“सबके अपने राम”✍️विकास द्विवेदी

“सबके अपने राम”
श्रंखला: चलो बातें करते हैं!
पढ़िए और बताइए इनमें से आपके राम कौन से हैं?
भारत एक आध्यात्मिक देश है, जिसकी अपनी अलग ही संस्कृति है। इसके इतिहास में अनेकों ऐसे चरित्र हैं, जिन्होंने मानव को हमेशा मानवता का संदेश दिया है। और उन्हीं में से एक प्रमुख चरित्र है, दशरथनंदन प्रभु “श्री राम” का ।यदि आप आस्तिक हैं तो आपको यह लेख व्यवाहरिक दृष्टकोण से पढ़ने की आवश्यकता है ,और यदि आप नास्तिक है तो आपको इसे एक ऐसे नायक की महागाथा के रूप में पढ़ना चाहिए, जो सामाजिक रीति-नीति, आबंधों,मर्यादा, त्याग समर्पण,अधिकार सहित देश काल और परिस्थितियों के अनुरूप हमारे कर्तव्यों का बोध हमें कराते हैं ।दोनों पक्षों के लिए इसमें बहुत कुछ है, किंतु यह आपके विवेक पर निर्भर करता है कि इसमें से आप क्या लेना चाहते हैं? तो आइए शुरू करते हैं…. 
“राम” एक ऐसा शब्द जो स्वयं में संपूर्णता का द्योतक है। इस महागाथा मे राम कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारों का एक जीवंत समूह है। जो जीवन के प्रति कर्तव्य का संदेश देते हैं, सोचिए राम…. प्रभु श्री राम कब हुए! यह प्रश्न जटिल है, जिसको लेकर तमाम सवाल मन में उठते हैं। यहां मैं आपको बता दूं कि “निर्वासित होने के बाद”…. जी हां राम होने के लिए निर्वासित होना ही होगा, अौर जाना होगा… उस सब वन पथ पर जहां समय आपके पौरुष की परीक्षा के लिए आतुर खड़ा है । ये वन रुपी पथ प्रतीक है जीवन की विभिन्न व्याधियों का… जिन्हे स्वयं को सिद्ध करने के लिये स्वीकारना ही होगा। इसलिए मैं यहाँ निसंकोच होकर लिख रहा हूं। कि राम होने के लिए निर्वासित होना जरूरी है, क्योंकि राम ही निर्वासन स्वीकार कर सकते हैं।
इस ग्रंथ में प्रभु “श्रीराम” के विभिन्न चरित्रों का वर्णन किया गया है…. वास्तविकता में यह विभिन्न चरित्र हमें विकल्प देते हैं, कि हमें कैसा राम चाहिए? इनमें से कौन हमारा राम होगा? जिस के पदचिन्हों पर चलते हुए हमें इस राम नाम रुपी विचार को जीवंत बनाना है अौर आगेे जाना है। रामायण एवं रामचरितमानस को केवल धर्मग्रंथ मान लेना बड़ी चूक होगी, यह इससे भी कहीं अधिक परिपेक्ष्य में समाज के विभिन्न पक्षों,व्यावहारिकता और व्यक्तित्व की सटीक व्याख्या करते हैं। आप देखिए… कि राम एक कहाँ हैं? अलग-अलग परिस्थिति में राम नाम रूपी एक नए विचार का प्राकट्य इस पूरी यात्रा में होता है ।क्या राम सिर्फ दशरथ पुत्र हैं या फिर राम सिर्फ रावण के शत्रु!…. तो मेरा उत्तर है नहीं,  राम को समझने के लिए राममय होना होगा, समर्पण करना होगा,शून्य हो जाना होगा, यहां बुद्धि और तर्क का कोई स्थान नहीं है। क्योंकि बुद्धि से व्यापार होता है प्रेम नही… प्रेम तो समर्पण से आयेगा। राम धर्म का आधार है इसलिए सभी धर्म की व्याख्या से बहुत ऊपर हैं। राम के कारण धर्म है …. ना कि धर्म के कारण राम! “राम” अपने आप में मानवता की समूची व्याख्या है।मैं आपको बाध्य नहीं कर रहा कि जो राम मेरे आदर्श हैं, आप भी उनका अनुसरण करें। बल्कि यहां बहुत कुछ सरल है विकल्प खुले हुए हैं… जिस राम में आपको अपना आदर्श मिले, आप उसे चुन लीजिए।
