क्या है कोयला संकट? देश में बिजली संकट की क्या हैं 5 बड़ी वजहें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के सीईओ गणेश श्रीनिवासन ने शनिवार को लोगों से बिजली की खपत न्यायसंगत तरीके से करने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश भर में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन कम हो गया है और आने वाले दिनों में दिल्ली में बार-बार लोड शेडिंग हो सकती है.

नई दिल्ली: कोयले (Coal) की कमी के कारण देश बिजली संकट (Power Crisis) के मुहाने पर खड़ा है. हालांकि, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह (R.K. Singh) ने कहा है कि यह संकट अस्थाई है और जल्द ही दूर हो जाएगा. उन्होंने इसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का असर बताया है और कहा है कि हमारे पास कोयले की स्टॉक होल्डिंग अभी भी औसतन चार दिनों का है. लेकिन स्थितियां जल्दी नहीं सुधरीं तो भारत भी चीन की तरह बिजली कटौती करने पर मजबूर हो सकता है.

 

क्या है कोयला संकट?
देश में कोयले से चलने वाले अधिकांश पॉवर प्लांट कोयले के भंडार की कमी झेल रहे हैं. Central Electricity Authority के मुताबिक देश में कोयले से चलने वाले कुल 135 प्लांट हैं. नियमानुसार सभी पावर प्लांट को कम से कम 20 दिनों का कोयला भंडार रखना होता है लेकिन सितंबर-अक्टूबर में सभी पावर प्लांट के पास कोयले का भंडार घटकर चंद दिनों का रह गया.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के सीईओ गणेश श्रीनिवासन ने शनिवार को लोगों से बिजली की खपत न्यायसंगत तरीके से करने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश भर में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन कम हो गया है और आने वाले दिनों में दिल्ली में बार-बार लोड शेडिंग हो सकती है.

उन्होंने एक बयान में कहा कि दिल्ली डिस्कॉम को बिजली की आपूर्ति करने वाले कोयला आधारित बिजली स्टेशनों के पास एक-दो दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है. 1 अक्टूबर, 2021 को ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश के 134 थर्मल पावर प्लांट के पास मात्र चार दिनों का औसत कोयला भंडार बचा है.

 

देश में कोयला और बिजली संकट की क्या है वजहें:

1. बिजली की खपत और मांग में बढ़ोत्तरी: 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने NDTV से खास बातचीत में कहा कि देश में बिजली की खपत और मांग बढ़ी है, इसलिए पावर प्लांट्स पर अतिरिक्त दबाव आया है. उन्होंने कहा, “हमने 2 करोड़ 82 लाख घरों को बिजली सप्लाई से जोड़ा है. इन घरों में भी पावर की खपत बढ़ी है. पिछले साल के मुकाबले इस साल पावर की डिमांड काफी बढ़ी है, इसलिए बिजली उत्पादन में कोयले की खपत बढ़ी.” उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है.

2. बारिश ने बिगाड़ा कोल सप्लाई चेन: 

इस साल सितंबर के महीने में कोयला उत्पादन करने वाले क्षेत्रों में भारी बारिश होने की वजह से कोयले की खुदाई और ढुलाई बाधित हुई है. पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के कई कोल खादानों में पानी भर जाने की वजह से कई दिनों तक काम बंद रहा. इस वजह से भी कोयले का उत्पादन और सप्लाई पावर प्लांट तक नहीं हो सका.

. विदेशों से कोयला आयात में कमी:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत बढ़ने की वजह से साल 2019-20 की तुलना में इस साल कोयले के आयात में कमी आई है. इस कमी की भरपाई घरेलू कोयले से बिजली उत्पादन के लिए किया गया, जिससे स्टॉक में कमी आई. उदाहरण के लिए इंडजोनेशिया में मार्च में कोयले की कीमत 60 डॉलर प्रति टन थी जो सितंबर में बढ़कर 200 डॉलर प्रति टन हो गई.

 

4. कोविड में बढ़ी बिजली की खपत लेकिन कोयला उत्पादन घटा:
कोविड काल के दौरान देशभर के कोयला खादानों में कोयले की खुदाई प्रभावित हुई, जबकि कोविड के दौरान बिजली की डिमांड 200 गीगावाट तक पहुंच गई, और फिलहाल ये मांग 170-180 गीगावाट के आसपास है.

फेस्टिव सीजन और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी:

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि त्योहारी सीजन की वजह से फिर से बिजली की मांग बढ़ रही है और फिर से डिमांड बढ़कर लगभग 200 गीवावाट के करीब पहुंच जाएगा, और वहीं रहेगा. मंत्री ने कहा कि अक्टूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक देश में पावर की डिमांड ज्यादा रहेगी. इसके बाद हम स्थिति को काबू में कर लेंगे. इसेक अलावा कोविड के बाद इंडस्ट्रियल एक्टिविटी बढ़ी है, जिसकी वजह से बिजली की डिमांड भी बढ़ी है. अगस्त 2019 के मुकाबले 2021 अगस्त में देश में 18 अरब यूनिट की बिजली खपत बढ़ी है.

Sach ki Dastak

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x