5 सीटों का नुकसान, सिसोदिया 13वें राउंड के बाद जीते, कहा- दिल्ली ने काम करने वालों को चुना

आप 62 सीटों पर आगे चल रही है, यानी पिछली बार से 5 कम; भाजपा 8 सीटों पर आगे यानी पिछली बार से 5 ज्यादा

  • दिल्ली में भाजपा 22 साल और कांग्रेस 7 साल से सत्ता से दूर, केजरीवाल की आप की तीसरी बार सरकार बनना तय

नई दिल्ली. 

दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों में 62 सीटों पर बढ़त बनाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) को स्पष्ट बहुमत मिलना तय लग रहा है। हालांकि, उसे 5 सीटों का नुकसान हो रहा है। भाजपा 8 सीटों पर आगे है, यानी पिछली बार से 5 सीटों की बढ़त है। कांग्रेस का लगातार दूसरे चुनाव में खाता खुलता नजर नहीं आ रहा है। पटपड़गंज से उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया 12 राउंड की गिनती तक पीछे चले और 13वें राउंड में आगे हुए। उन्होंने अपनी जीत पर कहा कि भाजपा ने नफरत की राजनीति की, पर दिल्ली ने काम करने वालों को चुना।

  • 13 राउंड तक पीछे रहे मनीष सिसोदिया 13वें राउंड की गिनती के बाद आगे हुए। उन्होंने तीसरी बार एमएलए बनने पर खुशी जाहिर की।
  • राजेंद्र नगर से आम आदमी प्रत्याशी राघव चड्ढा और आतिशी मर्लेना कालकाजी से जीतीं।
  • अरविंद केजरीवाल दोपहर 3 बजे पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं और मीडिया को संबोधित करेंगे।
  • अरविंद केजरीवाल ने आप की बढ़त का जश्न पत्नी के बर्थडे के साथ मनाया। उनकी पत्नी सुनीता का आज जन्मदिन है। केजरीवाल ने उन्हें केक खिलाया।

चुनाव प्रचार में भाजपा आगे, पर आप का टीना फैक्टर भारी पड़ा-

14 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के बाद 23 दिनों के भीतर भाजपा के 100 नेता चुनाव प्रचार में उतारे। शाह-मोदी समेत 40 स्टार प्रचारकों ने प्रचार किया। 4500 नुक्कड़ सभाएं कीं। शाह तो अधिसूचना के भी 25 दिन पहले से प्रचार में जुटे थे। उधर, केजरीवाल ने 39 स्टार प्रचारक उतारे। 3 बड़े रोड शो और छोटी जनसभाएं कीं, पर वे भारी पड़ते दिख रहे हैं।
भाजपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के ही चेहरे पर लड़ा और उसे 303 सीटें मिलीं। आप ने इसी से सबक लिया। जिस तरह भाजपा ने प्रचारित किया था कि मोदी के सिवाय देश में कोई विकल्प नहीं है, उसी तरह आप ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह प्रचारित किया कि केजरीवाल के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। इसे टीना यानी देयर इज़ नो अल्टरनेटिव (TINA) फैक्टर कहते हैं। आप का प्रचार इसी पर केंद्रित रहा।

भाजपा ने 36 साल पुराना अनुच्छेद 370 हटाने का वादा पूरा किया, पर 4 में 3 चुनाव हारी
भाजपा ने पहला चुनाव 1984 में लड़ा था। तब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाने का वादा किया था। 5 साल बाद 1989 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और यूनिफॉर्म सिविल कोड भी भाजपा के मूल वादों की फेहरिस्त में जुड़ गया। दोनों ही वादे पूरे हो चुके हैं। लेकिन, इन्हें पूरा करने के बाद हुए चार में से तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा हार चुकी है। महाराष्ट्र में भाजपा सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने के बावजूद विपक्ष में बैठी। हरियाणा में जजपा की मदद से सरकार बनानी पड़ी। झारखंड में हार गई और दिल्ली भी।

2 साल में एनडीए ने 7 राज्यों में सत्ता गंवाई
भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए पिछले दो साल में सात राज्यों में सत्ता गंवा चुका है। दिल्ली समेत 12 राज्यों में अभी भी भाजपा विरोधी दलों की सरकारें हैं। एनडीए के पास 16 राज्यों में ही सरकार है। इन राज्यों में 42% आबादी रहती है।

ऐग्जिट पोल सत्य साबित

दिल्ली में जब भी वोटिंग कम होती है तो सरकार नहीं बदलती। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में 62.59% वोट डाले गए। यह पिछली बार के मुकाबले करीब 5% कम हैं। इस बार भी केजरीवाल की सरकार की वापसी तय है। 2003 में 53% और 2008 में 58% वोटिंग हुई थी। इन दोनों ही चुनावों में सरकार नहीं बदली थी। 2013 में दिल्ली के लोगों ने उस वक्त तक की सबसे ज्यादा 65.63% वोटिंग की थी। जब नतीजे आए, तो 15 साल से सत्तारूढ़ कांग्रेस की विदाई हो गई। 2015 के चुनाव में अब तक का सबसे ज्यादा 67.12% मतदान हुआ। 70 में से 67 सीटें आम आदमी पार्टी ने जीती थीं।
पोल ऑफ एग्जिट पोल्स: वोटिंग के बाद दिल्ली में एग्जिट पोल के अनुमान सामने आए। 7 एग्जिट पोल में आप को स्पष्ट बहुमत का अनुमान जाहिर किया गया। पोल ऑफ पोल्स में आप को 55, भाजपा को 14 और कांग्रेस को 01 सीटें दी गई थीं। पोल ऑफ पोल्स रुझानों के काफी करीब है।

 

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