे जिलों में लक्षित लाभुकों तक योजना पहुंच चुकी है, रांची जिले में बेड़ो, अनगड़ा प्रखंड व कुछ जगहों पर कुछ काम बाकी है। कुलदीप लीड में क्लीन इनर्जी टेक्निकल एक्सपर्ट हैं।

नगड़ी के वैसे किसान जो सोलर पंपसेट के लिए आवेदन करने के बाद उसके मिलने के इंतजार में हैं।

ग्रिड को बिजली देने का अभी इंतजार

पीएम कुसुम योजना को लेकर ज्रेडा के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार ने बताया, “हम लोग अबतक 6711 किसानों को पीएम कुसुम योजना के तहत पंपसेट प्रदान कर चुके हैं, इससे पहले भी करीब 2000 किसानों को इसका लाभ मिला था और यह संख्या अब कुल आठ हजार से अधिक हो गयी है”। उनके अनुसार, केंद्र की 30 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा राज्य सरकार 66 से 67 प्रतिशत सब्सिडी देती है और किसान का मात्र तीन से चार प्रतिशत हिस्सा होता है। इस सवाल पर कि क्या राज्य सरकार द्वारा के अंशदान में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बैंक के कर्ज की कोई भूमिका होती है, वे इनकार करते हैं।

हालांकि झारखंड में पीएम कुसुम योजना के तीन घटकों में तीसरे घटक के तहत अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचे जाने और उससे किसानों को आर्थिक लाभ होने के सवाल पर ज्रेडा के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार ने कहा कि राज्य में अबतक ऐसा नहीं हो पाया है। उनके अनुसार, “इसको लेकर ग्राउंड वर्क जरूर शुरू हो गया है”। जानकारी के अनुसार, राज्य ने 3.10 रुपये प्रति यूनिट सोलर बिजली की दर निर्धारित की है।

झारखंड में बड़े बदलाव का माध्यम बन सकती है पीएम कुसुम योजना

झारखंड मुख्यतः एक पठारी प्रदेश है। उत्तरप्रदेश एवं बिहार की तरह यहां मैदानी इलाके और सिंचाई के लिए नदियों एवं नहरों का उतना मजबूत संजाल नहीं है, ऐसे में पीएम कुसुम योजना इस राज्य में कृषि क्षेत्र में कायापलट करने वाली योजना साबित हो सकती है। झारखंड में किसान तालाब, डोभा और कुओं पर सिंचाई के लिए बहुत अधिक निर्भर हैं और पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंपसेट कुओं पर ही लगाया जा रहा है। अगर इस योजना की खामियों व दिक्कतों को जमीनी स्तर पर समझ कर उसमें सुधार किए जाए तो यह और अधिक लाभकारी हो सकती है।

झारखंड में किसान सिंचाई सुविधा के लिए खेतों के बीच ऐसे परंपरागत जलस्रोत रखते हैं, जिससे सिंचाई में सुविधा हो।

क्या है पीएम कुसुम योजना?

केंद्र सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने व किसानों की आय दोगुणी करने के लक्ष्य के मद्देनजर उन्हें सिंचाई आत्मनिर्भर एवं ऊर्जा उत्पादक बनाने के लिए 2019 में किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान नाम से एक योजना की शुरुआत की। इस योजना को संक्षेप में पीएम कुसुम योजना का नाम दिया गया। सरकार की घोषणा के अनुसार, इसका उद्देश्य किसानों को वित्तीय व सिंचाई के स्तर पर सुरक्षा प्रदान करना है। तीन घटकों वाली इस योजना को 19 फरवरी 2019 को केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को स्वीकृति प्रदान की जिसके बाद इसे धरातल पर अमल में लाए जाने का कार्य आरंभ हुआ।

क्या हैं पीएम कुसुम योजना के तीन घटक?

घटक अ. इसके तहत 10 हजार मेगावाट का विकेंद्रीकृत भूमि से लग़ा हुआ रिन्युबल पॉवर प्लांट तैयार करना।

घटक ब. 17.50 लाख सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंपों की स्थापना।

घटक स. 10 लाख ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंपों का सोलराइजेशन।

इन तीनों घटकों का समन्वित लक्ष्य 2022 तक 25,750 मेगावाट सोलर क्षमता का विस्तार करना है। इस मद पर केंद्र कुल 34, 422 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

कुआं से जुड़ा सोलर पंपसेट।

घटक ब व स के तहत किसानों की भूमि पर 7.5 एचपी क्षमता के कृषि सोलर पंप लगाने से संबंधित है। हालांकि घटक स के तहत किसान उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकेंगे और अतिरिक्त उपलब्ध ऊर्जा को डिस्कॉम को बेचा जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय हो सकेगी और राज्यों को अपने आरपीओ (अक्षय ऊर्जा दायित्व) लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक अवसर मिलेगा।

घटक ब व स के लिए केंद्र से 30 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाती है, 30 प्रतिशत राज्य के देना होता है और शेष 40 प्रतिशत किसान को देना होता है। इस लागत में 30 प्रतिशत बैंक द्वारा सहायता उपलब्ध करायी जा सकती है और शेष 10 प्रतिशत किसान को देना पड़ सकता है। केंद्र के द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के किसानों के लिए 50 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सरकार के द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार, इससे हर साल 27 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा और हर साल 1.2 बिलियन लीटर डीजल की बचत होगी, जिससे देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

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