भगत सिंह स्वतंत्रता के लिए फांसी पर चढ़ गए, दूसरी तरफ लोकतंत्र को रात के अंधेरे में फांसी पर चढ़ा दिया गया: शिवसेना

मुंबई। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को चुपचाप शपथ ग्रहण कराने को लेकर शिवसेना ने राज्यपाल पर मंगलवार को हमला बोला। पार्टी ने कहा कि जहां एक भगत सिंह स्वतंत्रता के लिए फांसी पर चढ़ गए वहीं दूसरे ने रात के अंधेरे में लोकतंत्र को “फांसी पर लटका दिया।” शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में पूछा कि “162 विधायकों” की यहां एक होटल में संयुक्त परेड कराने के बाद शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की तरफ से सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए सौंपे जाने वाले पत्र पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का क्या रुख होगा।

महाराष्ट्र में शक्ति परीक्षण के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले संख्या बल प्रदर्शित करते हुए शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन ने सोमवार को एक आलीशान होटल में ‘162 विधायकों’ की परेड कराई। यह परेड यह दिखाने के लिए की गई कि 288 सदस्यीय सदन में उसके पास बहुमत हासिल है। सरकार बनाने के लिए 145 का आंकड़ा चाहिए। 

शिवसेना ने पूछा, “जब हमने साफ संकेत दे दिया कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन के पास 162 विधायकों का समर्थन है तो राज्यपाल द्वारा पिछले हफ्ते देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए बुलाने का क्या आधार था?’’ मराठी पत्र में कहा गया, “हम एक भगत सिंह को जानते हैं जो देश की आजादी के लिए फांसी के तख्ते पर चढ़ गए, लेकिन इस दूसरे भगत सिंह ने लोकतंत्र एवं आजादी को मुहर (उनके हस्ताक्षर) के जरिए आधी रात को सूली पर टांग दिया।’’ पार्टी ने राकांपा नेता एवं उप मुख्यमंत्री अजित पवार पर भी निशाना साधा जिन्होंने पिछले हफ्ते अपनी पार्टी के खिलाफ बगावत करते हुए राज्य में सरकार बनाने के लिए भाजपा का समर्थन किया।

शिवसेना ने जिक्र किया कि राकांपा प्रमुख शरद पवार ने दो बार कांग्रेस को छोड़ा और अपनी खुद की एक अलग पार्टी चलाई और 50 वर्ष से ज्यादा राजनीति में सक्रिय रहे।  उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने कहा, “अजित पवार को कागजात चुराने और राकांपा विधायकों के समर्थन का झूठा दावा करने की बजाए कुछ ऐसा ही करना चाहिए था।” पार्टी ने आरोप लगाया कि जिस क्षण भाजपा ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच के नाम पर अजित पवार को “ब्लैकमेल” किया, उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की राजनीतिक धरोहर को तोड़ने का प्रयास किया।  संपादकीय में कहा गया, “उन्होंने राकांपा विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा करने के लिए पुराने पत्र का इस्तेमाल किया।”

इसमें कहा गया, “अजित पवार ने खुद कई मौकों पर कहा है कि वह झूठ नहीं बोलते। वही पवार अब हर दिन झूठ बोल रहे हैं और अपनी पार्टी के विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा करने के लिए उन्होंने राज्यपाल को फर्जी पत्र सौंपा।”

मराठी दैनिक में कहा गया कि जिस किसी के पास बहुमत हासिल हो वह सरकार बना सकता है लेकिन यह संविधान एवं स्थापित नियमों को पूरी तरह “ध्वस्त” कर के नहीं किया जाना चाहिए नहीं तो लोगों को ऐसी संस्थाओं में भरोसा नहीं रह जाएगा। शिवसेना ने भरोसा जताया कि चुनाव के बाद बना उद्धव ठाकरे नीत पार्टी, राकांपा और कांग्रेस के बीच बने गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ सदन में अपना बहुमत साबित करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *