बुलंद हौसले से बुढ़ापे में भी कोरोना की जीती जंग

सच की दस्तक डेस्क चंदौली

अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस हर साल 21 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के प्रति जागरूकता व उनको प्रभावित करने वाले सामाजिक मुद्दों और वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराना है। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य में गिरावट आने के बावजूद भी समाज व परिवार में दे रहे योगदान के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
वर्तमान परिस्थियों यानि कोविड-19 को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। सरकार द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि बुजुर्ग रेल यात्रा, बस यात्रा व अन्य यात्रा इस वक्त करने से बचें । वहीं अतिमहत्वपूर्ण कार्य के लिए ही घर से बाहर जाने की अनुमति है। भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जाने के लिए मना किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए नंबर 05412-260084, 260230 पर विशेषज्ञों से बातकर उचित परामर्श ले सकते हैं।
60 वर्ष या उससे ऊपर की आयु के बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बीमारी और संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है। इसके बावजूद वरिष्ठ नागरिक कोविड-19 को मात दे रहे हैं। यह बात बड़े ही आश्चर्यचकित करने वाली भी है कि युवाओं की तुलना में कम संख्या में वृद्धजन कोविड-19 की चपेट में आए और अगर आए भी हैं तो उन्होने कोरोना को मात दी है और पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर वापस गए हैं।
कोविड के नोडल अधिकारी डॉ डी के सिंह का कहना है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं कह सकते की कोविड-19 का ज्यादा असर सिर्फ बुजुर्गो पर ही पड़ा है। यह एक संक्रमण है और इससे कोई भी प्रभावित हो सकता है। इतना जरूर है कि शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता व आत्मबल मजबूत होने से कोरोना से लड़ने मे मदद मिलती है। लॉकडाउन से अनलॉक तक सभी स्वास्थ्य केन्द्रों व सरकारी चिकित्सालयों पर बुजुर्गों के लिए सलाह व हेल्पलाइन नंबर जारी किये गये। विश्वव्यापी महामारी के दौरान युवाओं से अधिक मजबूत मनोबल वृद्धजनों में देखा गया है जिसकी मुख्य वजह नियमित सुबह से उठना, थोड़ा बहुत व्यायाम करना, प्रतिदिन स्नान और साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना, समय से सोना और पूरी नींद लेना आदि है।
कैंसर पीड़ित बुजुर्ग ने दी कोरोना को मात
65 वर्षीय भगवान दास नगर पंचायत सय्यद राजा के निवासी हैं। वह सन 2017 से लीवर कैंसर के मरीज़ हैं। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में ऑपरेशन हुआ। 20 मई को मुंबई जाना था लेकिन लॉकडाउन की वजह से नहीं जा सके। सीटी स्कैन कराने होमी भाभा अस्पताल वाराणसी गए । 26 जुलाई को उन्हें महसूस हुआ कि हल्का बुखार व गले में जकड़न है। इस संदेह पर इन्हे बीएचयू में कोविड-19 जाँच के लिए रेफर किया गया। रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद बीएचयू में ही 17 दिनों के लिए उपचाराधीन रखा गया। वर्तमान में अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और कोविड को मात दे कर लोगों की मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान भी उन्होने पैदल जा रहे प्रवासियों की मदद की और उन्हें खाना वितरण भी किया। भगवान दास ने कहा कि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए आत्मशक्ति का मजबूत होना बहुत जरूरी है।
कोरोना से निजात मिलने पर मिली नई ज़िंदगी
शाहकुटी पं दीनदयाल उपाध्याय नगर चन्दौली की निवासी 66 वर्षीय रमावती देवी ने बताया कि उन्हें सांस की बीमारी पहले से थी, लेकिन दो जुलाई को अचानक खांसी तेजी से आने लगी। लगातार खांसी से गले में भी दिक्कत होने लगी तो डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने तुरंत कोरोना की जांच लिखकर जिला अस्पताल भेज दिया। सात जुलाई को रिपोर्ट पॉज़िटिव आई। इसके बाद उन्हें रेवसा स्थित अस्पताल में भर्ती किया गया जहां उनका 17 दिनों तक उपचार किया गया। समय से दवा दी गईं और निरन्तर जांच भी होती रही। 17 दिन बाद पुनः जांच के लिए सैंपल लिया गया और रिपोर्ट नेगेटिव आई तो लगा कि उनको एक नई ज़िंदगी मिली है। इसके बाद जीने की नई आशा जगी और अब किसी भी बीमारी से डर नहीं लगता। वह घर के सभी काम कर रही हैं और लोगों को बताती हैं कि कोरोना से डरें नहीं सिर्फ हिम्मत बना कर रखें तो कुछ नहीं होगा।

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