समीक्षा : फिल्म ‘आर्टिकल – 15’ का हो बहिष्कार – ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना

 फिल्म ‘आर्टिकल 15’ ने किया ‘ब्राह्मणों’ का अपमान-

-ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना
मेम्बर ऑफ फिल्म स्क्रिप्ट राईटर ऐसोसिएसन मुम्बई 
 

दोस्तों! वॉलीवुड का इतिहास रहा कि चाहे कुछ भी हो बस पैसा मिले और इंटरटेनमेंट हो। उसके लिये चाहे किसी राजघराने का सम्मान दांव पर रख जाये या किसी जाति समुदाय की शाख गिर जाये। वॉलीवुड के कुछ तथाकथित लेखकों, निर्देशकों की यह साजिश कोई नयी नहीं है। यह पृथ्वीराज कपूर के समय से जारी है जब एक्टर “युसूफ खान” को “दशकों” तक

हमारे बीच “दिलीप कुमार” नाम से पेश किया जाता रहा ताकि हिन्दुओं को बीच लोकप्रियता हासिल कर सकें वहीं “महजबीन अलीबख्श” को “मीना कुमारी” बना कर और “मुमताज बेगम जहाँ देहलवी”, “मधुबाला” बनकर, हिंदू हृदयों पर, “राज” करतीं रहीं। आपको बता दूं जॉनी वॉकर का असली नाम

“बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी” था। और “हामिद अली खान” विलेन “अजित” बनकर, काम करते रहे। वहीं मशहूर “अभिनेत्री” रीना राय” का, “असली नाम” “सायरा खान” था। आज के युवा जिसे “जॉन अब्राहम” कहते हैं , दरअसल एक “मुस्लिम” है जिसका असली नाम “फरहान इब्राहिम” है।!! वॉलीवुड वालों को आम जन के दिलों से खेलने की यह षड्यंत्रकारी बीमारी बहुत पुरानी है और यह बात किसी से छुपी नहीं कि वॉलीवुड में मुस्लिम नायकों का वर्चस्व है। और यह भी अकाट्य सत्य है कि उन्होंने हिन्दू लड़कियों से शादियां कीं जैसे- अभिनेता शाहरुख खान की पत्नी – “गौरी” एक हिंदू है। आमिर खान की पत्नियां – “रीमा दत्ता /किरण राव”!!…और सैफ अली खान की पत्नियाँ – “अमृता सिंह / करीना कपूर” दोनों हिंदू हैं। नवाब पटौदी ने भी, हिंदू लड़की “शर्मीला टैगोर” से शादी की थी।फरहान अख्तर की पत्नी – “अधुना भवानी” …और फरहान आजमी की पत्नी, “आयशा टाकिया” भी हिंदू है। अमृता अरोड़ा की शादी एक “मुस्लिम” से हुई है … जिसका नाम, “शकील लदाक” है।सलमान खान के भाई – “अरबाज खान” की पत्नी – “मलाइका अरोड़ा” हिंदू !! और उसके छोटे भाई – “सुहैल खान” की पत्नी – “सीमा सचदेव”भी हिंदू है। आमिर खान के भतीजे – “इमरान” की हिंदू – पत्नी “अवंतिका मलिक” है। संजय खान के बेटे -“जायद खान” की पत्नी – “मलिका पारेख” है। फिरोज खान के बेटे – “फरदीन” की पत्नी:—“नताशा” है। इरफान खान की बीवी का नाम – “सुतपा सिकदर” है और आये दिन हिन्दू विरोधी, बीजेपी विरोधी बयानों को देने वाले नसरुद्दीन शाह की भी पत्नी “रत्ना पाठक” हिन्दू हैं।

समझ नहीं आता कि आखिर! क्या वजह है कि अक्सर “बहुसंख्यक बॉलीवुड फिल्मों” में ,”हीरो” “मुस्लिम लड़का” और “हीरोइन” “हिन्दू लड़की” ही होती है? वहीं फिल्मों की, “कहानियां-पटकथा ” लिखने का काम भी, इतनी बड़े बुद्धिजीवियों लेखकों वाले देश में सिर्फ़ “सलीम खान और जावेद अख्तर” जैसे “मुस्लिम लेखकों” के “इर्द-गिर्द” ही रहा जिनकी कहानियों” में, एक “भला-ईमानदार” …. मुसलमान, एक “पाखंडी” ब्राह्मण एक “अत्याचारी” – “बलात्कारी” क्षत्रिय, एक “कालाबाजारी” वैश्य, एक “राष्ट्रद्रोही”नेता, एक “भ्रष्ट” पुलिस अफसर और एक “गरीब” दलित महिला और तो और इन फिल्मों के “गीतकार और संगीतकार” भी, “मुस्लिम” हों तभी तो ,”एक गाना, “मौला” के नाम का बना जिसे गाने वाला, “पाकिस्तान” से आना जरूरी था क्या?

