डॉ राजेश कुमार व्यास को मिला केन्द्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान-


नई दिल्ली 30 जनवरी 2019 – 


जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कवि एवं आलोचक डॉ. राजेश कुमार व्यास को केन्द्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया गया है. केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह में अकादमी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर कम्बार ने उन्हें एक लाख रुपये नकद, प्रशस्ति पत्र और ताम्र फलक प्रदान कर सम्मानित किया. डॉ राजेश कुमार व्यास राजस्थान के सूचना सेवा में संप्रति उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं.

डॉ. व्यास को उनकी काव्य कृति ‘कविता देवै दीठ’ के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया. डॉ. व्यास की पुरस्कृत काव्य कृति राजस्थानी भाषा की आंचलिक मिठास के साथ ही शब्द-शब्द ओज में कला और संस्कृति के अनूठे दृश्य चिचराम हैं. राजस्थानी भाषा में कविता की नई जमीन तैयार करने वाली यह कृति डॉ. व्यास की पैनी काव्य दृष्टि, संवेदना और परख की गहरी समझ में राजस्थानी शब्दों की अनूठी लय लिये है। 

Well known Sanskritist, poet and critic Dr. Rajesh Kumar Vyas has been given the highest award of Central Sahitya Akademi. On the grand literary festival organized by the Central Sahitya Academy in New Delhi on Tuesday, the Academy President Chandrashekhar Kambar honored him with a cash prize of Rs. 1 lakh, citation and copper plate. Dr. Rajesh Kumar Vyas is presently working as Deputy Director in Information Service of Rajasthan.

Dr. Vyas was given this award for his poetic work ‘Kavita Devay Digh’. Dr. Vyas’s award-winning poetic works, along with the regional sweetness of Rajasthani language, are the unique views of art and culture in word-oz. This masterpiece of poem in Rajasthani language has taken the unique aim of Rajasthani words in the deep understanding of Dr. Vyas’ poetic vision, sensation and assay.

डॉ. व्यास को इससे पहले राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी के ‘गणेशीलाल व्यास उस्ताद ‘पद्य’ पुरस्कार के साथ ही भारत सरकार का प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन’ अवार्ड, राजस्थान सरकार की ओर से उत्कृष्ट लेखन पुरस्कार, पत्रकारिता का प्रतिष्ठित ‘माणक’ अलंकरण, अन्तर्राष्ट्रीय ध्रुपद धाम सोसायटी का ‘विशिष्ट लेखनी पुरस्कार’, श्रीगोपाल पुरोहित स्मृति गुणीजन सम्माान’, पब्लिक रिलेशन सोसायटी आफ इण्डिया की ओर से ‘जनसम्पर्क उत्कृष्टता सम्मान’, राजस्थानी भाषा अकादेमी का ‘भाषा सेवी’ सम्मान सहित विभिन्न अन्य पुरस्कारों से भी निरंतर सम्मानित किया जाता रहा है। 

व्यास की साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 21 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं. इनमें राजस्थानी कविता संग्रह ‘जी रैयो मिनख’, ‘कविता देवै दीठ’ और ‘दीठ रै पार’ अत्यधिक चर्चित रहे हैं. राजस्थानी भाषा की विषिष्ट कहानियों की कृति ‘राजस्थानी की कालजयी कहानियां’ का भी उन्होंने देश के ख्यातिलब्ध कथाकार यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ के साथ कोई 25 वर्ष पहले सम्पादन किया था।

डाॅ. व्यास ने दूरदर्शन से प्रसारित राजस्थानी साहित्यिक कार्यक्रम ‘मरुधरा’ का भी कोई एक दशक से अधिक समय तक संयोजन-संचालन किया है। 

राजस्थानी साहित्य, और कलाओं के साथ ही पत्रकारिता, पर्यटन और संस्कृति पर देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों, साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादेमी, ललित कला अकादेमी आदि में दिए व्याख्यानों से भी उनकी विशेष पहचान है. केन्द्रीय ललित कला अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन कला’ के एक अंक के वह अतिथि सम्पादक रहे हैं।

राजस्थान ललित कला अकादेमी की पत्रिका ‘आकृति’ के ‘लोक आलोक’ और ‘कलाओं के अन्तःसम्बन्धों पर एकाग्र’ विशेष अंको का भी उन्होंने सम्पादन किया है. वह राजस्थान सूचना सेवा में संप्रति उप निदेशक पद पर कार्यरत हैं.

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