लघुकथा : सलाखें __नीना सिन्हा/पटना

“क्या हुआ है, अनीश? दफ्तर से लौटने के बाद से बड़ा उद्विग्न नजर आ रहा है! लेटता है, उठ बैठता है, बाइक स्टार्ट करता है, पर कहीं जाता भी नहीं है! चक्कर क्या है, बेटा?”

“क्या बताऊँ माँ! मैं स्वयं ही समझ नहीं पा रहा हूँ कि मेरा वहम है या सचमुच उस लड़की के साथ…?”

“किसके साथ? पहेलियांँ बुझाना बंद कर! साफ-साफ बता!”

“माँ! मेरी नई नौकरी में दफ्तर पहुँचने के लिए समय बचाने की जुगत में मेरा एक सुनसान इलाके से गुजरना सर दर्द बन गया है। वहाँ दूर-दूर पर बने हुए गिने-चुने घर ही हैं। पड़ोसियों ने बताया था कि उधर दो नंबरी लोगों का अड्डा है।”

“अब बताएगा भी क्या हुआ है? फटे में टाँग मत अड़ाना! बस्ती में अच्छे लोग नहीं रहते, तूने ही कहा है।”

“रास्ते में एक नितांत निर्जन सा मकान है, बंद पड़ा रहता है। पर रौशनदान की सलाखों के पीछे से एक लड़की बड़े ही करूण स्वर में आने जाने वाले राहगीरों से मदद माँगा करती है, ‘मेरी मदद करो! मुझे बाहर निकालो!’ मैंने पास के मकान से पूछा तो पता चला कि वह किसी अधेड़ की युवा पागल बीवी है। पति काम पर जाते समय उसे बंद कर के चला जाता है। ‘यह उसका बाद उसका रोज का प्रलाप है। तुम काम से काम रखो’, सलाह मिली।

मैंने उधर देखना ही बंद कर दिया। पर आज जब दफ्तर से आ रहा था तो मैंने उस लड़की की मर्मांतक चीखें सुनीं, शायद उसका पति उसे पीट रहा था। मैं आगे तो बढ़ गया, पर मेरा मन जाने किन दुश्चिंताओं से घिरा हुआ है।”

“वह लड़की पागल है या नहीं, फैसला करने वाले हम कौन होते हैं? तुझे कुछ संदिग्ध लगा था तो फैंटम बनने की जगह पुलिस को बताना था, चाहे तो अपनी पहचान छुपा लेता। कल को पता चला कि उस लड़की के साथ कुछ अनहोनी हुई है तो खुद को माफ कर पाएगा?”

“ठीक कहा माँ! बताना चाहिए था। लड़की मुसीबत में हो या मानसिक रोगी,कदाचित कुछ भला ही हो जाए।”

“इससे पहले कि देर हो जाए, मैं फोन कर देती हूँ। मुझे ढंग से पता बता”, मालती देवी फोन लगाने लगीं।

_नीना सिन्हा/पटना

ई-मेल-maurya.swadeshi@gmail.com

संक्षिप्त परिचय–

पटना साइंस कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से जंतु विज्ञान में स्नातकोत्तर।

पिछले डेढ़ वर्षों से देश के समाचार पत्रों एवं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लघुकथायें अनवरत प्रकाशित, जैसे वीणा, कथाबिंब, डिप्रेस्ड एक्सप्रेस, आलोक पर्व, प्रखर गूँज साहित्यनामा, मधुरिमा, रूपायन, साहित्यिक पुनर्नवा भोपाल, पंजाब केसरी, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि रोहतक, दैनिक भास्कर सतना, दैनिक जनवाणी- मेरठ इत्यादि।

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