फिर अधूरी प्रेम कहानी ✍️आशुतोष मिश्र तीरथ

क्या करूं हे प्रभु रास्ता दिखाओ..
रात के एक बज रहे थे। सहयोग इधर से उधर करवट लेते हुए बस सोचे जा रहा था।

….. नींद दूर – दूर तक आज उसकी आंखो में न थी।जब से श्रेया ने उसे बताया है कि आप मुझे बहुत याद आते हो।क्या आप अपना नम्बर मुझे दे सकते हो?

       सहयोग भी श्रेया को चाहता है। दोनों साथ में पढ़ते हैं। एक ही जाति के हैं।लेकिन बार बार सहयोग के दिमाग में एक ही बार आ रही थी, क्या श्रेया से बात करूं श्रेया मुझे पसंद भी है।

         मैं उससे कह नही पाया, उसने भी कुछ साफ नहीं कहा।मोबाइल से बात करते वक्त पता नहीं क्या मुंह से निकल जाए, कहीं ऐसा न हो कि मैं एक अच्छा मित्र खो दूं।

……. कहीं वह मेरी बात का बुरा मानकर मेरी बेइज्जती न करे और यह बात यदि घर तक पहुंच गई तो, उसने अपने भाई से बता दिया तो!  मेरी समाज में इज्जत डाउन हो जाएगी।

      पहले ही मैं एक प्यार को खो चुका हूँ  अब और नहीं। लेकिन मैं उसे नम्बर न देने की क्या वजह बताऊंगा!

लेखक

– आशुतोष मिश्र तीरथ
    गोण्डा
कापीराइट एक्ट के अंतर्गत

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