SCO – किर्गिस्तान में मोदी-पुतिन की महत्वपूर्ण मुलाकात –

  • जिनपिंग मोदी से अनौपचारिक मुलाकात के लिए भारत आएंगे
  • मोदी ने जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की
  • मोदी ने अमेठी में राइफल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में रूस के समर्थन के लिए पुतिन को धन्यवाद कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) गुरुवार को शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organisation ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान ( Kyrgyzstan ) पहुंचे हैं। राजधानी बिश्केक ( Bishkek ) में 13 और 14 जून को आयोजित हो रहे SCO शिखर सम्मेलन के इतर पीएम मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के कार्यक्रम भी तय थे। इसी के तहत पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की थी।

 यह मुलाकात दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए काफी अहम बताई जा रही है। पीएम मोदी ने इस दौरान पुतिन को अपना घनिष्ठ मित्र बताते हुए, उन्हें दिए गए रूस के सर्वोच्च सम्मान के लिए आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के अमेठी में राइफल युनिट स्थापित करने के सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही मोदी ने पुतिन की तारीफ करते हुए कहा, ‘हम तय करें तो समय सीमा में कितना बड़ा काम करते हैं, इसका बहुत बड़ा उदाहरण आपने प्रस्तुत किया।’

बता दें कि शिखर सम्मेलन के इतर दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता हुई। इस मुलाकात के बाद पुतिन ने मोदी को रूसी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को इस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक पीएम ने यह न्यौता मंजूर कर लिया है। बता दें कि यह आयोजन सितंबर में होना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यात्रा से पहले ही ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि पीएम मोदी SCO शिखर सम्मेलन ( SCO summit 2019 ) से इतर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सूरोनबे जीनबेकोव ( president Sooronbay Jeenbekov ) और अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा ईरान ( Iran ) के राष्ट्रपति हसन रूहानी ( President Hasan Ruhani ) से भी बातचीत करेंगे। बता दें कि अमरीकी प्रतिबंधों के बाद इन दोनों नेताओं (पीएम मोदी और हसन रूहानी) के बीच द्विपक्षीय वार्ता काफी अहम मानी जा रही है।

वहीं, विदेश मंत्रालय में सचिव गीतेश शर्मा ने कुछ समय पहले ही बताया था कि SCO शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच तथा पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। वहीं , पाक पीएम इमरान खान से बातचीत के अफवाहों को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी समकक्ष बीच इमरान खान के बीच कोई बैठक नहीं हो रही है। हालांकि यह भी आशंका जताई गई कि दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक मुलाकात संभव हो सकती है। 

वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर रहेगा जोर: मोदी

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा था कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में वैश्विक सुरक्षा स्थिति और आर्थिक सहयोग पर मुख्य जोर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किर्गिस्तान की उनकी यात्रा एससीओ के सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करेगी।

मोदी ने कहा कि हाल ही में भारत-किर्गिस्तान के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और निवेश सहित कई द्विपक्षीय क्षेत्रों में समझौते हुए। इससे दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुए। मोदी यहां किर्गिज राष्ट्रपति जीनबेकोव के साथ भारत-किर्गिज बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगे।

 

यह है SCO संगठन?

बता दें कि SCO चीन के नेतृत्व वाला आठ देशों का एक आर्थिक सहयोग एवं सुरक्षा का संगठन है। 2017 में भारत व पाकिस्तान को इसमें शामिल किया गया था। 

2001 में बना था शंघाई सहयोग संगठन-

एससीओ एक राजनीतिक और सुरक्षा समूह है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था। चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके स्थाई सदस्य हैं। यह संगठन खासतौर पर सदस्य देशोंके बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग के लिए बनाया गया है। इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और मध्य एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है। भारत और पाकिस्तान इस संगठन से 2017 में स्थाई सदस्य के तौर पर जुड़े थे।

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