अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया भारत से अलग – डॉ. जसबीर सिंह, यूएसए

__प्रो. डॉ जसबीर सिंह, मेम्बर ऑफ प्रैसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप  एडवाइजरी बोर्ड अमेरिका 
दुनिया युद्ध, वैश्विक महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों से कैसे निपटती है, इसमें अमरीका के राष्ट्रपति की बड़ी भूमिका है। इसलिए जब भी हर चार साल के बाद अमरीका में राष्ट्रपति का चुनाव आता है तो दुनिया भर की निगाहें उस पर टिकी होती हैं।ट्रंप ने रविवार को एक चुनावी रैली में कहा कि अमेरिका अपने आर्थिक पुनरुद्धार की राह पर था और अच्छा कर रहा था, लेकिन फिर चीन से आए एक वायरस की चपेट में आ गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के इतिहास में हमारी अर्थव्यवस्था सबसे बेहतर स्थिति में थी और फिर हम चीन के प्लेग की चपेट में आ गए, जिसे हम कभी नहीं भूलेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं बताना चाहूंगा कि हमने 20 लाख लोगों की जिंदगियां बचाई, लेकिन जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। हम कभी नहीं भूल सकते कि चीन ने हमारे साथ क्या किया, हम कभी नहीं भूल सकते। चीन के शहर वुहान में पिछले साल दिसम्बर में कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ था। ट्रंप लगातार बीजिंग पर इसकी जानकारी छुपाने और इसे फैलने से रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते रहे हैं। दुनिया में इससे सबसे अधिक अमेरिका ही प्रभावित हुआ है। इससे यहां 90 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 2,31,000 से अधिक लोगों की इससे मौत हो चुकी है।
ट्रंप ने डाक के जरिए होने वाले मतदान में व्यापक फर्जीवाड़े की आशंका को लेकर अपनी चिंता जताते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि इससे एक बड़ा खतरा है।इससे बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हो सकता है और इन मतपत्रों का दुरुपयोग हो सकता है। यह खतरनाक बात है कि हम कंप्यूटर के आधुनिक जमाने में भी चुनाव वाली रात ही परिणाम नहीं जान सकते.’। वहीं चुनाव में अपने प्रदर्शन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह चुनाव में बेहतर कर रहे हैं। उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने कहा कि हम बहुत अच्छा कर रहे हैं। फ्लोरिडा में बहुत अच्छा प्रदर्शन है।
अमेरिकी चुनाव में पहली बार भारतीय मूल के वोटर बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। 16 राज्यों में इनकी संख्या कुल अमेरिकी आबादी के एक प्रतिशत से ज्यादा है लेकिन खास बात ये है कि 13 लाख भारतीय उन 8 राज्यों में रहते हैं जहां कांटे का मुकाबला है. ऐसे में किसी भी पार्टी के लिए एक-एक वोट कीमती हो जाता है। अमेरिका में 24 करोड़ मतदाता हैं। बीते 28 अक्टूबर तक 7.5 करोड़ से अधिक वोट डाले जा चुके हैं। चुनावी जानकारों के मुताबिक पिछली बार की तरह इस बार भी साइलेंट वोटर ही किंगमेकर होंगे। 
सबसे पहले तो यहां चुनाव में वोटरों को कोई परेशानी नहीं होती वह मोबाइल फोन से, डाकखाने जाकर आराम से वोट डाल सकते हैं।परन्तु इस बार यहां वोटिंग के लिए दो विकल्प हैं, एक तो मेल या फिर अर्ली वोटिंग दूसरा मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालना।  शायद किसी को पता हो कि यहां अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के पीछे ‘270’ का गजब का स्टैंडर्ड फार्मूला है? यह निर्वाचक मंडल के रूप में तय करता है कि अगले चार साल तक व्हाइट हाउस में कौन बैठेगा? निर्वाचक मंडल के महत्व पर जाएं तो इसके महत्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन को लगभग 29 लाख अधिक मत मिले थे, लेकिन फिर भी वह चुनाव हार गई थीं। इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप विजयी रहे थे क्योंकि अमेरिकी संविधान की निर्वाचक मंडल रूपी व्यवस्था के आंकड़ों में उन्हें सफलता मिली थी। इस जादुई संख्या रूपी व्यवस्था में अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचक मंडल के कम से कम 270 मतों की आवश्यकता होती है। यह देश के 50 राज्यों के 538 सदस्यीय निर्वाचक मंडल में बहुमत का करिश्माई आंकड़ा है। प्रत्येक राज्य को अलग-अलग संख्या में निर्वाचक मंडल मत आवंटित हैं जो इस आधार पर तय किए गए हैं कि प्रतिनिधि सभा में उसके कितने सदस्य हैं। इसमें दो सीनेटर भी जोड़े जाते हैं। कैलिफोर्निया राज्य में सर्वाधिक 55 निर्वाचक मंडल मत हैं। इसके बाद टेक्सास में इस तरह के 38 मत हैं। जो उम्मीदवार न्यूयॉर्क या फ्लोरिडा में जीत दर्ज करता है वह 29 निर्वाचक मंडल मतों के साथ ‘270’ के जादुई चक्कर की तरफ आगे बढ़ सकता है। इलिनोइस और पेनसिल्वानिया में इस तरह के बीस-बीस मत हैं। इसके बाद ओहायो में इस तरह के मतों की संख्या 18,जॉर्जिया और मिशिगन में 16 तथा नॉर्थ कैरोलाइना राज्य में इस तरह के मतों की संख्या 15 है। ट्रंप के पास इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के कई रास्ते हैं, लेकिन उनके लिए सर्वश्रेष्ठ रास्ता फ्लोरिडा और पेनसिल्वानिया में जीत का है। यदि वह दोनों राज्यों में जीत जाते हैं और नॉर्थ कैरोलाइना तथा एरिजोना, जॉर्जिया और ओहायो में बढ़त प्राप्त करते हैं तो वह जीत जाएंगे। 
