Exclusive: विवादों के बीच, आनंद शीला के बहाने OSHO को खोज रही दुनिया…

भारतीय दार्शनिक व आध्यात्मिक गुरु ओशो (भगवान रजनीश) की सबसे करीबी सहयोगी रहीं मां आनंद शीला उर्फ शीला अंबालाल पटेल एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा उन पर बनने जा रही फिल्म और ओशो व उनके बीच रही करीबी और विवादों को लेकर है। सातवें-आठवें दशक में ओशो के आध्यात्मिक साम्राज्य की ‘सर्वेसर्वा’ रहीं आनंद शीला के बहाने ही सही, ओशो का भूला-विसरा इतिहास भी एक बार फिर दुनियाभर में चर्चा में आ गया है।

हालांकि शीला और ओशो पर चर्चा बीते दिनों नेटफ्लिक्स सीरीज ‘वाइल्ड वाइल्ड कंट्री’ के बाद शुरू हो गई थी, लेकिन अब तो पूरी फिल्म बनने जा रही है। युवा पीढ़ी शीला के बहाने ओशो को भी ‘सर्च’ कर रही है। 23 दिसंबर को शीला के प्रियंका चोपड़ा को नोटिस भेजने की खबर आने के बाद चर्चा और तेज हो गई है, ‘सर्च’ और बढ़ गई है। शीला ने इंटरनेशनल मीडिया से कहा कि प्रियंका चोपड़ा को उन्होंने उक्त फिल्म में अपना किरदार निभाने की इजाजत नहीं दी है। बिना इजाजत लिए ऐसी घोषणा करने पर उन्होंने प्रियंका को कानूनी नोटिस भेज दिया है।

शीला ने यह भी कहा- प्रियंका में वो बात नहीं, जैसी मेरे व्यक्तित्व में थी। बेहतर होगा कि आलिया भट्ट यह रोल करें। दरअसल, प्रियंका चोपड़ा घोषणा कर चुकी हैं कि हॉलीवुड निर्माता-निर्देशक बैरी लेविंसन के साथ शीला पर फिल्म बनाएंगी। इधर, शीला के हालिया बयान से साफ हो गया है कि उन्होंने प्रियंका के साथ इसे लेकर करार किया है। कुछ हफ्ते पहले नेटफ्लिक्स पर भी आनंद शीला के जीवन पर आधारित एक और सीरीज का टीजर जारी किया गया है।

इसका निर्माण करण जौहर और शकुन बत्रा कर रहे हैं। सितंबर में आनंद शीला मुंबई आई थीं और करण जौहर के साथ दिखी थीं। करण जौहर ने उनका इंटरव्यू किया था। कहा जा रहा है कि इस सीरीज में भी आलिया भट्ट दिख सकती हैं। वडोदरा, गुजरात के साधारण पटेल परिवार में जन्मीं 69 वर्षीय आनंद शीला फिलहाल स्विटजरलैंड में रहती हैं और बुजुर्गो के लिए एनजीओ चलाती हैं।

इधर, ओशो कम्युनिटी के पुणे स्थित हेड क्वार्टर ‘ओशो इंटरनेशनल’ की प्रमुख मां अमृत साधना ने ‘दैनिक जागरण’ से कहा- ‘ओशो से जुड़ी ऐसी किसी भी सामग्री पर, जो कॉपीराइट के अधीन हो, हमारा सर्वाधिकार सुरक्षित है। हमसे फिलहाल किसी निर्माता-निर्देशक ने संपर्क नहीं किया है। आपके माध्यम से मैं सभी को यह स्पष्ट कर देना चाहूंगी कि यदि कोई इसका उल्लंघन करेगा, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का विकल्प हमारे पास सुरक्षित है, जिसका उपयोग हम अवश्य करेंगे।

इससे पहले फिल्म निर्माता सुभाष घई और कमलेश पांडे ने ओशो पर फिल्म बनाने का प्रयास किया था, जिसे हमने इजाजत नहीं दी..।’ इस सवाल पर कि फिल्म भले ही शीला के विवादित जीवन-चरित्र पर आधारित हो, लेकिन कथानक में ओशो न हों, ऐसा मुमकिन नहीं? अमृत साधना ने कहा, यह फिल्म और डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं को सोचना होगा, कॉपीराइट का उल्लंघन होगा तो हम कानूनी कार्रवाई करेंगे..।

जितने विवाद दुनिया ने दिया, स्वीकार्यता उतनी बढ़ी..

