आशा स्वाथ्य कार्यकत्री को नही मिल रहा कोरोना से बचने की आवश्यक सामाग्री

सच की दस्तक डेस्क चन्दौली
कोरोना महामारी जनपद में काफी तेजी से फैलती जा रही है और अभी कोरोना संक्रमित मनुष्यों की संख्या लगभग 500हो गई है। उसके बावजूद भी जिला प्रशासन कुंभकरण की नींद से जगा नहीं है। कोरोना की जांच कर रही आशा कार्यकर्ता बिना सुरक्षात्मक किट के घर-घर जाकर कोरोना चेक कर रही है। लेकिन एक भय उनके मन में हमेशा बना रहता है कि वो खुद ही कोरोना की चपेट में ना आ जाए। उनका डर भी वाजिब है। क्योंकि कुछ दिन पहले डीपीआरओ स्वयं ही कोरोना सक्रमित हो गए थे। उनके कारण लगभग 20ग्राम प्रधान भी कोरोना से संक्रमित हो गए थे। जानकारी होगी मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश के अनुसार प्रत्येक आशा कार्यकर्ती गांव गांव प्रत्येक घरों में जाकर थर्मल स्कैनिंग कर कोरोना की जांच कर रही हैं। सबसे बड़ी विडंबना है कि उनकी सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा कोई सुरक्षात्मक कीट उपलब्ध नहीं कराई गई है। सेनिटाइजर भी काफी कम संख्या में दिए जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है। उनके मुताबिक यदि कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति के पास जाता है तो उसके लिए पीपीई किट पहनना जरूरी होता है। बिना पीपीई किट जिलाधिकारी भी कोरोना संक्रमित अस्पतालों में या कोरोना संक्रमित मरीजों के पास नहीं जा सकते। इस संबंध में आशा कार्यकर्ती ने नाम न बताने के तर्ज पर बताया कि हम लोगों को जोखिम उठाना पड़ रहा है। हम लोग यह नहीं जानते कि कौन गांव में कोरोना संक्रमित है और कौन कोरोना संक्रमित नहीं। हमें प्रत्येक लोगों का थर्मल स्कैनिंग करना होता है। इसके अलावा कोरोना की जांच के लिए दी गई गाइड लाइन के अनुसार उनसे बातचीत करनी होती है। लेकिन हमारे पास न तो पीपीई किट मुहैया कराई जाती है न तो सैनिटाइजर उतनी मात्रा में दी जाती है। जितनी हमारी संख्या है। साथ ही हमें इतनी सैलरी भी नहीं दिया जाता जो मिलना चाहिए। यदि हम संक्रमित हो जाते हैं और हमें क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता है। तो उतना पैसा है नहीं कि हम अपने बच्चों का पेट पाल सकें। ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए बयान के आधार पर निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि जिला प्रशासन की तरफ से जो फ्रंटलाइन कोरोना वैरियर हैं उनकी अनदेखी की जा रही है।

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