” जिन्दगी की बात कर “


हर बात की तरह अब
इस बात पर कुछ बात कर
कुछ भाव चुन कुछ राग रख
कुछ याद रख कुछ खाक कर
पहले जिन्दगीं की बात कर
फिर बन्दगीं की बात कर,
देेख की पिछवाड़ता है भारत का नौजवाँ
कुछ नौकरी की बात कर कुछ
कुछ चाकरी की बात कर
नफरतो सें जलता है
मुफलिसी मे पलता है
कुछ बराबरी की बात कर
पहले जिन्दगीं की बात कर
फिर बन्दगीं की बात कर,
टोपीयों के फेर मे भेडियों के चाल मे
फसता है लडता है मरता है भूखा किसान
पहले तू हक अदायगीं की बात कर
पहलें जिन्दगीं की बात कर
फिर बन्दगीं की बात कर ,
रोगीयों के जाल मे कुछ ढोगींयों के जाल में 
मरती है बेटीयाँ सिसकतीं है बेटियां 
पहलें तू बेटियों की बात कर
फिर जातियो की बात कर
पहलें जिन्दगीं की बात कर
फिर बन्दगीं की बात कर ।।

……………………………………………………..
…………………………………………………….


अनिल रंजन
मेल- ranjanani05@gmail
शिक्षा- इलाहाबाद यूनीर्वसीटी से ग्रेजुएट
व्यवसाय- स्वत्रंत लेखन एवं शिक्षण,
जिला – मऊ ऊ०प्र०

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x