गायत्री नौ कुंडीय महायज्ञ व प्रवचन में धर्म और पुण्य पर दिया गया संदेश
सच की दस्तक डिजिटल न्यूज डेस्क चन्दौली
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के सुभाष नगर स्थित कोट माता मंदिर के प्रांगण में गायत्री नौ कुंडीय महायज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए कथावाचक ने कहा कि ईश्वर के द्वारा दिया गया धन यदि सही स्थान पर और समाजहित के कार्यों में खर्च किया जाए, तो उससे पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन यदि वही धन ऐसे कार्यों में लगाया जाए जो समाज और धर्म के विपरीत हों, तो वह धन मनुष्य को पाप का भागीदार बना देता है।
प्रवचन के दौरान एक प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथावाचक ने बताया कि एक धनसेठ से धार्मिक अनुष्ठान के लिए सहयोग देने का अनुरोध आयोजक मंडल द्वारा किया गया था। धनसेठ ने सहयोग देने की सहमति तो जताई, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि उसने जीवन में कभी भी धार्मिक कार्यों में अपना धन खर्च नहीं किया था। जब धार्मिक आयोजन का समय नजदीक आया, उससे पहले ही धनसेठ के पुत्र का एक गंभीर दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया। इसके बाद धनसेठ को अपने पुत्र के इलाज के लिए बाहर जाना पड़ा और इस बार धार्मिक आयोजन में उसका धन नहीं लग सका।
कथावाचक ने कहा कि संभवतः यह भी ईश्वर की ही इच्छा रही होगी, लेकिन यदि धनसेठ ने पहले ही अपनी कमाई का कुछ अंश धर्म और पुण्य के कार्यों में समर्पित किया होता, तो शायद उसके पुत्र पर ईश्वर की विशेष कृपा होती। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को यह सीख दी कि मनुष्य को अपनी आय का एक हिस्सा अवश्य ही धार्मिक अनुष्ठानों, सेवा और समाज कल्याण के कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। प्रवचन के दौरान उसे संगीतमय करने में सहयोग राम नरेश आचार्य, रवि शंकर शास्त्री,रामअनुज गिरी,राम कुमार सोनी ने दिया।
नौ कुंडीय महायज्ञ और प्रवचन को सुनने के लिए मुख्य ट्रस्टी उदय नारायण उपाध्याय, सभासद आरती यादव सहित शीतलहरी क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच आरती एवं प्रसाद का वितरण किया गया।
