साऊदी प्रिंस ने कहा, ”हम भारत के साथ।”हुए कई करार-

नई दिल्ली,

सऊदी अरब के क्राऊन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर सहमति बनी। बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संबंधों में और भी प्रगाढ़ता आई है, सऊदी अरब भारत के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी में से है।

सऊदी अरब हमारे विस्तृत पड़ोस में है, एक करीबी दोस्त है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। वहीं साऊदी प्रिंस मोहम्‍मद बिना सलमान ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हम भारत के साथ खुफिया जानकारी बांटने समेत हर कदम पर सहयोग करेंगे।

साऊदी प्रिंस ने कहा, ‘आतंकवाद और कट्टरवाद पर हमारी साझा चिताएं हैं। हम अपने दोस्त भारत को बताना चाहते हैं कि हर मोर्चे पर हम सहयोग करेंगे। सबके साथ मिलकर हम आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए काम करेंगे।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर चर्चा हुई। पिछले हफ्ते पुलवामा में हुआ बर्बर आतंकवादी हमला, इस मानवता विरोधी खतरे से दुनिया पर छाए कहर की एक और क्रूर निशानी है। इस खतरे से प्रभावशाली ढंग से निपटने के लिए हम इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद को किसी भी प्रकार का समर्थन दे रहे देशों पर सभी संभव दबाव बढ़ाने की आवश्यकता है।

सऊदी अरब और भारत आतंकवादी, कट्टरवाद पर एक जैसा विचार रखते हैं। अतिवाद के खिलाफ सहयोग और इसके लिए एक मज़बूत कार्ययोजना की भी जरूरत है, ताकि हिंसा और आतंक की ताकतें हमारे युवाओं को गुमराह न कर सकें।

मुझे खुशी है कि सऊदी अरब और भारत इस बारे में साझा विचार रखते हैं। हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि काउंटर टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और मजबूत द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए लाभप्रद रहेंगे। पश्चिम एशिया और खाड़ी में शांति और स्थिरता सुनिचित करने में हमारे दोनों देशों के साझा हित हैं। आज हमारी बातचीत में, इस क्षेत्र में हमारे कार्यों में तालमेल लाने और हमारी भागीदारी को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति हुई है।’

पीएम मोदी ने बताया, ‘आज हमने द्विपक्षीय संबंधों के सभी विषयों ​​पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है। हमने अपने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का निश्चय किया है।

हमारे ऊर्जा संबंधों को स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप में तब्दील करने का समय आ गया है। दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व में सऊदी अरब की भागीदारी, हमारे ऊर्जा संबंधों को बायर-सेलर रिलेशन से बहुत आगे ले जाती है। भारत और सऊदी अरब के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध सदियों पुराने हैं। और यह सदैव सौहार्द्रपूर्ण और मैत्रीपूर्ण रहे हैं। हमारे लोगों के बीच के घनिष्ठ और निकट संपर्क हमारे देशों के लिए एक सजीव सेतु यानि living bridge है।’

इससे पहले राष्ट्रपति भवन में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के सम्‍मान में भव्‍य स्वागत समारोह हुआ। पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसमें मौजूद रहे। सऊदी प्रिंस ने इस दौरान कहा कि आज हमें यह पक्का करना है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते बने रहें और पहले से बेहतर हों।

पीएम और राष्ट्रपति के नेतृत्व में मुझे उम्मीद है कि हमलोग दोनों देशों के लिए कुछ अच्छा कर पाएंगे। सऊदी प्रिंस मंगलवार को देर रात नई दिल्ली पहुंचे और पीएम नरेंद्र मोदी ने हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी की।

भारत,साऊदी के बीच ये करार-

  • – भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा को लेकर करार हुआ है।
  • पर्यटन क्षेत्र में भारत-सऊदी अरब के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। 
  • भारत और सऊदी अरब के बीच व्‍यापार को और बढ़ावा देने के लिए करार हुए हैं। 
  • प्रसार भारती और सऊदी अरब के बीच प्रसारण साझा करने पर भी करार किया गया है।इंटरनेशनल सोलर अलायंस के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच करार हुए हैं।

प्रिंस सलमान सोमवार को पाकिस्तान में थे और वहां उनकी पीएम इमरान खान के साथ हुई वार्ता के बाद जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रावधानों का राजनीतिक इस्तेमाल किसी को नहीं करना चाहिए। यह सीधे तौर पर जैश-ए-मुहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध लगाने की चल रही कोशिशों की तरफ इशारा करता है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से खास आग्रह करने पर संयुक्त बयान में शामिल किया गया है।

मोदी और प्रिंस सलमान के बीच इस मुलाकात से भारत व सऊदी अरब के बीच मौजूदा ऊर्जा सहयोग की तस्वीर में भी भारी बदलाव आएगा। अभी दोनो देशों में खरीददार व विक्रेता का रिश्ता है। सउदी तेल व गैस बेचता है और भारत खरीदता है, लेकिन आने वाले दिनों में सऊदी भारत के ऊर्जा सेक्टर में एक बड़ा निवेशक भी बनने जा रहा है और भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उसका एक बड़ा साझेदार देश बनेगा। 

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