भूपेन हज़ारिका के बेटे ने पिता को भारत रत्न देने की मोदी सरकार की मंशा पर लगाया प्रश्नचिन्ह –

नई दिल्ली: लोकप्रिय गायक एवं संगीतकार भूपेन हज़ारिका के बेटे तेज हज़ारिका ने नागरिक संशोधन विधेयक के विरोध में पिता को मिलने वाले भारत रत्न को लेने से इनकार कर दिया है. तेज हज़ारिका का कहना है कि यह विधेयक वास्तव में उनके पिता की विचारधारा और  भावनाओं के खिलाफ है ।

एक न्यूजपेपर इंडियन एक्सप्रेस को भेजे गए ईमेल में अमेरिका में रह रहे तेज हज़ारिका ने कहा है, ‘भारत रत्न और बड़े-बड़े पुल जरूरी हैं लेकिन इनसे भारत के नागरिकों की शांति और समृद्धि को बढ़ावा नहीं मिलेगा, बल्कि ऐसे नियम-कानून जिन पर सबकी सहमति हो और दूरदर्शिता से देश के नागरिकों का भला होगा. मीडिया के लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं अपने पिता के लिए भारत रत्न स्वीकार करूंगा या नहीं.

मैं यहां कहना चाहता हूं कि एक तो मुझे अभी तक ऐसा कोई निमंत्रण नहीं मिला है तो नकारने का सवाल ही नहीं उठता. दूसरा, अब तक इस बारे में जो केंद्र का जो रवैया रहा है, वो किसी जाने-माने राष्ट्रीय सम्मान को देने-लेने के महत्व से ज़्यादा सस्ती और अल्पकालिक लोकप्रियता पाने का प्रदर्शन है.’

बता दें कि भूपेन हज़ारिका को इस साल पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख के साथ भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की गई. 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे पुल का नाम भी भूपेन हज़ारिका के नाम पर रखा, जो ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर बना है. यह पुल अरुणाचल प्रदेश के ढोला गांव से असम के सदिया गांव को जोड़ता है.

तेज हज़ारिका ने अपने बयान में कहा, ‘मेरा मानना है कि मेरे पिता के नाम का ऐसे समय में इस्तेमाल किया गया जब नागरिकता (संशोधन) विधेयक जैसे विवादित बिल को अलोकतांत्रिक तरीके से लाने की तैयारी की जा रही है. यह उनकी उस विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ है जिसका उन्होंने हमेशा समर्थन किया.’तेज हज़ारिका के बयान पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मीडिया सलाहकार ऋषिकेश गोस्वामी से ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘भूपेन हज़ारिका के परिवार ने भारत रत्न को तहे दिल से स्वीकार कर लिया है और सार्वजनिक तौर पर भी इसका स्वागत किया है. क्या तेज हज़ारिका यह साबित करना चाहते हैं कि उनके पिता भारत रत्न के काबिल नहीं हैं? वह अमेरिका में बैठकर क्यों इस बिल पर बयान दे रहे हैं?’नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने यह कहते हुए इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि वह हज़ारिका के परिवार की ओर से औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं.गौरतलब है कि आठ जनवरी को लोकसभा में पारित हुआ नागरिकता (संशोधन) विधेयक, बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिमों (हिंदू, ईसाई, पारसी, जैन, सिखों) को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करता है.असम सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध हो रहा है. इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में शरण लेने वाले गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागरिकता पाने के लिए 12 वर्ष भारत में रहने की अनिवार्यता की जगह छह साल में नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है.

इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाना अभी बाकी है.पूर्वोत्तर में कई संगठनों ने इस विधेयक का यह दावा करते हुए विरोध किया है कि वह क्षेत्र के मूलनिवासियों के अधिकारों को कमतर कर देगा.

मालूम हो कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुवाहाटी में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में काले झंडे दिखाए गए थे. असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. असम के विभिन्न शहरों में लोगों ने पुतले जलाने के साथ निर्वस्त्र होकर इसके विरोध में प्रदर्शन किया.

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