हम यह पूछना चाहते हैं कि जितनी बुराई जोड़कर आप हिन्दूओं को फिल्मों में उनकी छवि खराब करने में लगे रहते हो कभी हिम्मत है कि इस्लाम पर कोई एक विवादास्पद फिल्म बना कर दिखाओ। है हिम्मत तो अरब की रांते पुस्तक पर एक फिल्म बनाकर दिखाओ, या जब भारत – पाक का बंटवारा हुआ और मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर क्या जातती कीं आप पाकिस्तान का वह सच दिखाओ या कश्मीरी पंडितों पर हुये भयावह अत्याचारों का कश्मीरियत, ज़मूरियत, सरियत, जेहाद का नंगा सच पर्दे पर दिखाओ कि वहां के मुस्लिमों ने कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में कैसे शरणार्थी बनकर रहने को विवश कर दिया? दिखाओ पत्थरबाजों का वह सच जिनसे हर दिन हमारे जवान दो-चार होते हैं और दिखादो मुस्लिमों की हलाला प्रथा… मैं तो कहतीं हूं कि अच्छे सब्जेक्ट पर फिल्म बनाओ दहेज पर बनाओ ना जिसमें आज करोड़ों बेटियां कोर्ट में चक्कर काट-काट कर त्रस्त हो चुकीं हैं दिखाओ कि कानून की लचरता और विवशता क्या है? पर आप फिल्म वाले हमेशा सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू बहन – बेटी की अस्मिता के पीछे ही पड़े रहते हो?

यहां कुछ वॉलीवुड फिल्म विचारक मानते कि यह षड्यंत्र दुबई में बैठा दाउद इब्राहिम के इशारे पर होता है क्योंकि कई पांचसितारा फिल्मी मीटिंग पार्टियों में इकबाल मिर्ची, अनीश इब्राहिम जैसे हिन्दू विरोधी आतंकियों को देखा गया है। जिसका प्रमाण था हिन्दू भजन गायक टी-सीरीज” के मालिक “गुलशन कुमार” की षड़यंत्र के तहत हत्या पर अब यह सवाल उठता है कि आज भी क्या किसी षड्यंत्र के तहत फिल्में लिखीं जा रहीं है जो सिर्फ़ किसी जातिविशेष को बदनाम करके उन्हें हाशिये पर ले जाना चाहती हैं, हाँ मैं बात कर रही हूँ। आयुष्मान खुराना की फिल्म ”आर्टिकल – 15” की जिसमें खासतौर पर उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण समाज को अपमानित किये जाने का षड्यंत्र साफ नज़र आ रहा है। वह ब्रह्माण समाज जोकि भारतवर्ष की देवकालीन पूूूज्य कौम रही है जिसका सम्मान भगवान श्रीराम और भगवान श्री कृष्ण सहित अनेक महापुरुषों ने किया तथा वेदों – पुराणों में जिनका यशगान गाया गया। श्री भागवत महापुराण जिसमेंं कथा है कि भगवान श्री हरि विष्णु जी ने वामन अवतार में तीन पग पृथ्वी से तीन लोक नाप लिये थे। हम यह बात गर्व से कह सकते हैंं कि वामन गरीब हो तो कथा आदि करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर लेता है पर अलीगढ़ के ट्विंकल बिटिया से हैवानियत के दोषी जाहिद और असलम की तरह पांच-दस हजार में पैसे की भूख से किसी के साथ हैवानियत कभी नहीं कर सकता।

उसी सर्वपूजनीय वामन समुदाय को अपमानित करती अभी पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्म आर्टिकल – 15 के ट्रेलर में बदायूं की घटना को फिल्माया गया है कि आर्टिकल 15 सबके साथ समान भाव रखता है। जिसमें एक गांव की दो युवा लड़कियों का बेरहमी से दुष्कर्म और हत्या करते हुए दिखाया गया है, उनके शव एक पेड़ से लटके हुए हैं। यह दिखाता है कि लड़कियों के परिवार जो हाशिए पर हैं और जिन्हें मजदूरों के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने दैनिक वेतन में 3 रुपये की बढ़ोतरी की मांग की थी। जिस कारण उन बेटियों की हत्या हुई बिल्कुल ऐसे गम्भीर विषय पर आप फिल्म बनाओ और समानता का अधिकार भी बताओ पर गलत तथ्यों के साथ नहीं।

यहां फिल्म में दर्शाया गया है कि यूपी में जातिगत समीकरण कितना प्रबल है। ट्रेलर में यह भी उल्लेख किया गया है कि अपराध एक ‘महंतजी के लड़के’ द्वारा किया गया है। महंतजी को ब्राह्मण समुदाय के प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है और इससे ब्राह्मण समाज में भयंकर रोष है क्योंकि यह फिल्म ब्राह्मणों के सम्मान पर बड़ा कुठाराघात है जोकि उन्होंने किया ही नहीं।