इस बार माहौल दूसरा है क्योंकि करीब नौ करोड़ वोट मेल-इन वोट से डाले गए हैं और ऐसे में इन वोटों की गिनती में काफी वक्त लगता है और मूड पहचानना मुश्किल होता है. हालांकि, वोटिंग खत्म होने के कुछ वक्त बाद से ही कुछ राज्यों के नतीजे आ सकते हैं, जो पूरा सिलसिला 8 दिसंबर तक चलेगा।
अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया भारत से अलग है।यहां राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।अमेरिकी नागरिक उन लोगों को चुनते हैं जो राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। अमेरिका में कुल 50  राज्य हैं, 50 राज्यों से कुल 538 इलेक्टर्स चुने जाते हैं।इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में दो हाउस हैं. एक सीनेट और दूसरा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव राष्ट्रपति के चुनाव के लिए जाता है, पर यह पहली बार है जब 33 प्रतिशत सीनेट भी राष्ट्रपति चुनाव में जाएगा। हर राज्य में इलेक्टर्स की संख्या अलग-अलग है. जिस राज्य की आबादी जितनी अधिक होती है वहां उतने अधिक इलेक्टर्स होते हैं।राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 मतों की जरूरत होती है।
बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में प्री कोरोना चरण में सबसे कम बेरोजगारी दर दर्ज की गई थी।  अधिक वेतन और तेज़ वेतन वृद्धि बस केक पर एक चेरी जोड़ता है जिसमें 7.3 मिलियन नौकरियां सृजित हुईं जब से उन्होंने कार्यालय लिया।  राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से यह 500,000 से अधिक विनिर्माण नौकरियों में शामिल हो गया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने राष्ट्रपति ट्रम्प के तहत 100 से अधिक बार रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की।  इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रम्प के तहत, 7 मिलियन लोग भोजन टिकटों से बाहर आ गए हैं।  टैक्स कट्स एंड जॉब्स एक्ट 30 वर्षों में हस्ताक्षरित पहला बड़ा कर सुधार है, जिसके परिणामस्वरूप सभी 50 राज्यों, डीसी और 5 क्षेत्रों में लगभग 9,000 अवसर क्षेत्र हैं।  टैक्स कट्स एंड जॉब्स एक्ट ने चाइल्ड टैक्स क्रेडिट को 100% बढ़ा दिया।  राष्ट्रपति के तहत, नंबर एक आतंकवादी नेता अबू बक्र अल-बगदादी को निकाल लिया गया था।  राष्ट्रपति ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ दो महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित किए।  राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को वापस ले लिया।  जून 2019 में, राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जो ईरान सीमा सुरक्षा के खिलाफ विस्तारित प्रतिबंधों को अधिकृत करता है, राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बहुत उल्लेखनीय स्थान दिया गया है।  राष्ट्रपति ट्रम्प सीमा की दीवार बनाने के अपने वादे को पूरा कर रहे हैं।इस लिहाज से मैं कह सकता हूँ कि अमेरिका के लिए डोनाल्ड ट्रंप ही जरूरी हैं। बता दें कि राष्ट्रपति की सूची में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।  ट्रम्प प्रेसीडेंसी के दौरान शिक्षा स्वतंत्रता छात्रवृत्ति और अवसर अधिनियम को अपार समर्थन दिया गया है।  2019 में, राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो स्थायी रूप से अक्षम बुजुर्गों के लिए छात्र ऋण के 100% ऋण को समाप्त करता है। राष्ट्रपति ने पूरे कोविड-19 महामारी में बहुत समर्थन दिया।  जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन दिया गया।  इसके अलावा, राज्यों के वयस्क सदस्यों को 1200 डॉलर प्रत्येक का एकमुश्त मौद्रिक समर्थन दिया गया था, और बच्चों को प्रत्येक 500 डॉलर प्रदान किए गए थे।  चल रही महामारी द्वारा इस तरह की वैश्विक गड़बड़ी के समय में, अमेरिकी आत्मा को जीवित और एकजुट रखने के लिए राष्ट्रपति बहुत सफल रहे हैं।
 कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति हैं जिन्हें हम देखते हैं, वह एक अनुकरणीय नेता हैं।  राष्ट्रपति के सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में उनके राष्ट्रपति पद के तहत मेरा सबसे बड़ा सम्मान होगा।  यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि हमने उन्हें अपना राष्ट्रपति चुना। मुझे पूरा विश्वास है कि डोनाल्ड ट्रंप एक सशक्त और लोकप्रिय नेता के रूप में फिर से वापसी करेगें जो भारत के लिए सहयोगात्मक होगा, वही जीतेगें।
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