G7 समिट: पीएम मोदी ने ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन से की मुलाकात, सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से करेंगे चर्चा

  • फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से करेंगे मुलाकात
  • अमेजन के जंगलों में लगी आग, ब्रेक्सिट के डेडलॉक को खत्म करने और व्यापार तनाव में कमी समेत कई मुद्दों पर हो रही है चर्चा

 

बायरिट्ज (फ्रांस), प्रेट्र/एएनआइ।

फ्रांस के बे ऑफ बिसके स्थित रिसॉर्ट टाउन बियारिट्ज में 24-26 अगस्त के बीच होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है। समुद्र किनारे बसा प्राचीन शहर बियारिट्ज में होने वाले इस G-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस पहुंच गए हैं। भारत विकसित देशों के इस समूह का हिस्सा नहीं है, लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के विशेष आग्रह पर मोदी पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह न्योता दोनों नेताओं के आपसी संबंध और बड़ी आर्थिक ताकत रूप में भारत की पहचान का प्रतीक है।

सम्मेलन में पहुंचे मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया, ‘दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा, सुरक्षा एवं व्यापार समेत कई मुद्दों पर बात हुई। मोदी ने एशेज श्रृंखला के तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड की रोमांचक जीत पर भी जॉनसन को बधाई दी।’

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुतेरस से भी विभिन्न मसलों पर बात की। G-7 की बैठक में मोदी पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे मुद्दों पर प्रस्तावित दो सत्रों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा मोदी विभिन्न वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे। इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर समेत कई द्विपक्षीय मसलों पर भी उनकी चर्चा हो सकती है।

संबंधों पर जमी बर्फ पिघलाने के लिए रविवार को अप्रत्याशित और नाटकीय घटनाक्रम में ईरान के विदेश मंत्री जावद जरीफ भी G-7 सम्मेलन में पहुंच गए। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिश में जुटे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने उन्हें आमंत्रित किया था।

हालांकि सम्मेलन में जरीफ के पहुंचने को लेकर पहले से कोई घोषणा नहीं थी। समाचार एजेंसी के मुताबिक, करीब साढ़े तीन घंटे रुकने के बाद जरीफ वापस चले गए। इस दौरान उन्होंने मैक्रों व कुछ अन्य नेताओं से बात की।मैक्रों से उनकी बातचीत करीब 30 मिनट चली। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में ईरान और फ्रांस के राष्ट्रपतियों के बीच हुई बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए बायरिट्ज पहुंचे। वहीं, अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन ने कहा कि ट्रंप पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो उसके सामने काई शर्त नहीं रखी जाएगी।

हालांकि न्यूचिन ने जरीफ के G-7 पहुंचने पर कोई टिप्पणी नहीं की। अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों लगातार प्रयास कर रहे हैं। फ्रांस चाहता है कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में अमेरिका कुछ ढील दे।

G-7 में रूस को फिर से शामिल करने की चर्चा चल रही है। विकसित देशों का यह समूह पहले जी-8 कहा जाता था। इसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस और अमेरिका शामिल थे। 2014 में यूक्रेन के प्रायद्वीप क्रीमिया पर कब्जे के बाद उपजे विवाद के चलते रूस इस समूह से बाहर हो गया था।

सूत्रों का कहना है कि समूह के मौजूदा देश रूस से सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। हालांकि रूस को समूह में पुन: कब शामिल किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है। 2020 में जी-7 बैठक की मेजबानी अमेरिका करेगा। इसमें रूस की वापसी पर ट्रंप ने कहा, ‘मैं इस बारे में नहीं जानता। निश्चित तौर पर यह संभव है।’

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