फिल्म में आयुष्मान खुराना इस मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं जो एक ब्राह्मण है। बता दें कि बदायूं दुष्कर्म और हत्या का मामला सन् 2014 में हुआ था और रिपोर्ट में आरोपियों के नाम क्रमशः पप्पू यादव, अवधेश यादव, उर्वेश यादव, छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव थे। छत्रपाल और सर्वेश पुलिसकर्मी थे। पुलिस विभाग पर आरोप लगाया गया था कि वह इस मामले में आरोपियों के प्रति तथाकथित राजनैतिक पार्टी के राजनीतिक दबाव के कारण सुस्ती दिखा रहे थे ।

अब बड़ा सवाल यह है कि अगर फिल्म बदायूं की घटना पर आधारित है, तो आरोपियों को ब्राह्मणों के तौर पर दिखाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और अगर फिल्म बदायूं घटना पर नहीं है तो निर्देशक चुुप क्यों हैं? क्या वह बेटियों का रेप दिखाकर पैसा कमाना चाहतेे हैं याा एक जाति विशेष पर आरोप लगाकर फिल्म की पब्लिसिटी करवाना चाहते हैं अगर बदायूंं घटनाा ही दिखानी थी तो झूठ क्यों परोसा जा रहा? और अगर उस बच्ची से इतनी हमदर्दी हैै तो फिल्म की टीम इस फिल्म की पूरी कमाई उस पीड़ित परिवार को देने की घोषणा क्यों नहीं कर रही? तथा एक बड़ी रकम बतौर मदद उस परिवार को क्यों नहीं देने की घोषणा कर देती? या अब फिल्म वालों को भी टारगेट मूवी बनाकर राजनीति करनी हैै।

दोस्तों ! निर्देशक की चुप्पी सहित इन सब कारणों से तो यह साफ स्पष्ट है कि निर्देशक व पटकथा लेखक सहित फिल्म की पूरी टीम का हाथ आखिर! किस षड्यंत्रकारी के साथ है जो इस तरह की निरर्थक फेक फिल्मों के बल पर हिन्दू समाज की अखंडता और एकता को खंड-खंड करने की साजिश रच रहे हैं। तो, क्यों ना हम लोग मिलकर फिल्म स्वरूप ऐसे षड्यंत्रकारी मंसूबों को ध्वस्त करें और ऐसी फेक फिल्मों का पुरजोर बहिष्कार करें।

15 thoughts on “समीक्षा : फिल्म ‘आर्टिकल – 15’ का हो बहिष्कार – ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना

  1. I really love your site.. Very nice colors & theme.
    Did you create this website yourself? Please reply back as I’m planning
    to create my own personal blog and would love to find out where you
    got this from or just what the theme is named. Many thanks!
    I will right away take hold of your rss as I can not to
    find your email subscription hyperlink or e-newsletter service.
    Do you have any? Kindly permit me realize so that I could subscribe.
    Thanks. I am sure this article has touched all the internet
    viewers, its really really fastidious post on building up
    new webpage. http://Foxnews.net/

  2. I’ve been surfing online more than three
    hours these days, but I by no means found any attention-grabbing article like yours.
    It’s beautiful value enough for me. Personally, if all
    webmasters and bloggers made good content material as you did, the web shall be much more helpful
    than ever before. Ahaa, its fastidious dialogue
    on the topic of this post here at this weblog, I have read all that,
    so at this time me also commenting at this place. Hi, i read your blog occasionally and i own a similar one and i was just curious if
    you get a lot of spam comments? If so how do you reduce it,
    any plugin or anything you can suggest? I get so much lately it’s driving me crazy
    so any support is very much appreciated. http://Foxnews.org/

  3. Superb bog yoս һave here but I ᴡas wondering іf you knew of any discussion boards
    tһat cover the ѕame topics talked ɑbout һere? І’d гeally
    love to be a pаrt of groᥙр where Ӏ can get feed-Ƅack fгom other knowledgeable people tһat share the same interest.
    If yoս have any recommendations, ⲣlease ⅼet mе know.
    Appreciat іt!

  4. Attractive component of content. I just stumbled upon your blog
    and in accession capital to say that I acquire actually loved account your weblog posts.
    Anyway I’ll be subscribing for your augment or even I
    fulfillment you get admission to consistently rapidly.

  5. Nice post. І learn sometһing totally new aand challenging օn blogs І stumbleupon eѵery day.

    It wiⅼl aⅼѡays Ьe helpful to reaⅾ artices fгom ⲟther authors аnd use a
    lіttle sоmething frⲟm their web sites.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *