“डॉ. सुधा रानी पांडेय, पूर्व कुलपति द्वारा रचित नाटक ” विजयिनी” का लोकार्पण संपन्न हुआ “

विदुषी लेखिका डॉ. सुधा रानी पांडे जी पूर्व कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा रचित नाटिका विजयिनी का लोकार्पण समारोह हिंदी साहित्य समिति देहरादून के तत्वावधान में दिनांक ३अप्रैल२०२२ को ओएनजीसी. अकादमी सभागार देहरादून में संपन्न हुआ।

फाईल फोटो : विदुषी लेखिका डॉ. सुधा रानी पांडे जी

फाईल: ओएनजीसी. अकादमी सभागार देहरादून

    फाईल फोटो : विजयिनी का लोकार्पण समारोह

फाईल फोटो: प्रसिद्ध साहित्यकार, गीतकार,संपादक श्री शिवमोहन सिंह जी

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती राधा रतूड़ी जी (आई.ए.एस) अपर मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मनोज बड़थ्वाल जी कार्यकारी निदेशक एवं संस्थान प्रमुख ओएनजीसी अकादमी देहरादून ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम में हुआ सम्मा

सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. मधु शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्राचार्य एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून, श्री असीम शुक्ला वरिष्ठ साहित्यकार, श्री अनिल रतूड़ी, आयुक्त , सेवा का अधिकार आयोग उत्तराखंड , पूर्व महानिदेशक पुलिस उत्तराखंड शासन तथा श्री ललित मोहन रयाल आई ए एस. रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. राम विनय सिंह एसो. प्रो. डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून तथा संचालन कवि साहित्यकार श्री शिव मोहन सिंह उप संपादक “सच की दस्तक” ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गीतकार श्रीमती नीता कुकरेती जी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया । मंचासीन अतिथि गण के स्वागत-सम्मान के बाद कवयित्री साहित्यकार श्रीमती डाॅली डबराल ने स्वागत उद्बोधन किया ।

इस अवसर पर विदुषी लेखिका डॉ. सुधा रानी पांडे जी ने कहा कि कालिदास की जीवन गाथा और विद्योत्तमा प्रसंग की कथावस्तु हेतु इस नाटिका में मैंने डॉ भगवतशरण उपाध्याय, डॉ. शिवानंद नौटियाल और डॉ. हरिदत्त भट्ट शैलेश द्वारा स्थापित मान्यता कि कालिदास गढ़वाल क्षेत्र के ही थे, का अनुसरण किया है। प्रसिद्ध सिद्ध पीठ कालीमठ का उल्लेख किया है तथा मंदिर में शिलापीठ पर अंकित पंक्तियों द्वारा कालीमठ का ऐतिहासिक साक्ष्य भी उद्धृत किया गया है।

इस पुस्तक पर अंतरराष्ट्रीय महिला केंद्र के सौजन्य से डॉ सुधा रानी पांडे जी को “विदुषी विद्योत्तमा स्त्री शक्ति सम्मान” भी प्रदान किया गया है ।

मुख्य अतिथि श्रीमती राधा रतूड़ी जी ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ सुधा पांडेय जी की यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। श्री ललित मोहन रयाल ने आधुनिक युग में कालिदास के जीवन वृत्त पर विरचित क‌ई रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नाटक में विद्योत्तमा के सहज परिवेश को सुंदर ढंग से गूंथा गया है।

श्री असीम शुक्ल जी ने कहा कि डॉ॰ सुधारानी पांडेय जी द्वारा रचित नाटिका “विजयिनी” में सात्विक अहम् और विनम्र स्वत्व निहित हैं। इस कृति के माध्यम से निर्विवाद रूप से यह समझा जा सकता है कि विद्योत्तमा परिणिता के रूप में शक्ति स्वरूपा ही थी जिसने ज्ञान और साधना के उत्तुंग शिखर पर पर्णदत्त को प्रतिष्ठित करके कालिदास बनाया। डॉ मधु शर्मा जी ने “विजयिनी” नाटिका को नारी जीवन की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

सारस्वत अतिथि श्री अनिल रतूड़ी जी जो स्वयं हिंदी के प्रशस्त लेखक हैं, उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति की प्रतीक विद्योतमा के वृत्त पर लिखी इस कृति की प्रासंगिकता को नकारा नहीं जा सकता। नारी के चैतन्य की यह ज्ञान की दीपशिखा प्रत्येक युग के लिए प्रेरक है। उन्होंने इस कृति की लेखिका को उत्कृष्ट रचना के लिए हार्दिक बधाई दी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ0 राम विनय सिंह जी

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ0 राम विनय सिंह जी ने पुस्तक के महत्व को प्रतिपादित करते हुए नाटिका साहित्य में ‘ विजयिनी’ नाटिका के वैशिष्ट्य को प्रतिपादित किया।

उन्होंने तद्युगीन सौन्दर्य शक्ति को भाषा भाव के युगीन यथार्थ से जोड़ने के सफल संधान के लिए लेखिका की भूरि भूरि प्रशंसा की। स्त्री-पुरुष की सामाजिक भेदबुद्धि को मानव मात्र की मानसिक अज्ञानता बताते हुए उन्होंने ज्ञानाश्रयी बुध्दि के सम्मान पर जोर दिया।

कालीदास और विद्योत्तमा संवाद

उन्होंने विदुषी विद्योत्तमा और महाकवि कालिदास के अन्योन्य भाव संबंध की व्याख्या के प्रसंग में कालिदास को हिमालयी निसर्ग का उन्मुक्त उद्गाता बताया और मेघदूत में चित्रित यक्ष-यक्षिणी की गाथा को कालिदास और विद्योत्तमा की वास्तविक कथा बताते हुए कालिदास और विद्योत्तमा का वास्तविक उत्तराखंडी होना सिद्ध किया।

डॉ0 सिंह ने बताया कि विद्योत्तमा का लिखित साहित्य भले उपलब्ध न हो परन्तु महाकवि कालिदास के काव्यों में उनका व्यक्तित्व विविध रूपों में उजागर हुआ है। हमें कालिदास की हृदयाभिव्यंजना में ही विदुषी विद्योत्तमा को खोजना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में हिंदी साहित्य समिति के महामंत्री श्री हेमवती नंदन कुकरेती जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। भरत वाक्यम के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ वीके एस संजय, डॉ विपिन चंद्र घिल्डियाल, सूचना आयुक्त श्री राजेश चंद्र वर्मा ,श्री वंशीधर तिवारी आईएएस, श्री अमित श्रीवास्तव आईपीएस, श्रीमती जया बलूनी पुलिस अधीक्षक, राजीव बलूनी, श्रीमती शची शर्मा न्यायाधीश, डॉ. राजीव पांडे, श्रीमती मंजू काला संयुक्त संपादक “लोक गंगा”, कल्पना बहुगुणा,रोहित कोचगवे ब्यूरो प्रमुख ” सच की दस्तक “,रजनीश त्रिवेदी संपादक ‘नवोदित प्रवाह’ श्रीकांत श्री,पवन शर्मा तथा शहर के जाने-माने प्रतिष्ठित एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे॥

Sach ki Dastak

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