चन्दौली के चकिया में3800 साल पुराना अवशेष

मनोज गुप्ता की उत्तर प्रदेश के चंदौली से

उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली के चकिया तहसील क्षेत्र के सीने में इतिहास के कई ऐसे राज दफन है, जो समय-समय पर बाहर आती रहती है। कुछ ऐसा ही अवशेष या फिर यूं कहें राज गुरूवार की शाम उस समय खुला जब बीएचयू की पुरातत्व टीम खुदाई में जुटी हुई थी। जहां पिछले एक महीने से लतीफशाह के कर्मनाशा नदी किनारे चल रहे खुदाई में 700से 3800ईसा पूर्व की मानव सभ्यता के अवशेष मिलें है। बीएचयू के शोध छात्रों द्वारा किये जा रहे खुदाई के दौरान मिट्टी के पात्र, चाकू, कुल्हाड़ी व अन्य चीजें पाई गई है। इसी के साथ पुरातत्व टीम ने लौह अयस्क को गलाने कच्चे लोहे की भठ्ठियां भी खुदाई के दौरान प्राप्त की। टीम ने काले व नीले रंग के लोहे व मिट्टी के पात्र, चाकू, कुल्हाड़ी, हंसिया, हथौड़ी, छेनी, बाली, हड्डियों के औजार, पत्थरों के उपकरण जैसे लोढ़ा, सील आदि पाए गए हैं, जिससे यह प्रमाणित होता है कि कई सौ साल पहले यहां पर मानव सभ्यता का वास हुआ करता था। शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डा. प्रभाकर उपाध्याय के बतातें है कि खुदाई में प्राप्त अवशेष लौह अयस्क की भठ्ठियों में तपाकर बनाई गई है, जो कि कई सौ साल पहले विंध्य के जंगलों में निवास कर रहे अगरियां जनजाति के लोगों द्वारा पहाड़ों में पर्याप्त मात्रा में मौजूद हेमेटाइट को गला कर बनाया गया है। बताया कि टीम द्वारा आने वाले दिनों में मंगरौर गांव के समीप प्राचीन मामा मारीच के मंदिर के आस-पास खुदाई की जाएगी।


बता दें कि जंगलों व पर्वतों से घिरे इस क्षेत्र में अनेक ऐसी जगहें है, जहां पर पूर्व में भी खुदाई के दौरान पुरातन अवशेष मिलें है। जिसमें कई वर्ष पूर्व मलहर गांव में हुए खुदाई के दौरान लगभग 3600साल पुराने मानव लौह अयस्क के प्रमाण मिलें थे साथ ही 400ईसा पूर्व चांदी के सिक्के के प्रमाण मिलें थे। वहीं करीब 12वर्ष पूर्व घुरहूपुर पहाड़ी पर स्थित गुफाओं में भी बौद्ध कालीन भित्तिचित्र पाए गए थे।

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