 

ओशो-शीला के बीच का विवाद और तीखे आरोप-प्रत्यारोप भी फिल्म में होंगे बल्कि फिल्म ही इस पर टिकी होगी, ओशो की छवि को शीला के दृष्टिकोण दिखाया जाएगा? इस पर ओशो इंटरनेशनल की कार्यकारी ने कहा- हम हर बात को परखेंगे।

हालांकि हमें ओशो की छवि को लेकर कोई चिंता नहीं है, क्योंकि ओशो इन सब बातों से परे एक समृद्ध दर्शन हैं, जो सत्य पर आधारित है। ओशो को दुनिया ने जितने विवाद दिए, ओशो की स्वीकार्यता उतनी ही बढ़ी। अब भी ऐसा ही होगा..।

‘तेजाब’, ‘सौदागर’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी अनेक सुपरहिट फिल्में

‘तेजाब’, ‘सौदागर’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी अनेक सुपरहिट फिल्में लिखने वाले वरिष्ठ स्क्रीनराइटर कमलेश पांडे ने ‘दैनिक जागरण’ से कहा- हां, यह सच है कि मैं और सुभाष घई ओशो पर फिल्म बनाने की घोषणा कर चुके थे, लेकिन हमें ओशो इंटरनेशनल ने कॉपीराइट के तहत इसकी इजाजत नहीं दी, लिहाजा हमें प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा..।

कमलेश ने बताया कि वह 1965 से ओशो के संपर्क में थे और उनके करीबी शिष्य भी रहे हैं। वह ओरेगॉन, अमेरिका स्थित रजनीशपुरम में भी ओशो के साथ रहे थे, जहां की सर्वेसर्वा आनंद शीला थीं। कमलेश ने कहा- शीला वाकई दुस्साहसी लड़की थी। वह एक कुशल और तेजतर्रार प्रबंधक थी।

उनकी इसी खूबी के ओशो मुरीद थे और वडोदरा से पहुंची एक साधारण होटल परिचारिका को उन्होंने अपने वैश्विक आध्यात्मिक साम्राज्य की ‘साम्राज्ञी’ बना दिया था। ओशो के तेजस्वी और क्रांतिकारी विचारों ने न केवल अमेरिका जैसे देशों, बल्कि धर्म की ठेकेदारी करने वालों को थर्रा डाला था। आनंद शीला इन तमाम विरोधों का व्यावहारिक मोर्चे पर बखूब सामना कर रही थीं। यह हर किसी के बूते की बात नहीं थी..।

‘ओशो व‌र्ल्ड’ मैगजीन के संपादक और ओशो के करीबी शिष्य रहे स्वामी चैतन्य कीर्ति ने बताया- दरअसल, शीला का ओशो के प्रति हद से अधिक अधिकार जताना, किसी अन्य के ओशो केकरीब आने पर विचलित हो जाना, उस विद्रोह की वजह हो सकता है। हालांकि पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन शीला की किताब- ‘डू नॉट किल हिम’ को पढ़कर इस बात का पता लगता है।

ओशो के निजी चिकित्सक डॉ. अमृतो, जो अब पुणे आश्रम में हैं, उन दिनों ओशो के विश्वस्त हो चले थे। शीला अब कह रही हैं कि उन्हें अमृतो पर संदेह था कि दवाओं का अधिक डोज देकर ओशो को मार देना चाहते थे। अंतत: शीला ने अमृतो को जहर देकर मारना चाहा। अमृतो बच गए।

शीला पर हत्या की कोशिश का आरोप साबित हुआ और उन्हें साढ़े तीन साल की कैद हुई। इसके बाद वह विद्रोही हो गईं। फिर उन्होंने ओशो के खिलाफ अनेक आरोप लगाए। ओशो ने सभी का जवाब दिया। बाद में यह भी कहा गया कि शीला केवल अमृतो को ही नहीं, ओशो के अन्य सहयोगियों को भी जहर देकर मारने का प्रयास कर रही थीं। अब वह सफाई दे रही हैं..।

 

 

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