SC में हिंदू पक्ष के वकील के. परासरण बोले- हम भगवान राम का जन्मस्थान नहीं बदल सकते

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या विवाद को लेकर 39वें दिन की बहस जारी है। इस मुद्दे पर 17 अक्टूबर से पहले सुनवाई खत्म होनी है। इस लिहाज से सिर्फ 3 दिन और सुनवाई बाकी है। मंगलवार को हिंदू पक्ष अपनी अंतिम दलीलें रख रहा है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने सुनवाई को 16 तक ही खत्म करने का संकेत दिया है। अब दो दिन सिर्फ हिंदू पक्ष अपनी अंतिम दलीलें रखेंगे। आज निर्मोही अखाड़ा की ओर से दलील रखना था लेकिन निर्मोही अखाड़े के वकील के परिवार में किसी की मृत्यु हो जाने के कारण वह अदालत नहीं पहुंच सके।

अब हिंदू पक्षकार महंत रामचंद्र दास के शिष्य सुरेश दास की ओर से वकील परासरण अपनी दलीलें दे रहे हैं। हिंदू पक्षकार के वकील के परासरण ने अपनी दलील की शुरुआत भारत के इतिहास के साथ की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब वकील वीपी शर्मा ने लिखित दलील के साथ कुरान के अंग्रेजी अनुवाद की कॉपी रजिस्ट्री को सौंपी। इसके साथ ही हिंदू और सिख धर्म ग्रंथ भी रजिस्ट्री को सौंपे जाएंगे।

मंगलवार को बहस के दौरान हिंदू पक्ष वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता के परासरण ने कहा कि आज सुनवाई का 38वां दिन है लेकिन साथी वकील ने उन्हें टोका और कहा कि आज 39वां दिन है। इस बीच सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि बुधवार को 40वां दिन है और बहस का आखिरी दिन भी होगा।

वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता के. परासरण ने अपनी दलील में कहा कि किसी को भी भारत के इतिहास को तबाह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट को इतिहास की गलती को ठीक करना चाहिए। एक विदेशी भारत में आकर अपने कानून लागू नहीं कर सकता है। हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम कहीं और भी जाकर नमाज पढ़ सकते हैं। अयोध्या में 56-60 मस्जिद हैं लेकिन ये भगवान राम का जन्मस्थान है। हम ये नहीं बदल सकते हैं।

सीजेआई रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान पूछा कि अगर सूट प्रॉपर्टी नष्ट हो गई है तो फैसला किस पर दिया जाएगा? इसपर के परासरण ने कहा कि मैं नहीं मानता मस्जिद हमेशा मस्जिद रहती है लेकिन मेरी दलील है कि मंदिर हमेशा मंदिर रहता है। फिर चाहे वहां पर भवन, मूर्ति हो या नहीं।

सीजेआई के सवाल पर गूंजे ठहाके-

सीजेआई रंजन गोगोई ने मंगलवार को मुस्कुराते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से पूछा कि क्या हिंदू पक्ष से सही सवाल पूछ रहे हैं? क्या आप इन सवालों से संतुष्ट हैं मिस्टर धवन? इसी के साथ ही कोर्ट में ठहाके गूंजे और के परासरण बोले कि मुझे सवालों से कोई ऐतराज़ नहीं हैं, मैं सभी सवालों के जवाब दूंगा।

अदालत में सुनवाई के दौरान के परासरण ने कहा कि मुस्लिमों को साबित करना होगा कि जमीन पर उनका हक है। इस पर जस्टिस नजीर ने पूछा कि क्‍या बिना एडवर्स पजेशन को साबित किए मालिकाना हक को साबित कर सकते हैं?

इस पर के. परासरण ने कहा कि क्योंकि ड्युअल ऑनरशिप का प्रावधान भारतीय कानून में है। लिहाजा एडवर्स पजेशन में भी किसी की जमीन पर कोई जबरन इमारत बना ले तो भी जमीन का मालिकाना हक जमीन वाले का ही रहता है। उन्होंने कहा कि अभी हमें नहीं बल्कि मुस्लिम पक्ष को मालिकाना हक सिद्ध करने की जरूरत है क्योंकि हमारा दावा तो स्वयंसिद्ध है।

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