सबके अपने अपने राम हैं…. एक राम दशरथ के है,अौर एक राम कौशल्या के… लेकि‌न दोनो मे विभेद है। कैकई ने जो किया उसके बाद क्या…राम कैकई के नहीं है? नहीं, राम उनके भी हैं!याद करके देखिए जो राम भरत के हैं वह लक्ष्मण के नहीं ,और जो लक्ष्मण के हैं वह शत्रुघ्न के नहीं, जो राम सुग्रीव के है वो वीर हनुमान के नही। दोनों के राम में परस्पर विभेद है, वर्षों से अनवरत तपस्या और आराधना में लीन शबरी और अहिल्या के राम भी भिन्न है। अहिल्या के राम वो है जो जड़ को चेतन बना दे ….और शबरी के राम वो है जो प्रतीक्षा अौर तपस्या करना सिखा दें! निषादराज के राम समरसता का संदेश देते हैं…. और विभीषण के राम संकट हर लेते हैं। “रावण” जैसा चरित्र… जिसके बिना यह महागाथा संपन्न नहीं होती। राम उनके भी है क्योंकि बिना रावण के राम कैसे हुआ जा सकता है। और इन सबसे अलग एक राम सीता के हैं….जिसमें यह समस्त सच्चरित्र समाए हुए हैं। तो समझ लीजिये जो राम का नही है राम उनके भी हैं…राम इतने सरल है कि वहाँ प्रतिरोध की कोई गुंजाईश ही नही बचती। राम एक सरस अौर निर्मल बहती हुई जल धारा के समान हैं…. जो पशु-पक्षी वनस्पति, मनुष्य से लेकर आत्माविहीन हो चुके एक शव में भी विभेद नही करती। राम के अनुसार व्यक्ति मे विभेद हो सकता है, किंतु राम में विभेद होना असंभव है ।
तो समझे आप …राम किसके हैं? इसका सिर्फ एक ही उत्तर हो सकता है। कि राम सबके हैं, जो राम का नही है राम उनके भी हैं। क्योंकि सबके अपने राम हैं।राम आज्ञाकारी पुत्र है ,राम आदर्श पति है ,राम संकट हरने वाले मित्र हैं, राम प्रेमी है, राम तपस्वी है, राम ज्ञानी है, राम बुद्धि और विवेक का आधार है, राम समर्पित शिष्य हैं, राम प्रजा के लिए राजा है, राम शत्रु को परास्त करने वाले अजेय योद्धा हैं…. यानी कि राम जीवन के सभी पक्षों में उच्च आयाम प्रतिस्थापित करने वाले मापदंडों के मानक हैं।
इसलिए राम को जीवन में उतारिये…. राम को व्यवहारिक रूप में जानिए! राम कोई याद रखने वाली युक्ति नहीं है…. बल्कि समर्पण करने पर आपकी आत्मा का अंश हो जाने वाली दिव्य ज्योति हैं। मैंने शुरू में ही कहा था कि अगर आप आस्तिक हैं तो इस लेख को पढ़ते समय अपना दृष्टिकोण व्यावहारिक रखें…  और यदि आप नास्तिक हैं, तो कौन सा मैं आपको पूजा करने के लिए बाध्य कर रहा हूं! इनमें से जो राम आप की विचारधारा,आदर्श अौर सिद्धांतों को संजीवनी प्रदान करते हों, उनसे जो लेना हो ले लीजिए। यदि इतने चरित्रों मे से भी कोई आपके लिए नहीं है तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आगे बढ़ जाईये… अपनी तलाश जारी रखिये… हो सकता है आपको अन्य सभी से बेहतर “राम” मिल जायें। 
रामनवमी के इस पावन पर्व पर शुभकामनाओं सहित।
✍️विकास द्विवेदी
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