वायुसेना उप प्रमुख ने राहुल को दिया जवाब, रक्षा सौदों में हर देश से संप्रभुता की गारंटी जरूरी नहीं-

नई दिल्ली – 

राफेल को लेकर देश की सियासत में मचे घमासान के बीच भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर राफेल का बचाव करते हुए साफ कर दिया है कि रूस के साथ एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के सौदे में भी संप्रभुता की गारंटी नहीं थी।

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठाया था कि भारत सरकार ने फ्रांस को इससे छूट देकर एवज में अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाया था।

मंगलवार को जब राहुल राफेल मामले में नए आरोप के साथ सामने थे लगभग उसी वक्त इसकी वजह बताते हुए

वायुसेना के उप प्रमुख अनिल खोसला ने कहा कि अमेरिका और रूस जैसे देशों के साथ अंतर सरकारी समझौतों की प्रक्रिया पहले ही सुव्यवस्थित और विकसित हो चुकी है। ऐसे में खरीद में संप्रभुता का गारंटी नहीं होती है। एस-400 के मामले मे भी यही हुआ।

उनके अनुसार दुनिया में अन्य देशों के साथ अंतर सरकारी समझौते शायद पहली बार हुए हैं या फिर अभी शुरू ही हुए है। परोक्ष रूप उनका साफ संकेत था कि संप्रुभता की गारंटी अनिवार्य शर्त नहीं है। अगर दो देशों के बीच भरोसा बढ़ता है तो इसे हटाया जा सकता है और हटाया जाता रहा है।

बता दें कि कि भारत ने पिछले साल 40,000 करोड़ के सौदे पर रूस के साथ हस्ताक्षर किए थे। अक्टूबर 2020 से रूस एस400 मिसाइल के पहले स्कवाड्रन की डिलीवरी शुरू कर देगा।

वहीं सभी पांच स्कवाड्रन की डिलीवरी अप्रैल 2023 तक हो जाएंगी। इससे भारत को संवेदनशील हवाई सुरक्षा की ताकत मिलेगी। इस सौदे के तहत रूस भारत को 400 मिसाइल सिस्टम देगा।

गौरतलब है कि भारत ने यह रक्षा सौदा अमेरिका की उस धमकी के बाद भी किया था, जिसमें उसने रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर काट्सा के तहत प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।

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