रिवाज़ों का दख़ल होगा – ✍️जसवीर सिंह “हलधर” 

ग़ज़ल (हिंदी)
सही इंसान चुनने में रिवाजों का दखल होगा ।
वहीं पर रात बीतेगी जहाँ पर अन्न जल होगा ।
भरोसा है नहीं जब एक पल का एक लम्हें का,
बड़ा मुश्किल यकीं होना कहाँ पर कौन कल होगा ।
वो पत्थर फेंकते तलवार से हमको डराते हैं ,
नहीं इस काम से उनका कभी जीवन सफल होगा ।
नहीं पहचान पाये वो लिखा है क्या हदीसों में ,
सभी लेखा हमारे कर्म का बिल्कुल अटल होगा ।
जहाँ कोई नहीं होगा वहाँ पर  आत्मा होगी ,
हमारी हर मुसीबत का हमारे पास हल होगा ।
सफाई पाक से पहले जरूरी हिन्द की हो अब ,
तभी भारत सफल होगा सही वादा अमल होगा ।
नहीं सँभले अभी तो लाल होगी ये धरा अपनी ,
पड़ोसी ताक में बैठा हमारे साथ छल होगा ।
रखें सब हिन्द से नीचे दलीलें जाति मज़हब की ,
यही प्रश्नों का हल  होगा तभी “हलधर” सबल होगा ।
       (२)  इस मुल्क में – ग़ज़ल (हिंदी)
मज़हबी  घातक  बहुत बीमारियाँ इस मुल्क में ।
आदमीयत चीरती कुछ आरियाँ इस मुल्क में ।
धर्म आधारित बनी कुछ क्यारियाँ इस मुल्क में ।
द्वेष धृणा की उगी तरकारियाँ इस मुल्क में ।
सिर्फ बातें  एकता की हैं  दिखावे के लिए ,
देख लो  गृह युद्ध सी तैयारियाँ इस मुल्क में ।
भीड़ पर गोली चलाना आम बातें हो रही ,
हर गली हर मोड़ पर मक्कारियाँ इस मुल्क में ।
माल खाना भारती का गीत गाने गैर के  ,
कुछ पड़ौसी घाट की पनिहारियाँ इस मुल्क में ।
राष्ट्र यदि निरपेक्ष है तो पर्सनल लॉ बोर्ड क्यों ,
हिंदुओं के साथ यह अय्यारियाँ इस  मुल्क में ।
हाल यदि ऐसा रहा तो देश फिर बट जायगा ,
कुछ जमातें कर रहीं गद्दारियाँ इस मुल्क में ।
रोग का उपचार करना काम है सरकार का ,
क्या कहें कानून की लाचारियाँ इस मुल्क में ।
नाम “हलधर” का रहेगा बाग़ियों की सूचि में ,
सत्य कहने में बहुत दुस्वारियाँ इस मुल्क में ।

Sach ki Dastak

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