नारायण के 24अवतारो की कथा सुन भक्त हुए निहाल
सच की दस्तक डिजिटल न्यूज डेस्क चन्दौली
जितेंद्र मिश्रा
चहनिया क्षेत्र के लक्ष्मनगढ़ गांव स्थित लच्छू ब्रम्ह बाबा के प्रांगण में चल रहे सात द्विवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन रविवार को गया पीठाधिश्वर श्री वेकेटेश प्रपन्नाचार्य जी महराज ने श्री हरी के अन्य रूपां का वर्णन करते हुए बताया समाज कल्याण की उद्देश्य के लिए नारायण श्री हरी अनेक रूपों में जन्म लिया। स्वामी जी ने अति संक्षेप में भगवान विष्णु के विभिन्न 24अवतारों और उनके उद्देश्य का वर्णन की कथा बारी-बारी से श्रद्धालुओ को श्रवण करवाया। भक्त ध्रुव की कठोर तपस्या, भगवान से उनकी भेंट और उन्हें प्राप्त हुए दिव्य पद की कथा सुनाई जाती है, जो भक्ति की शक्ति और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। महात्मा विदुर के ज्ञान, वैराग्य और उनकी भक्तिपूर्ण जीवन शैली का वर्णन किया जाता है। देवहूति संवाद और कपिल मुनि का जन्मः सृष्टि के निर्माण और कपिल मुनि द्वारा अपनी माता देवहूति को दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान (सांख्य दर्शन) का प्रसंग को बताया। शिव-सती से संबंधित कथाएं भी सुनाई जो वैराग्य और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। इन कथाओं के माध्यम से भक्तों को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सांसारिक मोह से मुक्ति पाने की शिक्षा दी। ताकि जीव अपने सांसारिक बन्धनां से छुटकारा पा सके और अंत में नारायण का कृपा पात्र बन सके। वही स्वामी जी ने आज के समाज पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में नैतिकता पूरी तरह से बिलुप्त हो रही है। भाई, भाई के जान का दुश्मन, मामा-पिता, बेटा-बटी, मित्र यह सब नैतिकता विहीन होते जा रहे है जो उनके दुःख का सबसे बड़ा कारण बन बैठा है। कम से कम भरत जैसा भाई सुदामा व श्रीकृष्ण जैसा दोस्त, कौशिल्या जैसी माता, सीता जैसी पत्नी, दशरथ जैसा पिता बनने का प्रयास करे तभी जीव का कल्याण सम्भव हो पायेगा। स्वामी जी लोगो से अपील किया आप कथा मत सुनो अगर सुनते हो तो उसका मनन करो ताकि तुम्हारे अन्दर के सारे, रोग, दोष, पाप, द्ववेष, ईष्या का नाश हो सके और तुम एक अच्छा इंसान बनकर अपना जीवन यापन कर सको अगर तुम्हारे विचार मलीन होगे तो समस्त असुरी शक्तियां तुम्हारे अन्दर विद्यमान हो जायेगी और तुम्हारा जीवन कष्ट मय हो जायेगा इसलिए हे! कथा श्रोताओ तुम नारायण का ध्यान करके अपने अन्दर के समस्त विकारों को बड़े आसानी से दूर कर सकते हो तुम्हारा कल्याण हो। इस दारौन राजेन्द्र मिश्र, अभिमन्यु मिश्रा, उमेश मिश्र, राजू ओझा, धन्नजय सिंह, गणेश सिह, गउ प्रधान, मेलू गुप्ता, राजन बरनवाल, चमन पाण्डेय, गणेश सिंह, दिवाकर पाण्डेय, कृष्णा पाण्डेय, विन्ध्याचल तिवारी, रोहित गुप्ता, मुख्य यजमान धु्रव मिश्र उर्फ प्रिन्स सहित सैकड़ो नर नारियां ने कथा का श्रवण करते हुए आरती कर प्रसाद ग्रहण किया। कथा का संचालन राजेन्द्र पाण्डेय ने किया।
